क्या पत्रिका के पत्रकार को ‘जलजला’ शब्द का अर्थ नहीं मालूम है?

Rajeev Sharma-

क्या राजस्थान पत्रिका के संपादक अपना अख़बार नहीं पढ़ते? अख़बारों, पत्रिकाओं आदि को आम आदमी का साहित्य माना जाता है, इसलिए इनकी भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे आम आदमी भी समझ सके, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि ‘नया’ लिखने के चक्कर में कुछ भी लिख डालें।

मैंने ग़ौर किया है कि कोरोना काल में अख़बारों में भाषा संबंधी ग़लतियां बहुत ज़्यादा बढ़ गई हैं। इसका क्या कारण है, शायद वे ही बता सकें। मैं वर्षों से या कहूं कि बचपन से राजस्थान पत्रिका पढ़ रहा हूं। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इस अख़बार को पढ़कर मैंने हिंदी सीखी। अब इसमें ग़लतियों की भरमार है। इसके संपादक इसे पढ़ते भी हैं या नहीं?

आज (13 अगस्त, 2021) राजस्थान पत्रिका के जयपुर संस्करण में (पृष्ठ संख्या 11 पर) एक ख़बर छपी है:

केन्द्र से आई टीम के सामने पीड़ित लोगों का फूटा दर्द
ऐसा जलजला कभी नहीं देखा, पूरा गांव ही दूसरी जगह बसा दो।

खबर कोटा की है जिसमें अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए नुकसान के बारे में बताया गया है। खब़र में ‘जलजला’ शब्द लिखा गया है, जिस पर मैं हैरान हूं। क्या इस अख़बार के संपादक नहीं जानते कि ‘ज़लज़ला’ का जल से कोई संबंध नहीं है? ख़बर लिखने वाले ने सोचा होगा कि लोग ‘जल’ से पीड़ित हैं, इसलिए ‘जलजला’ लिख दो। कौन शब्दकोश लेकर ढूंढ़ने बैठेगा!

‘ज़लज़ला’ अरबी शब्द है। उर्दू शायरी में इसका बहुत इस्तेमाल हुआ है। इसका सही अर्थ है: Earthquake, भूकंप, भूचाल, भूडोल। ‘ज़लज़ला’ का बारिश से उतना ही संबंध है जितना मिठाई की दुकान का कोरोनारोधी वैक्सीन निर्माण से!!

राजीव शर्मा
कोलसिया

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Comments on “क्या पत्रिका के पत्रकार को ‘जलजला’ शब्द का अर्थ नहीं मालूम है?

  • when ever institute officer the seat on basis of white face, sweet voice and flattering the output of that institute will lake RAJASTHAN PATRIKA because nowadays in Patrika management giving the preference of who have gotten achievement in flattering. One more thing I want to clear here Dr. Gulab Kothari has also no knowledge his position is like Rahul Gandhi because what ever he got is result of His father MR. Kulish sab. what article is published in Patrika is written by one team not written him which copied from late great Sanskrit scholar of Jaipur. what ever he speech on virtual meeting is totally opposite picture can be seen in group . from last 15 year they have given top position of their relative not out sider. one more thing we want to tell here that Rajasthan Patrika Open one company forte foliage is forge company where they given appointment un trained people @ 8000/- can you imagen is it possible to get scholar in small salary in story reason is that because their senior staff are not so educated that why Rajasthan Appoints such type of people so that they can take work and admin over them is the result of JALJALA .

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    • विजय चौधरी कलमकार says:

      निहार कोठारी पत्रिका का राहुल गांधी है। जिसने ऐसे ऐसे ही लोग रख रखे है जो अखबार को निपटा सके। लोक डाउन तो अब आया है, लेकिन निहारिया तो 8 साल से बोल रहा है पत्रिका मर रहा है। इसलिए चिंता मत कीजिये पत्रिका बहुत जल्दी इतिहास बन जायेगा।

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  • मनोज टांक says:

    पत्रिका अब चापलूसी करने जैसे पत्रकारों से गिरी हुई है, डेस्क पर काम करने की बजाय अपने अधिकारियों की चापलूसी औऱ अपने ही स्टाफ में एक दूसरे को निपटाने की लगी है। जिसका परिणाम आज पत्रिका का स्तर गिरता जा रहा है।

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