पत्रकार संदीप हत्याकांड की भी सीबीआई जांच से एमपी सरकार का इनकार, जांच एसआईटी को

बालाघाट (म. प्र.) : पत्रकार संदीप कोठारी को अगवा कर जिंदा फूंक देने की घटना की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई है। दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। तीसरे फरारी पर 30 हजार का इनाम घोषित हो गया है। संदीप के भाई नवनीत का कहना है कि उनके भाई की हत्या में खनिज, भूमाफिया का हाथ है। इस मामले की केद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। इस मांग को राज्य के गृहमंत्री बाबू लाल गौर ने नकार दिया है। कोठारी तीन वर्ष पूर्व एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार थे, वर्तमान में भी वे लेखन का कार्य किए जा रहे थे। आरोपियों का चिटफंड, खनन सहित अन्य कारोबार है। कोठारी इन आरोपियों की गतिविधियों के खिलाफ समाचार लिखते रहे हैं।

गौरतलब है कि जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर कटंगी क्षेत्र से शुक्रवार की देर शाम पत्रकार संदीप कोठारी (28 वर्ष) का कार सवार लोगों ने अपहरण कर लिया था। संदीप अपने एक मित्र ललित के साथ मोटरसाइकिल से थे। आरोपियों ने संदीप के मित्र की जमकर पिटाई की थी और उसे मौके पर ही छोड़ दिया था। 

पुलिस महानिरीक्षक डीसी सागर ने सोमवार को बताया कि कोठारी के अपहरण की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तलाशी अभियान तेज कर दिया और दो संदिग्धों- विशाल तांडी और ब्रजेश डहरवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने अपहरण के बाद हत्या कर जलाकर मारने की बात स्वीकारी।

सागर के मुताबिक, वर्धा पुलिस शव को रेलवे ट्रैक के पास से शनिवार को ही बरामद कर चुकी थी और उसके लिए मृतक अज्ञात था।  बालाघाट पुलिस ने वर्धा पहुंचकर कोठारी का शव बरामद कर किया और सोमवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस हत्या की मुख्य वजह का पता लगाने में जुटी है। हत्याकांड को अंजाम देने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं एक आरोपी राकेश फरार है। फरार आरोपी राकेश सर्नवानी पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस हत्या की वजह आपसी लेनदेन को मान रही है। 

सागर का कहना है कि मामले की जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस (एसडीओपी) के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया गया है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यह हत्या समाचार लेखन को लेकर नहीं है, कुछ वर्ष पूर्व जरूर दोनों के बीच खबर लिखने को लेकर विवाद हुआ था। कोठारी के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं और उनके खिलाफ जिलाबदर जैसी कार्रवाई भी हुई है।



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