सुनो तनुजा त्रिवेदी

पूजा व्रत गुप्ता


मानती थी कि तुम इस बार भी कुछ ऐसा लाओगी जो महीनों तक दिमाग पर छाया रहेगा। वैसे भी पिछले एक महीने से तुम्हारे Swagger ने ज्यादातर लड़कियों का दिमाग हिला के रखा हुआ है…अब घर में होने वाली अगली शादी का उन्हें इन्तजार भी है ताकि तुम्हारे स्वैगर वाले स्टेप्स को दोहराने का मौका मिले…

पहले मैं इसे Sweater समझकर ही तुम्हारी तरह झूमने की कोशिश कर रही थी लेकिन बाद में समझ आया कि तुम्हारा swagger यानि नखरा भी सेक्सी हो सकता है…वैसे तो नखरा हर लड़की के पास होता है बस उसे तुम्हारी तरह इसे एक पोसिटिव वे में लेना चाहिए …तब … जब उससे लोग कहते हैं कि ” बड़ी नखरे वाली लड़की है “…

चलो … कम से कम अब हम लड़कियाँ इस लाइन पर भी इतरा लिया करेंगी …

वैसे तो तुम्हारी कही हुयी हर लाइन ही माशाअल्लाह इतराने वाली है… 

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” हम थोड़े बेवफा क्या हुए … आप तो बदचलन हो गए शर्मा जी

” एक लड़की क्या-क्या सपने सजाती है जब वो लव मैरिज करती है “

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सुनो मेडम … लव मैरिज ही नहीं … लड़कियां तो मैरिज के नाम से ही सातवे आसमान में होती हैं … लव हो या अरेंज …उन्हें क्या ??उनकी तो बस शादी होनी चाहिए…

और हाँ ये भी उतना ही सच है कि शादी कोई भी हो दोनों ही तरह की लड़कियों को बीवी बनने के बाद अचानक ऐसा लगता है की उनकी लाइफ ” झ**” यानि डिस्ट्रॉय हो गयी है….अरे ये भी उनके नखरे के दायरे में आता है …लेकिन अगर उनसे इसका रीज़न पूछा जाये तो सारी बीवियां एक स्वर में ही बोलेंगी …जैसा आप बोली थीं तनूजा त्रिवेदी ….. नॉनस्टॉप ब्ला …ब्ला … ब्ला ….

पर यही तो बिना सर पैर वाला तुम्हारा बोलना तालियाँ और सीटी मारने मारने पर मजबूर करता है।मुझे सीटी बजाना आती नहीं इसलिए हर मिनट हथेली लाल जरूर हो रही थी…

वैसे मानना पड़ेगा तनूजा त्रिवेदी …इस बार तुमने उन पतियों का अधिकार भी छीन लिया …जो सोचते हैं कि उनकी बीवी शादी के बाद मोटी हो गयी है…और पहले वो कटरीना,करीना या ऐश्वर्या लगती थी।

इस बार तो तुमने अपने एक डायलॉग से ही सारी बीवियों का सन्देश ऐसे पतियों तक पहुँचा ही दिया ….

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” अदरक हो गया है ये आदमी … कहीं से भी बढ़ रहा है “

हाँ तो क्या ?? शादी से पहले क्या में ऋतिक रोशन था ..

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जानती हूँ तुम्हें ऋतिक थोड़े ही चाहिए तनु … तुम्हें तो वो चाहिए जो बस तुम्हारा नखरा उठाता रहे …तुम्हारी तारीफ करता रहे….क्योंकि तुम तो सालों पहले तुम्हारे प्यार में पागल रिक्शे वाले की भी भावनाओं को ध्यान में रखकर उसे भी गले लगा सकती हो …

ये गले लगाना कितना जरुरी होगा ना तुम्हारे लिए ?? जबकि लंदन में सिर्फ तुम पति और 4 कबूतरों के साथ रहती हो।कितना खलता होगा न ऐसे रहना एक ऐसी लड़की को जिसका बिना बकर बकर के दिन ना गुजरता हो…

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कौन था वो ?? 

दोस्त था …

अब रिक्शे वाले भी तुम्हारे दोस्त हो गए .

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खैर … उनके बारे में क्या कहेंगे जो कानपुर पहुँचते ही मिलते तो आपसे ” दीदी ” कहकर हैं और ख़्वाब बीवी बनाने के पाल लेते हैं….

लेकिन तुम्हारे दिमाग की भी दाद देनी पड़ेगी तनु कि तुम भी अधिकतर लड़कियों की तरह ये जानती थी कि ये ” दीदी” बोलने वाला भैया असल में है क्या …

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दीदी बोलते ही हो या मानते भी हो ??

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मैंने और शायद मेरी तरह बाकी लड़कियों ने भी ये ” तिलंडी ” पहली बार ही सुना हो।पर अच्छा हुआ … कि तुमने इसके साथ-साथ उसका भी मतलब समझा दिया… यानि वो होता है… Destroy…..कई बार कॉलेज में ये डिस्कशन भी हुआ है कि आखिर इसका मतलब है क्या ? जो दरअसल सबकी लाइफ के साथ जुड़ जाती है।

मेरी लाइफ की *** हो गयी है

**** मतलब – ….मतलब … destroy 

खैर अब तुम आ गयी हो और सिर्फ 3 घंटे में ही सबके दिमाग में भौचल मचा दिया है तो एक बात बताये देते हैं तुमको…. तुम्हारे नखरे और झगड़े से ज्यादा इस बार दत्तो के दांतों और उसके ट्रैक सूट वाले किरदार ने तालियाँ बजाने पर मजबूर किया था मुझे।

मेरे आसपास ऐसी कई लड़कियों से पाला पड़ता है जो दांत बड़े होने के कारण खुद को मन ही मन कोसती हैं।और ना जाने क्या -क्या जतन भी करती हैं। पर तुमने कितनी खूबसूरती से दिखा दिया कि सादगी इन अंगों से कभी नहीं जुड़ सकती। 

ये मर्दों के समझ से परे है जो बड़े दांत वाली लड़कियों को रिजेक्ट करते हैं ….पर मैं तुमसे खुश हूँ कम से कम उन लड़कियों को थोडा आत्मविश्वास तो मिला ही होगा …

जरा सोचो …अगर तुम्हारे दांत बड़े ना होते तो क्या तुम इस फ़िल्म में इतनी खूबसूरत लगती ??

और क्या कहने कुसुम की हरियाणवी के ?? तनुजा त्रिवेदी की अंग्रेजी और कनपुरिया हिंदी पर जो हरियाणवी हावी हुयी है वो जान है इस फ़िल्म की।

बाद बाकी मिनट – मिनट पर पप्पी जी की बेतुकी बात जो बस हंसाती है उससे ये कहना भी गलत नहीं कि उनके बिना ये फ़िल्म अधूरी होती…

और अन्तः शर्मा जी की सादगी की क्या कहूँ … फ़िदा हो गयी … उनकी मासूमियत तो किसी का भी दिल पिघला दे … फिर वो तुम्हारा नखरा ही क्यों ना हो … बस यही सादगी भरा प्यार ही तो लौटा लाता था … तुम्हारे अंदर छुपी हुयी उस प्यारी तनु को जो भले ही गुस्से में चूड़ियाँ उतार दे , सिन्दूर मिटा दे …. पर शर्मा जी के सामने आते ही ढेर हो जाती है …. अचानक हर बुरी लत से दूर हो जाती है …और नाँचते-नाँचते रो सकती है … जो मन्नु जी की पसंद की तरह दिखने के लिए पार्लर जाकर खुद को बदलने की कोशिश कर सकती है….और फिर आम बीविओं की तरह ” तुम्हें मेरी याद नहीं आई ” और ” क्या ये वही टाई पहनी है तुमने जो मैंने दी थी ???

सिर्फ इतनी सी बात पर देर तक तर्क- वितर्क कर लड़ भी सकती है…

जाते -जाते बस इतना…कि अब तुम तब तक मेरा दिमाग का दही करती रहोगी …जब तक एक और धमाका लेकर नहीं लौटती हो तनुजा त्रिवेदी..

तुम्हारे अगले किरदार के इन्तजार में

तुम्हारी डाय हार्ट फेन

पूजा व्रत गुप्ता

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