दैनिक भास्कर ने मच्छर मार अखबार छापा, आप भी देखें-पढ़ें

सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर के मच्छर मार अखबार की बहुत चर्चा है. भास्कर का दावा है कि इस अखबार को औषधीय घास सिट्रोनेला आयल में मिलाकर छापा गया है, इसलिए यह पूरी तरह मास्कीटो रिपेलेंट है.

सवाल उठ रहा है कि क्या इस अखबार में रखकर कुछ भी खाया नहीं जा सकता क्योंकि वह जहरीला होगा…

पढ़िए लोगों के कमेंट….

Ravish Kumar यह ऐतिहासिक घटना है. 350 संपादकीय से भी बड़ी घटना.

Brijesh Singh : अख़बार अपना काम कर रहा है। संपादक मच्छर मार रहा है।

Kaushi Singh ये जो कॉलम है कितने रद्दी वाले पढ़ेगें… कितने लिफाफे बनाने वाले, समोसे और पकौड़ी परोसने वालों को यह पता चल पाएगा कि इसमें खाने की चीजें नहीं डालनी थी… हद है… ये ‘क्रिएटिविटी’ नहीं… सरासर… ‘……’ है. पाठक के लिए खड़े होना है तो सरकार पर दबाव बनाओ, खबरें छापो, समस्या गंभीरता से उठाओ… वो होगा नहीं काहे कि विज्ञापन जो आ जाता है पूरे-पूरे पन्ने का…

Vikas Shukla मतलब इस अख़बार में पोहा और जलेबी भी न खा पाएंगे।

Shikha Singh इनोवेशन के नाम पर यह कुछ भी कर सकते हैं।

Vijai Gupta काश the टायर भी अपना काम करता

धरा पाण्डेय भास्कर को बहुत भरोसा है अपनी ‘क्रिएटिविटी’ पर।

Rajvardhan Baldua इस अखबार का संपादक खुद भी मर जाता हैं

Syed Quasim वैसे भी ज़हर ही भेजते थे छाप कर…

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One comment on “दैनिक भास्कर ने मच्छर मार अखबार छापा, आप भी देखें-पढ़ें”

  • प्रमोदपाल सिंह says:

    काश,अखबार मच्छर नियंत्रण पर सरकार की विफलता को फोकस कर लेता।

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