वरिष्ठ पत्रकार से वरिष्ठ साधु बने माधवकांत मिश्रा का निधन

-विद्युत मौर्य-

श्री माधवकांत मिश्र, मेरे पहले संपादक, 12 सितंबर को अनंत यात्रा पर प्रस्थान कर गए. कई नए अखबार शुरू किए, कई हजार लोगों को नौकरियां दी. सैकड़ो लोगों को पहली नौकरी दी.

माधवकांत

कुछ साल पहले महामंडलेश्वर स्वामी मार्तंड पुरी हो गए थे. सात नवंबर 2019 को कालिंदी कालेज में उनसे आखिरी मुलाकात हुई थी।

आप यादों में हमेशा साथ रहेंगे।

आपके शब्द-

पुण्य हूं न पाप हूं
जो भी हूं अपने आप हूं
अंतर देता दाह
जलने लगता हूं
अंतर देता राह
चलने लगता हूं…

पत्रकार विद्युत मौर्य की एफबी वॉल से।

नवीन कुमार घोषाल की टिप्पणी पढ़ें-

माधवकांत मिश्र के निधन का समाचार पढ़कर बेहद दुख हुआ. मेरे पत्रकारिता करियर के पहले संपादक थे माधव कांत जी. हंसमुख स्वभाव मिलनसार व्यक्तित्व और खासकर युवा पत्रकारों को सिखाने और उन्हें आगे बढ़ाने का उनका जज्बा हमेशा मेरे जेहन में रहेगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

One comment on “वरिष्ठ पत्रकार से वरिष्ठ साधु बने माधवकांत मिश्रा का निधन”

  • Shashikant Oak says:

    पुज्य महामंडलेश्वर मार्तंड पुरी स्वामीजी (माधवकांत मिश्र) के देहावसान की वार्ता से बहुत दुख हुआ. वायुसेना में काम करने वाले मेरे जैसे व्यक्ति को उन्होंने हिंदी में क्रॉस वर्ड बनाकर प्रस्तूत करने के लिए आमंत्रित किया था. सन १९९१ में उन्हें दैनिक राष्ट्रीय सहारा के ऑफिस में पहली बार मिला. हंसमुख माधवकांत जी ने प्रोत्साहित करने पर १२५ शब्दकूट हर दिन प्रकाशित होते रहे. साथ साथ, मैं हूं नदी – शीर्षक से भारत की अनेक ऐसी अनाम नदियों के उद्गम से लेकर समुद्र में समाहित होने तक कि यात्रा में बसे गांव, शहर, लोग, रहन-सहन, व्यवसाय आदि पर लेख भी प्रकाशित होते रहे. अहिंदीभाषी होते हुए उनके प्रोत्साहन से उन दिनों दरीबा कलां की गलियों में बसी फिल्मी कलियाँ, दुनिया जैसे मासिक पत्रिकाओं में टीवी, फिल्म जगत पर आधारित कुछ पझल्स आते रहते थे. पुस्तक महल के गुप्ता जी ने इस पर २ पुस्तकें छाप दी.
    इस सब का श्रेय स्व. माधवकांत मिश्र जी को जाता है.
    विंग कमांडर शशिकांत ओक, विमाननगर, पुणे 9881901049.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code