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कोरबा : मजीठिया मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फरमान बना मखौल

कोरबा जिले (म.प्र.) के सहायक श्रम आयुक्त ने सूचना के अधिकारी के तहत मांगी गई जानकारी में साफ़ तौर पर ये बात कही है कि 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें अब तक कोई निर्देश राज्य शासन अथवा कहीं और से भी प्राप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, जिन समाचार पत्रों का प्रकाशन जिले में होता है, केवल उन्हीं के विरुद्ध जिला कार्यालय से कार्यवाही संभव है। मतलब कि शाम के पेपर, जो जिले में ही छपते हैं।

कोरबा जिले (म.प्र.) के सहायक श्रम आयुक्त ने सूचना के अधिकारी के तहत मांगी गई जानकारी में साफ़ तौर पर ये बात कही है कि 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें अब तक कोई निर्देश राज्य शासन अथवा कहीं और से भी प्राप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, जिन समाचार पत्रों का प्रकाशन जिले में होता है, केवल उन्हीं के विरुद्ध जिला कार्यालय से कार्यवाही संभव है। मतलब कि शाम के पेपर, जो जिले में ही छपते हैं।

राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों पर जिला कार्यालय से कार्यवाही संभव नहीं है। इसके लिए जहाँ से समाचार पत्रों की छपाई होती है, वहां से जानकारी लेनी होगी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में भी कल शाम के अख़बारों की जानकारी दी गयी। राष्ट्रीय स्तर के अख़बारों, जैसे भास्कर, पत्रिका, नवभारत आदि के जिला कार्यालयों के विषय में न तो जानकारी ली गयी, न ही दी गयी है।

मजीठिया पर हालात की चुगली करते कागजात

कोरबा जिले के सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय से प्राप्त कुल पांच शाम के अखबारों में से एक अख़बार की जानकारी दी गई है। छानबीन में कई एक प्रश्नों के झूठे जवाब मिले हैं। क्या ये सही है? मजीठिया वेज बोर्ड में समाचार पत्र की श्रेणी क्या है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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