मध्यप्रदेश में टीवी पत्रकारिता को सूंघ गया सांप

लगातार टेलीविजन न्यूज़ देखने पर लगा कि मध्यप्रदेश में न्यूज़ 24 के गोविन्द गुर्जर और न्यूज़ नेशन के नीरज श्रीवास्तव एक बेहतरीन पत्रकार के रूप में उभर के सामने आये हैं। पिछले एक बरस से मध्यप्रदेश की टेलीविजन पत्रकारिता को सांप सूंघा हुआ लगता है। खबर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति इसे धीरे धीरे छत्तीसगढ़ की राह पर ले जा रही है। हालात ऐसे ही रहे तो हो सकता है एमपी में 2018 के चुनाव के बाद दिल्ली में बैठे एडिटर मध्यप्रदेश को भी छतीसगढ़ की तर्ज पर ख़बरों के नजरिये से ड्राय स्टेट मान लें।

एमपी पुलिस का शर्मनाक चेहरा : तीन पत्रकारों से इस कदर बदतमीज़ी और बेइज़्ज़ती…

सिवनी (मध्य प्रदेश) : नया साल इस तरह से पुलिस के नये चेहरे को लेकर आयेगा इसका भान सपने में भी नहीं था। पुलिस के द्वारा 31 दिसंबर और 01 जनवरी की दर्म्यानी रात में दो जिम्मेदार संपादकों के साथ जिस तरह का बर्ताव किया गया है उसको पाठकों के समक्ष रखा जा रहा है अब पाठक ही फैसला करें और अपना निर्णय दें।

मध्य प्रदेश विज्ञापन घोटाले के बहाने उघड़ती असलियत को कोई दिन के उजाले में भी नहीं देखना चाहता

एक घोटाला मध्यप्रदेश का जिसे विज्ञापन घोटाला कहा जा रहा है। बहरहाल इस घोटाले के बहाने कई और भी परतें उधड़ रही हैं और कुछ असलियतें सामने आ रही हैं जिनकी तरफ कोई दिन के उजाले में भी देखने को तैयार नहीं है।  इस मामले की लिखी गई खबर में वेबसाईटस की संख्या लिखी 235 जबकि सूची में वेबसाईटस हैं 259 । गिनती फिर से करिये। दे कॉपी पेस्ट दे कॉपी पेस्ट किये जा रहे हैं। सूची के अनुसार जितना पूरी वेबसाई्टस को विज्ञापन को नहीं दिये गये उससे कहीं ज्यादा तो सिर्फ एक चैनल को पकड़ा दिये गये। बाजी मार गईं तमाम तरह की सोसयटीज और क्षेत्रीय प्रचार कंपनियां इनमें कई करोड़पतिये हैं।

म.प्र. जनसंपर्क में पत्रकारों को बांटे गए लैपटाप में हुए घोटाले की जांच के आदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा तथाकथित वरिष्ठ एवं अधिमान्य पत्रकारों को बांटे गये लैपटाप में हुए घोटाले की जाँच के आदेश नवागत जनसंपर्क आयुक्त श्री अनुपम राजन ने दे दिए हैं। श्री राजन ने यह आदेश आज उनसे मिलने गये इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) नई दिल्ली से संबद्ध भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल की एमपी यूनिट के एक प्रतिनिधि मंडल की मांग पर जारी किए हैं। यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने जनसंपर्क आयुक्त श्री राजन को एक ज्ञापन प्रस्तुत कर पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए प्रदेश के पत्रकारों को वितरित किए गये लेपटाप में हुई गड़बड़ियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया था। इस पर उन्होंने इस मामले की तत्काल जाँच कराने के आदेश जारी किये।

मध्य प्रदेश में कामायनी और जनता एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त, 28 रेल यात्रियों की मौत

भोपाल : हरदा के करीब चार अगस्त 2015 की रात एक ही जगह दो ट्रेन हादसे का शिकार हो गईं। इसमें 28 लोगों की मौत हो चुकी है। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इस हादसे को प्राकृतिक आपदा बताया है। रेलवे प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि हादसे से आठ मिनट पहले इसी रूट पर अन्य ट्रेनें निकलीं, लेकिन उनके ड्राइवरों को किसी खतरे का अंदेशा नहीं हुआ। सक्सेना के मुताबिक, किसी बांध के टूटने से फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़ आना) की स्थिति पैदा हुई होगी। बाढ़ के पानी की वजह से ट्रैक के नीचे की मिट्टी निकल गई होगी और पटरियां धंस गई होंगी। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने भी अचानक से बाढ़ आने का अंदेशा जताया है। हालांकि, हादसे की असल वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है। मामले की सीआरएस (कमिश्नर रेलवे सेफ्टी) जांच के आदेश दिए गए हैं।

मजीठिया को लेकर वन-टू-वन चर्चा करेगा मध्य प्रदेश श्रम विभाग

भोपाल : सुप्रीम कोर्ट के 28 अप्रैल के आदेश के बाद मध्यप्रदेश श्रम विभाग मजीठिया को लेकर रिपोर्ट तैयार करने में लगा हुआ है। 

म.प्र. : एक बार फिर सुर्खियों में सिविल सेवा परीक्षा विवाद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्बारा आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं बिना किसी विवाद के संचालित हो जाएं, यह कई वर्षों से सम्भव नहीं हो पा रहा है। ताजा मामला प्रदेश की सिविल सेवा परीक्षा-2०14 की प्रारम्भिक परीक्षा का है। यह परीक्षा 9 मई 2०15 को सम्पन्न हुई जिसके परिणाम जुलाई माह में जारी हुए हैं। आयोग ने अपनी बेवसाइट पर विभिन्न कटेगरी के लिए ‘कटऑफ’ मार्क्स जारी किए हैं, जिसको लेकर प्रतियोगी परीक्षार्थियों में असंतोष है और उनका दावा है कि उन्होंने आयोग द्बारा घोषित ‘कटऑफ ’ मार्क्स से अधिक अंक हासिल किए हैं, लेकिन आयोग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। 

मध्य प्रदेश में 15 अगस्त से पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना

भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए दुर्घटना बीमा योजना लागू करने की घोषणा की है। प्रदेश के जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया है कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त से लागू की जाएगी।  स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष से राज्यस्तर के साथ-साथ आंचलिक फोटो पत्रकारिता को भी पुरस्कृत किया जायेगा।

कभी उमा तो कभी शिवराज-सुषमा के पैर पड़े सीहोर का महाचाटुकार पत्रकार

सीहोर (म.प्र.) : हाल ही में राज्य सरकार से सम्मानित एक पत्रकार ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पैर पड़ कर बोले कि दीदी आपके आशीर्वाद से मुझे मध्य प्रदेश सरकार ने सराहा है। ये पत्रकार सुषमा स्वराज या शिवराज सिंह चौहान के भी इस क्षेत्र में आने पर इसी तरह की शर्मिंदा करने वाली हरकतें करता रहता है। वे जब तक क्षेत्र में रहेंगे, उनके आगे-पीछे घूमता रहेगा। 

थाने में चैन की बंसी बजा रहे पत्रकार संदीप के हत्यारोपी, परिजनों ने दी खुदकुशी की चेतावनी

बालाघाट (म.प्र.) : पत्रकारों का जैसा हाल उत्तर प्रदेश में, वैसा ही कमोबेश मध्य प्रदेश में भी। पिछले दिनों निर्ममता से मौत के घाट उतारे गए पत्रकार संदीप कोठारी के हत्यारोपियों को पुलिस कटंगी थाने में वीआईपी की तरह सेवाएं दे रही है। लॉकप के बाहर आराम से कूलर की हवा में पलंग पर आरोपी सोते देखे गए। संदीप के परिजनों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पुलिस से उचित कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है। पुलिस का यही रवैया रहा तो वो सामूहिक आत्महत्या कर लेंगे। 

पत्रकार संदीप कोठाऱी हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

बालाघाट जिले के बैहर में खरीदी गई जमीन के सौदे में की गई दलाली और बाद में जमीन में भागीदारी बनाये जाने की चाहत के कारण ही संदीप कोठारी एवं कथित आरोपियों के बीच हुई अनबन के चलते उसकी हत्या कर दी गई। इस घटनाक्रम का मास्टर माइंड राकेश नर्सवानी अब पुलिस की गिरफ्त में है। उसे पुलिस द्वारा 8-9 जुलाई की मध्य रात्रि बोनकटा के समीप परसवाडा घाट से घेराबंदी कर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वह परिवारजनों से मिलने कटंगी पहुंचने की फिराक में था। 

अंदेशा : अक्षय के हाथ लगे थे व्यापम के कुछ अहम सुराग !

क्या अक्षय के हाथ व्यापम घोटाले के कुछ बेहद अहम दस्तावेज़ लगे थे ? क्या अक्षय का मध्य प्रदेश में पीछा किया जा रहा था ? एम्स अस्पताल के पूर्व सतर्कता प्रमुख संजीव चतुर्वेदी के मुताबिक अक्षय से बात करने वाले वो आखिरी लोगों में से एक थे. संजीव का कहना है की उनकी शनिवार की सुबह 9.30 के आस पास फ़ोन पर अक्षय से एक खबर को लेकर बातचीत हुई. 

अक्षय सिंह कांड : शिवराज सिंह, आप निष्कलंक हैं तो FBI टेस्ट आप के लिए आखिरी मौका

अक्षय मेरा कितना करीबी था, ये मुझे बताने कि ज़रुरत नही. मुझे कुछ लिखने की भी ज़रुरत नही है. कुछ सवाल मेरा अब हर समय पीछा कर रहे हैं ? इनका जवाब नहीं मिला तो खुद अपनी नज़र से गिर जाऊँगा ? अक्षय व्यापम घोटाले की खबर को स्पाई कैम से शूट करना चाहता था. मैंने उसे मना किया और कहा कि सारी स्टोरी ओपन कैमरे से शूट करो. साथ में कैमरा मैन लेकर जाओ. ओपन कैमरे पर अब तक मरे या मारे गये गवाहों के परिवार वालों की बाइट रिकॉर्ड करो. अदालतों से दस्तावेज़ निकलवाओ और उन्हें कैमरे पर शूट करो. घोटाले का सच बाहर आ जायेगा.

‘भारतीय जुमला पार्टी’ का ‘शवराज’ हाय हाय : शीतल पी सिंह

मध्य प्रदेश में भारतीय जुमला पार्टी ने हर क़िस्म की सार्वजनिक राजनैतिक नैतिकता की धज्जियाँ उड़ा कर सत्ता क़ायम कर रक्खी है ।

नई दुनिया के मालिक रहे अभय छजलानी खेल संगठनों के नाम पर कमा रहे किराया

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में विभिन्न समाचार पत्रों को अनेक तरह से उपकृत किया था। इसी का एक उदाहरण है इंदौर के अपने समय के प्रतिष्ठित समाचार पत्र नईदुनिया के प्रधान संपादक रहे अभय छजलानी को बेशकीमती और पॉश इलाके रेसकोर्स रोड पर खेल संगठन बनाने के नाम पर उपकृत किया जाना। जानकारी के खेल गतिविधियों के नाम पर इंदौर के खेल संगठन सरकार से रियायती जमीनें लेकर उनका व्यावसायिक उपयोग करके अपनी जेब भर रहे हैं। 

घमंड में चूर बीजेपी महासचिव का शर्मनाक बयान, ‘पत्रकार-वत्रकार छोड़ो यार, अक्षय हमसे बड़ा पत्रकार था क्या!’

मध्यप्रदेश में पत्रकार अक्षय सिंह की रहस्यमय हालात में मौत संबंधी एक सवाल के जवाब में बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बेहूदगी भरा जवाब देते हुए कहा- ‘पत्रकार-वत्रकार छोड़ो यार। वो कोई हमसे भी बड़ा पत्रकार था क्या?’ इस हरकत भरी टिप्पणी पर इसलिए मीडिया में रोष है कि जिस समय विजयवर्गीय जब पत्रकार की मौत का मजाक बना रहे थे, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उनके साथ वहीं पर उपस्थित थे। बयान देने के बाद विजयवर्गीय पत्रकारों की हंसी उड़ाते हुए भी दिखे। जोर से ठहाका भी लगाया। 

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर को पत्रकारों की चिंता नहीं

भोपाल : वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पत्रकारों पर हो रहे हमले से चिंतित है और उनके मन में है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिये भी कानून बने। वहीं प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने जबलपुर में कहा कि पत्रकार आम नागरिक है। गौर साहब भूल गये कि देश में पत्रकारों को चौथा स्तंभ कहा जाता है।

म.प्र. सरकार पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन एक्ट लाएगी : शिवराज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा में कहा है कि पत्रकारों की अधिमान्यता अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष की जायेगी । प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन एक्ट लाया जाएगा। 

ऐसे तो धुलने से रहा व्यापमं का पाप

मन कसैला सा हो गया है व्यापमं मामले में सरकार का चरित्र देखकर। किस प्रदेश के निवासी हैं हम। लाखों गरीब, योग्य मासूम बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया गया नोटों की खातिर। जो आरोपी बनाये गये हैं उनमें से भी कितने गुनहगार हैं कितने बेगुनाह कोई हिसाब नहीं। दीनहीन सा मुंह लिये सरकार के लोग कहते हैं किसी जांच की जरूरत नहीं। और सूबे के मुखिया ने मौन धारण किया हुआ है। उनकी नजर में सब विपक्षियों की चाल है। सारे सबूत सारे दस्तावेज….. जय हो मामाजी की हद हो गई ये तो। अगर व्यापमं मामले के आरोपियों और गवाहों की मौत की ही बात करें तो इसके भी सही—सही आंकडे नहीं हैं।

कोरबा : मजीठिया मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फरमान बना मखौल

कोरबा जिले (म.प्र.) के सहायक श्रम आयुक्त ने सूचना के अधिकारी के तहत मांगी गई जानकारी में साफ़ तौर पर ये बात कही है कि 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें अब तक कोई निर्देश राज्य शासन अथवा कहीं और से भी प्राप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, जिन समाचार पत्रों का प्रकाशन जिले में होता है, केवल उन्हीं के विरुद्ध जिला कार्यालय से कार्यवाही संभव है। मतलब कि शाम के पेपर, जो जिले में ही छपते हैं।

जिसने ‘जनसंदेश’ की धज्जियां उड़ाईं, आज वही संपादक

सतना (मप्र) : जनसंदेश जब बाजार में आया तो उन दिनों सतना में ये कहा जाता था कि ये दिल्ली का अखबार हैं. उसके पीछे का कारण बताया जाता था कि पेपर के संपादक और पूरी टीम बाहर की है. 16 नंबर पेज को लेकर बवाल होता था. जिसे लोकल करने की मांग होती थी. जैसा वहां के पेपरों का 16 नंबर पेज लोकल था. जनसंदेश में काम करने वाले रिपोर्टर दिमाग कहीं और से लेते थे. पेपर को डुबाने की पूरी तैयारी थी . या मालिकों तक यह संदेश जाये कि बाहर की टीम बेकार है, काम नहीं कर पा रही है. 

ज़ी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से एक साथ 15 लोगों के जबरन इस्तीफे

ज़ी मध्यप्रदेश – छत्तीसगढ़ के चैनल हेड दिलीप तिवारी ने चैनल के कुछ रिपोर्टर सहित इनपुट और आउटपुट के कुल 15 लोगों से जबरिया इस्तीफा ले लिया है।

विवेचना पत्र में पुलिस ने पत्रकार संदीप कोठारी को भी सजायाफ्ता अपराधी करार दिया

पत्रकार संदीप कोठारी हत्या कांड के संबंध में मध्य प्रदेश के कटंगी थाने की पुलिस को दी प्राथमिक सूचना में ललितकुमार राहगडाले ने बताया है कि वह 19 जून को रात साढ़े 12 बजे बाइक से बालाघाट से संदीप के साथ आ रहे थे। आगासी रेलवे क्रासिंग के कुछ दूर एक सफेद रंग की कार नंबर एमएच40केआर 2255 ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। कार को ब्रजेश डहरवाल चला रहा था। कार में दो लोग और बैठे हुए थे। बाइक गिराने के बाद वे तीनो संदीप कोठारी को अपहृत कर बालाघाट की ओर ले गए। 

संदीप हत्याकांड में दबोचे गए दो आरोपी

पत्रकार संदीप हत्याकांड के दो आरोपी दबोचे गए, मध्यप्रदेश पुलिस पूछताछ-छानबीन में जुटी

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के कटंगी निवासी युवा पत्रकार संदीप कोठारी की हत्या किए जाने की आशंका के बीच पुलिस संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अपनी जांच में जुट गयी है।

हत्यारों द्वारा नृशंसता पूर्वक मौत के घाट उतारे गए युवा पत्रकार संदीप कोठारी के शव के घटनास्थल से लिए गए चित्र……..

ये है अंदर की राजनीति, शिवराज ने बंधवाया कैलाश का बोरिया-बिस्तर

अंतत: कैलाश विजयवर्गीय नई दिल्ली पहुंच ही गए और अब वे प्रदेश की बजाय राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होंगे। कल शाम भाजपा आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंप दिया। पर्दे के पीछे का राजनीतिक सच यह भी है कि प्रदेश की राजनीति से कैलाश विजयवर्गीय को बाहर रखने के इच्छुक मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी थे। ताई और भाई का झगड़ा भी पुराना चलता रहा है, लिहाजा लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ताकतवर हो चुकी श्रीमती सुमित्रा महाजन यानि ताई ने भी इस मामले में पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई। दिल्ली दरबार ने भी इस निर्णय से पहले मुख्यमंत्री से सलाह मशवरा करते हुए उन्हें पूरी तवज्जो भी दी। दिल्ली स्थित राजनीतिक सूत्रों का यह भी कहना है कि इंदौर और भोपाल से कैलाश विजयवर्गीय का बोरिया-बिस्तर बंधवाने में शिवराज की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है।

मध्य प्रदेश में गुपचुप तैयार हो गई पत्रकारों की यूनियन, सभी बड़े अखबारों से सदस्यता

इंदौर : मजीठिया की लड़ाई में अब तक सबसे ठन्डे माने जा रहे मध्यप्रदेश में इसे लेकर गुपचुप तरीके से बड़ी लड़ाई की तैयारी चल रही है। यहाँ के कुछ पत्रकारों ने इस लड़ाई में पंजीकृत ट्रेड यूनियन का महत्व समझते हुए चुपचाप इसका गठन कर लिया है। 

व्यापम घोटाला : निजी मेडिकल कॉलेजों ने काउंसिलिंग के बाद ज्वॉइनिंग को छिपाया

भोपाल : प्रदेश शासन द्वारा निजी चिकित्सा महाविद्यालय में भरी जाने वाली सीटों की प्रक्रिया को लेकर जांच कर रही एएफआरसी ने अपने 21 मई 2015 के खुलासे में भारी अनियमितता का उल्लेख करते हुए बताया है कि धोखाधड़ी से महाविद्यालयों में निजी उम्मीदवारों को प्रवेश दिलवाया गया। 

मप्र सरकार ने नियुक्त किया विशेष श्रम अधिकारी, अब मीडिया कर्मियों की परीक्षा

मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को लागू कराने के लिए चल रहे प्रयासों का दूसरा दौर प्रारंभ हो गया है। मप्र सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए निर्धारित समय में श्रम अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। अब गेंद पत्रकार और गैर पत्रकार साथियों के पाले में आ गई है। सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में भी किसी केजरीवाल की तलाश

एक तरफ सांपनाथ तो दूसरी तरफ नागनाथ… सालों से जनता यह कहते हुए हर चुनाव में अल्टा-पल्टी के साथ कांग्रेस और भाजपा को जीताती या हराती आई है। दरअसल अभी तक देश की राजनीति में कोई सशक्त विकल्प जनता को मिला ही नहीं। कुछ राज्यों में सपा, बसपा या तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने सरकारें तो बनाईं, मगर ये दल भी कांग्रेस और भाजपा की फोटो कॉपी कुछ ही अर्से में बन गए। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने देश में एक नई उम्मीद इसलिए जगाई है क्योंकि इसके नेता पेशेवर और घाघ राजनीतिज्ञ नहीं हैं। नई दिल्ली के चुनाव में जिस तरह केजरीवाल ने आम आदमी के सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को फोकस में रखकर चुनाव लड़ा और बखूबी जीता, उसने तथाकथित विकास पर नए सिरे से बहस की गुंजाइश भी शुरू की है। मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में जनता को किसी केजरीवाल की बड़ी बेसब्री से तलाश है, क्योंकि हरल्ली कांग्रेस से कोई उम्मीद इसलिए नहीं है क्योंकि वह जनता के मुद्दे उठाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है, जिसके चलते लगातार चुनाव जीतने वाली भाजपा के मुगालते आसमान पर पहुंच गए हैं। यह बात अलग है कि नई दिल्ली में सरकार चला रहे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कांग्रेस और उससे अधिक भाजपा द्वारा नित नए षड्यंत्र भी रचे जा रहे हैं।