‘राष्ट्रदूत’ जैसे अखबार करोड़ों नहीं, अरबों रुपये सरकार से डकार रहे हैं, सीबीआई जांच शुरू

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राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी ने बीते साल पच्चीस नवंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने फर्जी प्रसार के आधार पर पैसे हड़पने वाले अखबारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी.

ताजी सूचना ये है कि सीबीआई ने झालानी के इस पच्चीस नवंबर वाले पत्र के आधार पर केंद्र से अनुमति प्राप्त कर कतिपय समाचार पत्रों और पीआईबी, जयपुर की एडीजी श्रीमती प्रज्ञा पालीवाल के खिलाफ पीई दर्ज कर सम्बन्धित अखबारों को नोटिस/जारी कर विस्तृत पड़ताल प्रारम्भ कर दी है.

देखें झालानी का पच्चीस नवंबर 2021 का पत्र-

25.10.21

व्यक्तिगत/आवश्यक

प्रतिष्ठा में,
श्री अशोक गहलोत,
मुख्यमंत्री,
राजस्थान, जयपुर ।

सम्मानीय गहलोत साहब,
सादर वन्दे

आपने जिस तरह दैनिक राष्ट्रदूत सहित फर्जी अखबारों का कच्चा चिट्ठा खोला है, उसके लिए निश्चय ही आप धन्यवाद के पात्र है । आपने मीडिया के सामने स्पस्ट तौर पर आरोप लगाया कि फर्जी सर्कुलेशन दिखाकर राष्ट्रदूत जैसे अखबार करोड़ो नहीं, अरबों रुपये सरकार से डकार रहे है ।

आपकी बात सौ फीसदी सच है । लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे फर्जी अखबारों को संरक्षण कौन दे रहा है ? क्या मुख्यमंत्री के नाते इस फर्जीवाड़े के लिए आप जिम्मेदार नही है ? बकौल आपके एक ऐसा अखबार जिसकी कोई प्रसार संख्या नही और वह प्रतिमाह करोड़ो के विज्ञापन सरकार से ले रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? आप या आपके अधीन सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग ?

क्या आप विवश और असहाय मुख्यमंत्री है जो हेराफेरी कर सरकार को चूना लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई नही कर पा रहे है । आप यह क्यो भूल जाते है कि सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग भी आपके अधीन है जो फर्जीवाड़े की सबसे बड़ी फैक्ट्री है । इसके अधीन रोज फर्जी अखबारों का उत्पादन होता है और करोड़ो रूपये की बंदरबांट ।

दरअसल फर्जी और अपराधी किस्म के तथाकथित पत्रकारों को संरक्षण देने वाले आप सबसे बड़े गुनाहगार है । पिछले कार्यकाल में आपने एक ऐसे अखबार को राज्य स्तरीय समाचार की मान्यता दी जिसका मालिक ब्लैकमेलिंग के लिए विख्यात रहा है और अनेक केस आज भी पुलिस व अदालत में लंबित है । दस कॉपी बिकने वाले अंग्रेजी समाचार पत्र के संवाददाता को हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का कुलपति आपने ही बनाया था ।

आपकी जानकारी के लिए बतादूँ कि फर्जीवाड़ा केवल राष्ट्रदूत तक सीमित नही है । आधे से ज्यादा समाचार इस अनैतिक कार्य मे लिप्त है । आपका चहेता समाचार पत्र दैनिक नवज्योति जिसकी प्रसार संख्या राष्ट्रदूत से भी चौथाई भी नही है, पूरे प्रदेश में रियायती दर पर जमीन हड़पने का कारोबार कर रहा है । वैशालीनगर में आवंटित जमीन पर अखबार का दफ्तर नही, पूरा मॉल किराए पर चल रहा है । मुख्यमंत्रीजी कभी नवज्योति के भी फर्जीवाड़े की भी जांच कराइये । पे कमीशन के नाम पर अरबो रुपये का घोटाला कर कर्मचारियों का निर्ममता से खून चूसा जा रहा है ।

एक और समाचार पत्र है जिसकी केवल फाइल कॉपी ही प्रकाशित होती है । एक दफ्तर के लिए वक्फ जमीन का आवंटन । एक अन्य दफ्तर भास्कर के पास और संपादक के कार्यालय के नाम पर मालवीय इंडस्ट्रियल एरिया में तथा निवास भी सरकारी । यानी पूरी तरह लूट । वह भी आपके संरक्षण में । यह अखबार भी आपके संरक्षण में सरकारी नियमों को अंगूठा दिखाकर अखबार की बिल्डिंग को किराए पर उठा रखा है । क्या ऐसे अवैध कार्यो की रोकथाम के लिए किसी विभाग की कोई जिम्मेदारी नही है ?

सरकार की करस्तानीपूर्ण नीति की वजह से ईमानदारी के साथ अखबार निकालने वाले विज्ञापन के लिए धक्के खा रहे है । जबकि नवज्योति टाइप माफिया चंद कापियां छापकर सरकारी संरक्षण में लूट का नंगा नाच कर रहे है । नतीजतन विज्ञापन की 90 फीसदी राशि फर्जी प्रसार वाले अखबारों की तिजोरी में जा रही है । राजनीति से भी बड़ा लूट का अड्डा बन गया है फर्जी अखबार निकालना । नीरज के पवन ने फर्जी अखबारों की जांच के लिए अभियान चलाया था । उस अभियान को आपके निर्देश पर ही रोका गया ।

आपने केवल रवीश कुमार को श्रेष्ठ और ईमानदार पत्रकार बताकर देश के सभी पत्रकारो का सार्वजनिक रूप से अपमान किया है । रवीश की ईमानदारी पर कोई चर्चा नही करना चाहता, लेकिन सबको बेईमान या गोदी मीडिया बताना अनुचित है । हो सकता है कि राष्ट्रदूत की रिपोर्टिंग आपके अनुकूल नही हो या तथ्यों से परे हो । इसका यह मतलब तो नही कि आप उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करें । आप आधारहीन और अपमानजनक खबर के लिए अदालत का सहारा लेते हुए 124 ए (राष्ट्रद्रोह) का मुकदमा भी दर्ज करवा सकते है । आपने राष्ट्रदूत की बेहूदी रिपोर्टिंग का उल्लेख करते हुए प्रेस कौंसिल से कार्रवाई करने की मांग की थी । यदि ऐसा है तो आपको प्रेस कौंसिल में वाद दायर करना चाहिए ।

दरअसल आप इन दिनों कुछ चिलमचियों से घिरे हुए हो जिन्होंने आपकी मजबूती से घेराबंदी कर रखी है । ये चिलम भरने वाले वास्तविक स्थिति आपके सामने नही आने देते है । राष्ट्रपति से मुलाकात हो सकती है, लेकिन आपके इर्द गिर्द के लोग किसी को आपसे मिलने नही देते । परिणामतः आप केवल खुशफहमी में जी रहे हो ।

आप मुख्यमंत्री है । पूरे प्रदेश की सत्ता आपके अधीन है । करीब तीन दर्जन विभागो का आप संचालन कर रहे है । फिर स्यापा क्यों ? फर्जीवाड़ा करने वाले अखबारों के खिलाफ कार्रवाई से गुरेज क्यो ? सार्वजनिक तौर पर भड़ास निकालने से बदनामी राष्ट्रदूत की नही, स्वयं आपकी होगी ।

हो सकता है कि मेरी सच बात आपको हजम नही हो । लेकिन सच्चाई को ईमानदारी और बेबाकी से परोसना मेरी पुरानी आदत है । हो सकता है कि आपके कुछ सलाहकार मुझे सबक सिखाने की “नेक” सलाह दे । लेकिन ओखली में मुंह डालने वाला कभी मूसली से नही डरता है

वैसे मेरे पत्र को बिल्कुल भी अन्यथा नही ले । एक समर्पित पत्रकार होंने के नाते सच दिखाना मैं अपना कर्तव्य समझता हूँ ।

महेश झालानी
पत्रकार


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