मीडिया के सहारे देश में डेमोक्रेसी खत्म करने की साजिश : गहलोत

-सुमित सारस्वत

राजस्थान सीएम गहलोत ने मोदी-शाह और मीडिया पर साधा निशाना

राजस्थान में सत्ता की सियासत के बीच आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देश की मीडिया पर भी निशाना साधा। मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए गहलोत बोले, राष्ट्रीय मीडिया और इंग्लिश मीडिया का दायित्व है कि ईमानदारी से सच्चाई का साथ है।

मोदी-शाह का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली में डेमोक्रेसी खत्म करने वाले लोग बैठे हैं। होर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं। सरकारों को गिरा रहे हैं। जैसा कर्नाटक और मध्यप्रदेश में किया, वैसा राजस्थान में भी करना चाहते हैं।

जयपुर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सीएम गहलोत बोले कि देश का मीडिया अगर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाता है तो उसकी ड्यूटी बनती है कि डेमोक्रेसी खत्म हो रही है तो उसके खिलाफ आवाज उठाए। जेल जाना पड़े तो जेल जाए। मगर आज मीडिया उल्टा काम कर रहा है।

गहलोत ने नसीहत दी कि देश की मीडिया को कांग्रेस से और गांधी परिवार से व्यक्तिगत नाराजगी है तो दिल में रखिए। इस मुल्क में डेमोक्रेसी खत्म करने की साजिश हो रही है। धनबल के आधार पर एमएलए खरीदे जा रहे हैं। मीडिया की ड्यूटी है कि आवाज उठाए। ऐसे-ऐसे लोग मीडिया में बैठे हैं जिनके पास धन की कमी नहीं है, बल की कमी नहीं है। केंद्र सरकार से, बीजेपी से फायनेंस होते हैं, मिलीभगत करते हैं। मीडिया के अंदर नई पीढ़ी के लोग आए हैं।

मुझे गर्व है कि देश में अच्छे और युवा एंकर है। उनका दायित्व है कि ईमानदारी का साथ दें। उनकी जिंदगी लंबी है। उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि लंबी जिंदगी देश हित में बितानी है। देश को एक रखना है, अखंड रखना है। डेमोक्रेसी किसी भी कीमत पर खत्म नहीं हो। 70 साल तक कांग्रेस ने डेमोक्रेसी को बचाकर रखा है। पाकिस्तान की तरह नहीं होने दिया। अब जो लोग आए हैं वो डेमाेक्रेसी को खत्म कर रहे हैं। यंग पीढ़ी के जो लड़के-लड़कियां एंकर बने हुए हैं, या मीडिया के जो बड़े लोग हैं, तमाम लोग एकतरफा न्यूज चला रहे हैं। वो लोग हॉर्स ट्रेडिंग करने वालों को पसंद कर रहे हैं।

सीएम गहलोत मीडियाकर्मियों से बोले कि तुम लोग धूप में, बरसात में कैमरा लेकर खड़े रहते हो। खाना मिले न मिले, फिक्र नहीं करते। आज मोदी सरकार ने हालत ऐसी बना रखी है कि मीडिया वालों की नौकरियां जा रही है, तनख्वाह कम हो रही है। आप लोग मजबूरी में काम कर रहे हो। मैं आप लोगों की मदद कर रहा हूं कि किसी तरह आप लोगों की तनख्वाह बच जाए। फिर भी आप लोग हेडलाइन बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हो। आप लोगों को फर्क नहीं पड़ता कि न्यूज गलत हो तो होने दो, डेमोक्रेसी कमजोर हो तो होने दो। ऐसे देश बर्बाद नहीं होगा क्या?

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