जिन्ना पर फतवा : मीडिया वाले उल्लू बन गए और दर्शकों को भी बनाते रहे

बरेली से जिन्ना के खिलाफ कल एक फर्जी फतवा जारी कर दिया गया. खुद को दरगाहे आला हजरत का प्रवक्ता बताने वाले मौलाना शहाबुद्दीन ने कैमरे के सामने फतवा जारी होने का बयान दिया. उन्होंने कहा कि दरगाहे आला हजरत की तरफ से फतवा जारी किया गया है. इसके तहत जिन्ना की हिमायत करना हराम है. उनकी यह बात पूरी तरह झूठी साबित हुई.

पहली तो यह कि फतवा किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं समूह के लिए जारी होता है. दूसरी बात फतवा जारी करने की जिम्मेदारी मुफ्ती की होती है जबकि शहाबुद्दीन मौलाना हैं. शाम तक बावेला मचने के बाद शहर काजी असजद रजा खां के दामाद और जमात रजाए मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान ने बयान जारी कर कहा कि इस तरह का कोई फतवा जारी नहीं हुआ है.

दिलचस्प बात यह है कि खबर पर पांच सौ रुपये पाने की लालच में बरेली में तैनात तमाम चैनलों के स्ट्रिंगरों ने फर्जी खबर भेज दी. उन्होंने फतवे की कॉपी देखने तक की जहमत नहीं उठाई. न ही उन्होंने यह फतवा मांगने वालों की बाइट ही की.

नोयडा और दिल्ली में बैठे चैनल के जिम्मेदारों ने भी फतवे की हकीकत जानने की कोशिश नहीं की और खबर रगड़ी जाती रही. जिन्ना बिकाऊ हैं आज कल, इसलिए इस फर्जी खबर को खूब रगड़ा गया. एएनआई ने भी खबर की पुष्टि किए बिना बिकाऊ माल समझ कर खबर जारी कर दी.

दरगाह से जुड़ी संस्था जमात रजाए मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान ने कहा कि मौलाना शहाबुद्दीन का दरगाह से कोई वास्ता नहीं है और उन्हें काफी पहले जमात रजा से निकाला जा चुका है. उन्होंने कहा कि दरगाह से ऐसा कोई फतवा जारी नहीं हुआ है. मीडिया को ऐसी कोई खबर चलाने से पहले फतवे की कॉपी देखनी चाहिए थी. देखें वीडियो..



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