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क्या मोदी, अंबानी और अडानी के त्रिभुज में फंस गया है भारत?

राहुल शेन्दे-

पिछले 7 सालों में अंबानी और अडानी दुनिया के सबसे अमीर कॉरपोरेट्स तब बने हैं जब देश की अर्थव्यवस्था लगातार डूबती जा रही है। इन्होंने जो दौलत कमाई है वो दुनिया से नही कमाई बल्कि गरीबी की दलदल में धकेले गए भारतीयों से ऐंठी है।

रॉफेल मामले में फ्रेंच कंपनी डास्सो को धमकाया गया था कि यदि उन्हें यह डील करनी है तो उन्हें भारत मे अपना पार्टनर अंबानी को ही चुनना होगा, इसलिए उन्होंने देश के सबसे तजुर्बेकार और सरकारी कंपनी HAL को छोड़कर अनिल अंबानी की कंपनी चुनी जो पहले से ही लूटी पिटी तो थी ही साथ मे उन्हें हवाईजहाज़ का कोई तजुर्बा भी नही था।

हाल ही में भारतीय नौसेना की हज़ारों करोड़ की पनडुब्बियों का कॉन्ट्रैक्ट अनुभवहीन अडानी की कंपनी को दिया गया है, सनद रहे कि इस अडानी को जब से प्राइवेट एयरपोर्ट्स का ठेका दिया गया है, भारतीय उड्डयन कंपनियाँ चाहे वो किंगफ़िशर हों, जेट एयरवेज, एयर इंडिया या एयर एशिया… मनमानी एयरपोर्ट फ़ीस के चलते दिवालिया हो रहीं और उधर अडानी और अंबानी दुनिया के सबसे रईस कारोबारी बन गए हैं।

सब जानते हैं कि JIO को प्रमोट करने के लिए BSNL डुबाई गयी है, जैसे ही अंबानी ने फ्यूचर ग्रुप को खरीदा उन्होंने Aliexpress को बैन करवा दिया ताकि छोटे ई-कॉमर्स व्यापारी कंपीटिशन न दे सकें, जैसे ही अंबानी ने ब्रिटिश टॉयज ब्राण्ड Hamleys खरीदा… उन्होंने खिलौनों के दूसरे आयतों पर ज़बरदस्त टैक्स लगा दिये। ऐसे अनगिनत व्यापारिक क्षेत्र हैं जो लिटरली अंबानी और अडानी के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं, यह सिर्फ धन के जमाखोरी का मामला नही बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी खतरा बन गया है।

अब मोदी ने Essential Commodity Act में अनाज जैसे जीवनावश्यक वस्तुओं के बेहिसाब जमाखोरी का लाइसेंस बाँट दिया है कॉरपोरेट्स को, जिससे वे जब चाहे और जितना चाहें आपको लूट सकते हैं अनाज को अपने कोल्डस्टोरेज में बंद रख कर, इसलिए किसानों के लिए नही, बल्कि अपने और अपने बच्चों की भूख के लिए इस आंदोलन में शामिल होइये… 300 साल पहले ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने ही आयी थी, और देश गुलाम बन गया था… उन्हें तो वापस ब्रिटेन भेजा भी जा सका लेकिन इन अडानी, अंबानी और मोदी को तो बाहर भी नही निकाल सकते।

-Rahul Shende

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