मोदीमुक्त भारत के शंखनाद की शुरुआत!

Nirmal Kumar Sharma-

‘कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए
कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए ! ‘

-दुष्यंत कुमार

भारतीय जनमानस में एक कहावत बहुत ही मशहूर है कि कुदरत की मार बड़ी सधी हुई, निःशब्द और प्राणांतक होती है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार इस देश की महंगाई, भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से बुरी तरह से त्रस्त, बेहाल, परेशान, तिल-तिलकर मरती जनता-जनार्दन अब वर्तमान समय की सरकार के कर्णधारों की दुर्नीतियों व इनके जले पर नमक छिड़कनेवाले बयानों व कुकृत्यों से तंग आकर बददुवाएं दे रही है। याद होगा, उप्र के कथित योगी के एक अशिष्ट और निर्लज्ज मंत्री का यह शर्मनाक बयान कि पेट्रोल की कीमतें अभी और बढ़नी चाहिए या इस देश के ज्यादातर लोगों को पेट्रोल की जरूरत ही नहीं है!

इसके अलावे पिछले 7 सालों में मोदी-शाह द्वयी द्वारा किए गए एक-एक बेशर्म, वीभतत्सतम् और क्रूरतम् कुकृत्य इस देश के मजदूरों,किसानों, कर्मचारियों, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, आंगनवाड़ी गरीब महिलाओं, बेरोजगारों को पूरी तरह याद है ! वर्तमान समय के सत्ता के निरंकुश नीरो के औलादों द्वारा आज इस देश के अन्नदाताओं को अपनी न्यायोचित मांग के लिए भी जबरन खुली सड़क पर भीषण गर्मी, ठिठुरती ठंड और घनघोर बारिश में भी बैठने को बाध्य किया गया और अब तो एक साल होने को जा रहा है। अब तक 750 किसानों की शहादत के बावजूद अभी तक कथित योग्यतम् प्रधान जनसेवक जी के मुँह से उफ् का एक शब्द तक न निकला।

किसान आंदोलनकारियों के रास्तों में नुकीली कीलें ठोकना, सड़क काटना, उन्हें खालिस्तानी कहना, आतंकी कहना, दो मिनट में ठीक कर देना, किसान ही न मानना, एक गुँडे को गृहराज्यमंत्री बनाना, उसके कुपुत्र द्वारा सीधे दिन-दहाड़े कारों से कुचलकर, रौंदकर मौत के मुँह में धकेलना, तड़ीपार गृहमंत्री द्वारा उस दरिंदे को अपने मंच को साझा करना,आरएसएस संचालित गौशालाओं में हजारों गायों का भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर जाना, बड़े कसाईघरों को आर्थिक मदद करके दुनिया में सबसे बड़े गोमांस का निर्यातक देश बन जाना, दूसरी तरफ गरीब मुस्लिम गोपालकों को सड़क पर अपने पालित गुँडों से घसीट-घसीट कर मौत के घाट उतार देना, प्रशिक्षित भारतीय बेरोजगारी से बेहाल युवाओं से पकौड़े तलने की नसीहत देना, मजदूरों को नन्हें बच्चों सहित हजारों किलोमीटर पैर घसीटने को बाध्य करना, मजदूर वर्ग को ले जाती ट्रेनों का अपना रास्ता भूलना, इस देश के लोगों को भारत का नागरिक मानने से ही इंकार कर देना, दर्जनों पत्रकारों, लेखकों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं,दलित- आदिवासियों के हक के लिए आजीवन लड़नेवाले देवदूतों को फर्जी मुकदमें कर जेलों में सड़ाना, मौत के घाट उतारना आदि-आदि…

इस प्रकार के अनगिनत कड़वी यादें आमजन के जहन में खूब ठीक से अभी भी धंसी हुई है! इसीलिए जनता-जनार्दन ने अभी हुए उपचुनावों में अपने मतदान रूपी कोड़े की बड़े ही शालीन तरीके से पलटवार कर बेहूदगी और अमर्यादित बयान देनेवाले बीजेपी के उच्श्रृंखल, बेशर्म और अशिष्ट नेताओं और उनकी पार्टी को भी यह बड़ा और कठोर संदेश दे दिया है कि लोकतंत्र में सत्ता किसी की भी बपौती नहीं होती है। हकी़कत यह है कि बकौल मोदीजी सत्ता में आने से पूर्व ‘हम सत्ता में आएंगे तो इस देश के युवाओं को हर साल 2 करोड़ नौकरी देंगे’ की उनके पहले ही कार्यकाल में पकौड़ा टेक्नोलॉजी अपनाने की नसीहत भरी सलाह देने से 2 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी देने की हवा पूरी तरह निकल चुकी है!

बेरोजगारी से बेहाल, किसानों से भी ज्यादे खुदकुशी करते इस देश के बेरोजगार युवकों का जुमलेबाज और दुनिया के इस सबसे झूठे, निरंकुश, अशिष्ट, चरित्रहीन और फ्रॉड मोदी से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है। उप्र के कथित सबसे काबिल मुख्यमंत्री के पुलिस के हाथों बेरोजगारी के मारे विद्यार्थी, बेरोजगार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, संविदा पर रखे डॉक्टर्स आदि अपनी सिर फोड़वाए बैठे हैं! अभी तो जनता ने पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तराखंड में सूपड़ा साफ करके मोदीमुक्त भारत का श्रीगणेश ही किया है, शीघ्र ही पूरे देश से बीजेपीमुक्त भारत का महायज्ञ होने जा रहा है!

समय बहुत बलवान होता है। आज एडोल्फ हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी द्वयी को याद करके दुनिया भर के लोग घृणा से उनकी तरफ थूकते हैं। ठीक वही हाल निकट भविष्य में मोदी-शाह और कथित योगी का भी होने जा रहा है!

-निर्मल कुमार शर्मा
प्रतापविहार, गाजियाबाद
उप्र
संपर्क-9910629632


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