सोशल मीडिया छोड़ने की बात नौटंकी साबित हुई!

मोदी टेस्ट करते हैं. जुमला छोड़कर ये भांपते हैं कि आप कैसे रिएक्ट कर रहे हैं. कल से कई लोग ‘एक्सक्लूसिव’ तरीक़े से जानकारी दे रहे थे कि सोशल मीडिया को लेकर केंद्र सरकार ‘बड़ा फैसला’ लेने वाली है. कुछ पत्रकारों ने तो यहां तक लिख दिया कि इसके लिए मसौदा भी तैयार है. देशव्यापी बैन लग सकता है.

नहीं छोड़ेंगे. सब नौटंकी थी. अब कह रहे हैं कि रविवार (8 मार्च) को अपना सोशल मीडिया एकाउंट्स वो महिलाओं को समर्पित करने वाले हैं. उस दिन वो ‘प्रेरित करने वालीं महिलाओं’ के क़िस्से सुनाएंगे.

आप लोग बेकार में कल से इस पर लगे हुए थे. इनके बूते में नहीं है सोशल मीडिया छोड़ना. ज़हर का मैदान है. फ़सल कैसे तैयार होगी इनके बग़ैर?

मोदी पॉपुलिस्ट तरीक़ा आजमाते हैं. सोशल मीडिया एक पॉपुलर मीडियम है जहां पॉपुलिस्ट अंदाज़ बिकता है. एक हैशटैग को बेचने के लिए कल उनने एक मसखरा किया. पूरा देश उसमें उलझ गया. अब कह रहे हैं कि हैशटैग चलाओ.

ओस से हाथ धोने वाले आदमी हैं ये. एंटायर पॉलिटिकल साइंस में इमर्जेंसी के दौरान अंडरग्राउंड रहते हुए ग्रैजुएशन कर लिया था. सोशल मीडिया एक मगरमच्छ का बच्चा था, जिसे पकड़कर कल रात बाल नरेन्द्र घर ले आए थे. लोग रेसक्यू ऑपरेशन में जुटे हुए थे.

युवा पत्रकार दिलीप खान की एफबी वॉल से.



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