मजीठिया क्रांतिकारियों की नेशनल यूनियन ‘एनईयू इंडिया’ पंजीकृत

देश के सभी अखबार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आखिरकार एक नेशनल यूनियन का सपना साकार हो चुका है। मजीठिया क्रांतिकारियों की पिछले करीब पांच सालों की लंबी लड़ाई के दौरान जो समस्‍याएं सामने आई हैं, उन्‍हें देखते हुए खालिस अखबार कर्मचारियों की एक देशव्‍यापी यूनियन की जरूरत महसूस हो रही थी। इसी देखते हुए यूनियन की प्‍लानिंग की गई और लगातार एक साल की मेहनत और कवायद के बाद आखिर 17 जून को ‘न्‍यूजपेपर इम्‍प्‍लाइज यूनियन आफ इंडिया’ (NEUIndia) को ट्रेड यूनियन एक्‍ट के तहत पंजीकरण पत्र प्राप्‍त हो गया।

इसके गठन में खासकर महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्‍ली, उत्तराखंड, मध्‍यप्रदेश के मजीठिया क्रांतिकारियों का विशेष सहयोग रहा है। इस यूनियन के अध्‍यक्ष पद की जिम्‍मेवारी हिमाचल प्रदेश से मजीठिया वेजबोर्ड का बिगुल बजाने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार रविंद्र अग्रवाल को सौंपी गई है। वहीं इस आंदोलन के जाने माने ध्‍वजवाहक मुंबई के शशिकांत सिंह ने उपाध्‍यक्ष पद की जिम्‍मेवारी संभाली है। महासचिव पद का जिम्‍मा मुंबई के ही तेजतर्रार मजीठिया क्रांतिकारी धर्मेंद्र प्रताप ने संभाला है और सह-सचिव के तौर पर वेजबोर्ड की पहली जंग जीतने वाले महेश शाकुरे अपनी भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा आरके तिवारी कोषाध्‍यक्ष और पंकज कुमार, दिनेश कुमार व तारा चंद्र कार्यकारिणी सदस्‍य हैं।

रविंद्र अग्रवाल

बताते चलें कि काफी कठिनाइयों के बाद एक ऐसी यूनियन की परिकल्‍पना साकार की गई है, जो केवल पत्रकारों की यूनियन ना होकर पूरे अखबार कर्मचारियों की यूनियन है। इसका लोगो भी कुछ ऐसे डिजाइन किया गया जिसमें पत्रकार साथियों की कलम के साथ ही हमारे गैर पत्रकार साथियों की अखबार का साकार रूप देने की प्रिटिंग प्रेस की छवि भी शामिल है। वहीं यूनियन का संविधान सभी अखबार कर्मचारियों के हितों की निस्‍वार्थ भावना से रक्षा करने की भावना से प्रेरित है। इसमें सरकार या सत्‍ता को आकर्षिंत करने वाला वो जर्नलिस्‍ट शब्‍द ही नहीं है, जो बाकी नॉन-जर्नलिस्‍ट साथियों को हीन भावना से ग्रस्त करे।

हालांकि यह बात भी स्‍पष्‍ट की जाती है कि इस यूनियन का मकसद बाकी दूसरी यूनियनों को नीचा दिखाने या उनकी आलोचना करना नहीं है बल्‍कि उनके पूर्व के संघर्ष से प्रेरणा लेकर उनके मार्गदर्शन में समस्‍त अखबार कर्मचारियों के हितों की लड़ाई में अपना योगदान देना है। इसके अलावा यूनियन ने जो लक्ष्‍य निर्धारित किया उसे अपने कर्म से आपके सामने लाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। इस यूनियन के संबंध में आप अपने सुझाव और विचार मेल आईडी neuindia2019@gmail.com पर भेज सकते हैं।

जल्‍द शुरू होगा सदस्‍यता अभियान

यूनियन जल्‍द ही देशव्‍यापी सदस्‍यता अभियान शुरू करेगी। इसके लिए जल्‍द ही फार्म जारी किया जाएगा। यूनियन का सदस्‍य वहीं बन सकता है जो किसी अखबार का कार्यरत कर्मचारी है। इसके अलावा उन संघर्षरत अखबार कर्मियों को भी यूनियन का सदस्‍य बनाने का प्रावधान है, जो मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई में अपनी नौकरी गवा चुके हैं। वहीं मार्ग दर्शन के लिए सेवानिवृत्त अखबार कर्मचारी भी यूनियन के सदस्‍य बन सकते हैं। सदस्‍यता अभियान के बाद सभी प्रदेशों की कार्यकारिणियों का गठन भी किया जाएगा।

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Comments on “मजीठिया क्रांतिकारियों की नेशनल यूनियन ‘एनईयू इंडिया’ पंजीकृत

  • कुमार हर्षवर्द्धन says:

    बहुत बेहतर कदम। मैं दैनिक जागरण से उप समाचार संपादक पद से सेवानिवृत्त हूं। और मजीठिया की जंग लड़ रहा हूँ।
    -कुमार हर्षवर्द्धन

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  • chandra shekhar prasad says:

    सभी साथियों को मेरे तरफ़ से तथा “आज ” हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के मजीठिया क्रांतिकायों की तरफ से कोटि-कोटि बधाई और धन्यवाद ।

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    • Parikshit Joshi says:

      मैं करीब 25 साल किसी न किसी स्वरूप में अखबार से जुड़ा रहा हूं । अभी साहित्य परिषद के सचिव की एवं लेखक मंडल (ट्रेड यूनियन) के कोषाध्यक्ष की जिम्मेवारी निभा रहा हूं । लेखन, संपादन, प्रूफ, कंपोज़, डिज़ाइन, मुद्रण से जुड़े 45 लोगों को मिलाकर एक एजन्सी भी चला रहा हूं । जब भी फॉर्म जारी हो, कृपया बतलाये । कुछ सेवा आपके साथ मिलकर भी करते है । आप सभी को अभिनंदन एवं शुभकामनाएं ।

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  • Sushil Rana says:

    Congratulations. I am also fighting for Majitha, but working nowhere since I was victimized. Do I qualify to be member?

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  • जावेद अली says:

    Congratulations आप सभी अखबार से जुडे भाइयो को इस यूनियन से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े ताकि आप की ताकत का अंदाजा सभी संस्थाओं को लग सके
    हमारी भी सुनी जा सके

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  • anu chauhan says:

    yeh union ke president sahib majithiya ki jung ladne wale bahut bde krantikari bante hain, bhadas me khabre bhi chhhapte rehte hain, lekin majithiya ke naam apne malikon ke hatho lut chuke patrkaron ko yeh aur lootate hain aur majithiya dilane ke naam par ye sahib apni dukandari chla rhe hain. aise pakhdiyon se bachen.

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