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डेढ़ घंटे माथा फोड़ने के बाद एंकर अजय कुमार ने जाना- ये बाबा पागल है!

न्यूज नेशन के पराक्रमी एडिटर अजय कुमार को डेढ़ घंटे माथा फोड़ने के बाद पता चला कि उनके बाबा बवाली यानी ओम बाबा उर्फ स्वामी ओम का मानसिक संतुलन हिल गया है और उसे इलाज की जरूरत है. अजय कुमार को बहुत पहले जब ‘आजतक’ के साथ थे, देखा था और उन्हें बाकी पत्रकारों के मुकाबले थोड़ा संजीदा पत्रकार समझता था. लेकिन बीच के समय में कभी-कभार ही दर्शन मिले. कल उनका एक कार्यक्रम न्यूज नेशन पर देखा ‘बवाली बाबा’. देखकर लगा कि टीआरपी की हवस पत्रकार को क्या से क्या बना देती है.

न्यूज नेशन के पराक्रमी एडिटर अजय कुमार को डेढ़ घंटे माथा फोड़ने के बाद पता चला कि उनके बाबा बवाली यानी ओम बाबा उर्फ स्वामी ओम का मानसिक संतुलन हिल गया है और उसे इलाज की जरूरत है. अजय कुमार को बहुत पहले जब ‘आजतक’ के साथ थे, देखा था और उन्हें बाकी पत्रकारों के मुकाबले थोड़ा संजीदा पत्रकार समझता था. लेकिन बीच के समय में कभी-कभार ही दर्शन मिले. कल उनका एक कार्यक्रम न्यूज नेशन पर देखा ‘बवाली बाबा’. देखकर लगा कि टीआरपी की हवस पत्रकार को क्या से क्या बना देती है.

जिस बाबा से कोई दो मिनट बात न करे, उसे आजकल टीवी वाले एक-एक, दो-दो घंटे टीवी स्टूडियो में बिठाए रखते हैं. उठ-उठकर चल देता है, पकड़-पकड़कर फिर बिठा दिया जाता है. एंकर-एंकराइन और बाबा ये ही तीन लोग बोलते रहते हैं. बाकी गेस्ट में जो समझदार हैं, खामोश रहते हैं. कुछ पूछने पर ही बोलते हैं, अन्यथा नहीं. कुछ जो टीआरपी के लिए लालायित हैं, बीच-बीच में टोक-टाककर बात पूरी होने ही नहीं देते. आसाराम-राधे मां आदि-आदि के बाद अच्छा ‘भगवाधारी’ मिला है टीवीवालों को….

एंकराइन महोदया तो और दो कदम आगे….अजय कुमार गरज रहे थे, तो वे बरस रही थीं. बवाली बावा की गालीगलौज पर अजय कुमार ने उन्हें टोका कि उनका चैनल राष्ट्रीय है और उनका शो पारिवारिक है, जो पांच साल का बच्चा भी देखता है, लेकिन वहां उनसे कोई पूछने वाला नहीं था कि जिस विषय पर वे चर्चा कर रहे थे और जिसमें सनी लियोनी को बार-बार दिखाकर वे सवाल कर रहे थे, अश्लील, किसी महिला को छूने वगैरह-वगैरह के मुद्दे पर बाबा को घेर रहे थे, वो शब्द क्या पांच साल के बच्चे के कान में नहीं जाएंगे?

हद तो तब हो गई जब अजय कुमार को बीच-बीच में बाबा से फरमाइश करते सुना कि एक बार वही वाला नागिन डांस हो जाए…. अच्छा आप बाबा हैं तो हनुमान चालीसा पढ़कर सुना दीजिए…. अच्छा, ये बताइए कि सलमान खान को थप्पड़ कैसे मारा? ये कैसा शो है भाई…. क्या बेचना चाहते हो? कोई घिनौना काम करके आए बंदे को स्टूडियो में बिठाकर उससे घंटों यही पूछते रहते हो- कैसे किया घिनौना काम? क्यों किया? करके बताओ? करते वक्त क्या था दिमाग में?… और अंत में बैलेंस करने के लिए- तुम्हें शर्म नहीं आई ऐसा घिनौना काम करते? उफ्फ… पूरे शो में  चीखना-चिल्लाना, शोरगुल और अंत में हाथापाई…. हां, इन लोगों ने बड़ी कामयाबी से शो खत्म होते-होते हाथापाई और मारपीट भी करवा ही दी. फिर कहते रहे, हम किसी हिंसा में विश्वास नहीं करते. बहुत ही फूहड़ और भौंडा….

आजकल इसका भी चलन निकला है. चौक-चौराहे से लेकर स्टूडियो तक में हंगामा-बवाल करवा दो. आप कार्यक्रम कर रहे हैं या तमाशा? दर्शकों पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है…. कोई महिला दर्शक दीर्घा से उठती है, बवाली बाबा की ओर बढ़ती है ऐसे, जैसे अभी पीट देगी. बहस सुनते-सुनते, देखते-देखते वह खुद को ही जज समझने लग जाती है. उत्तेजना हावी हो जाती है… सही-गलत का फैसला लगे हाथ… खुद अजय कुमार और दो-चार लोग बीच-बचाव करते हैं, मजमा जुटता है, खींचतान, गालीगलौज, हाथापाई और मारपीट….. हो गया भाई हो गया, शो हिट हो गया… तालियां… जिसने गलत किया, उसे गालियां… और जो उस गलत को दिखाकर, उसमें मिर्च-मसाला लगाकर, उसे बेच गया, उसके लिए तालियां…..

एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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