संबित पात्रा ‘आजतक’ न्यूज चैनल में एंकर बन गए… मुझे तो शर्म आई… आपको?

आजतक के मालिक साहब अरुण पुरी जी कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में हैं और मीडिया पर हमले हो रहे हैं… दूसरी तरफ वे अपने ही चैनल में एंकर की कुर्सी पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को बिठा देते हैं. कैसा दौर आ गया है जब मीडिया वालों को टीआरपी के कारण सिर के बल चलना पड़ रहा है. टीवी वाले तो वैसे भी सत्ताधारियों और नेताओं के रहमोकरम पर जीते-खाते हैं लेकिन वे शर्म हया बेच कर नेताओं-प्रवक्ताओं को ही एंकर बनाने लगेंगे, भले ही गेस्ट एंकर के नाम पर तो, इनकी बची-खुची साख वैसे ही खत्म हो जाएगी.

गेस्ट एंकर बनाना ही था तो किसी आर्टिस्ट को बनाते, किसी डाक्टर को बनाते, किसी बेरोजगार युवक को बनाते, किसी स्त्री को बनाते, किसी ग्रामीण को बनाते… किसी खिलाड़ी को बनाते… किसी संगीतकार को बनाते… किसी साहित्यकार को बनाते… किसी रंगकर्मी को बनाते…. अपनी रचनात्मकता और बौद्धिकता के बल पर दुनिया में नाम रोशन करने वाले किसी भी भारतीय को बना लेते… नासिक से मुंबई मार्च कर रहे किसानों में से किसी एक को बना लेते… जनांदोलनों से जुड़े किसी शख्स को बना लेते…

लंबा चौड़ा स्कोप था गेस्ट एंकर बनाने के लिए… लेकिन मोदी भक्ति में लीन न्यूज चैनलों को असल में कुछ भी दिखना बंद हो गया है… उनकी सारी रचनात्मकता अब किसी भी तरह भाजपा को ओबलाइज करते रहने की हो गई है… वे जज लोया कांड पर विशेष स्टोरी नहीं बनाएंगे… कोई सिरीज नहीं चलाएंगे… वे पीएनबी बैंक स्कैम के आरोपियों से मोदी जी के रिश्ते को लेकर पड़ताल नहीं करेंगे…

वे इन सब पर बुरी तरह चुप्पी साध जाएंगे लेकिन जब अगर तेल लगाने की बात आएगी तो भांति भांति तरीके से बीजेपी वालों को तेल लगाते रहेंगे… गाना गा गा के तेल लगाएंगे… अपना मंच उनके हवाले करके तेल लगाएंगे… जियो मेरे न्यूज चैनलों के छम्मकछल्लो….

किसी भी नेता को गेस्ट एंकर बनाने की इस खतरनाक प्रथा का मैं कड़ी निंदा करते हुए अपना विरोध दर्ज कराता हूं….

वैसे, आजतक को मेरी एडवांस सलाह है कि अपने दिवालियापन को विस्तार देते हुए अगले गेस्ट एंकर के तौर पर वह मोदी जी के दो खास उद्योगपतियों में मुकेश अंबानी जी या गौतम अडानी जी में से किसी एक को बुला लें… या चाहें तो क्रमश: दोनों को मौका दे दें…  पत्रकारिता सदा अरुण पुरी एंड कंपनी की एहसानमंद रहेगी…

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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नफरत फैलाने वाले एंकरों पर मुक़दमा चलाने की मांग करने वाली महिला पत्रकार को अरुण पुरी ने नौकरी से निकाला

Shweta R Rashmi : शर्मनाक और घटिया शुरुआत है ये… टीवी टुडे की पत्रकार को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि उसने पत्रकारिता में सिखाये ऊसूल को याद रखते हुए आस पास देख कर सच लिखा और ट्वीट किया। प्रबंधन ने उस पर दवाब डाला कि वो ट्वीट डिलीट करे। ऐसा न करने पर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया। टीवी टुडे ग्रुप में घटी इस घटना से पहले बॉबी घोष को भी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि एक खबर पर सत्ता पक्ष को ऐतराज़ था। अब सवाल ये है कि टीवी टुडे के, या अन्य मीडिया संस्थानों के मैनेजमेंट को दंगा करवाने पर आमादा, बिक़े और गलत सूचना फ़ैलाने वाले झींगुर क्यों नहीं दिखते।

ये है टीवी टुडे समूह का आधिकारिक बयान…

ये

Samar Anarya :  इंडिया टुडे ने झूठी ख़बरें और नफ़रत फैलाने वाले ऐंकरों, पत्रकारों को न रोकने वाले मीडिया मालिकों पर वैमनस्य फैलाने के लिए मुक़दमा चलाने की माँग करने वाली अंगशुकांता चक्रबर्ती को नौकरी से निकाला। ठीक ही किया, भले अंगशुकांता ने किसी समूह का नाम न लिया हो, इंडिया टुडे जानता है कि उसने रोहित सरदानाओं और राहुल कँवलों को नौकरी पे रखा ही हुआ है! नए भारत में स्वागत है।

India Today fires journalist for asking for prosecution of promoters (read owners of channels) allowing hate-mongering, fake news spreading news anchors, as hate speech enablers-profiteers. She hadn’t named anyone but then owners know that they have Rohit RSS Sardanas and Rahul RSS Kanwals doing exactly that! Welcome to New India.

भारतीय मीडिया आज: यूएई दूतावास टाइम्स काऊ, जी न्यूज़ और अन्य मीडिया समूहों को अबू धाबी के राजकुमार के बारे में ‘जय सिया राम’ बोलने की फ़र्ज़ी ख़बर चलाने पर भड़का, चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें डालेंगी संबंधों पर असर। इंडिया टुडे ने फ़र्ज़ी न्यूज़ चलाने वाले, नफ़रत फैलाने वाले मीडिया समूहों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की माँग करने वाली पत्रकार को बर्खास्त किया। नए भारत में स्वागत है।

Indian Media Today: UAE embassy slams Times Cow, Zee News, others for faking news about crown prince of Abu Dhabi chanting Jai Siya Ram, warns that such fake news will affect relationships. India Today fires journalist who sought action against media houses mongering hate, promoting fake news.

पत्रकार श्वेता आर रश्मि और अविनाश समर की एफबी वॉल से.

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भारत के न्यूज़ एंकर रोबोट के पत्रकार बनने से पहले ही सरकार के रोबोट बन गए हैं : रवीश कुमार

Ravish Kumar : भले मत जागिए मगर जानते रहिए… अमरीका में एक अद्भुत गिनती हुई है। नए राष्ट्रपति ट्रंप ने दस महीने के कार्यकाल में झूठ बोलने के मामले में शतक बना लिया है। ओबामा ने आठ साल के कार्यकाल में कुल 18 झूठ बोले थे। न्यूयार्क टाइम्स ने भारत के प्रधानमंत्री का झूठ नहीं गिना है। यहाँ भी गिना जाना चाहिए। नेताओं के झूठ की गिनती हो रही है।

दुनिया के बीस देशों में मीडिया के प्रति भरोसा घटा है। भारत में भी घटा है। सर्वे ने यह नहीं बताया या पूछा ही नहीं होगा कि भरोसा घटने के बाद भी न्यूज़ चैनल के दर्शकों या अखबार के पाठकों में कोई कमी आई है क्या? weforum पर यह सर्वे आया है।

ब्रिटेन के अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि ब्रिटेन के अखबार आदमी और रोबोट का लिखा हुआ लेख छापना शुरू कर रहे हैं। पाठक तय करेंगे कि किसका अच्छा है या रोबोट लेख लिख सकता है या नहीं। भारत के न्यूज़ एंकर रोबोट के पत्रकार बनने से पहले ही सरकार के रोबोट बन गए हैं और अच्छा कर रहे हैं। एक दिन इनकी जगह रोबोट आ भी जाएगा तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गोदी मीडिया की जगह गोदी रोबोट आने वाला है!

एनडीटीवी के चर्चित पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

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रोहित सरदाना के समर्थन में उतरा बीईए, धमकी दिए जाने की निंदा की

ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन यानि बीईए यानि टीवी चैनल्स के संपादकों की संस्था ने आजतक चैनल के एंकर रोहित सरदाना के समर्थन में एक बयान जारी कर उन्हें धमकाए जाने की निंदा की. बीईए प्रेसीडेंट सुप्रिय प्रसाद ने इस बारे में जो बयान जारी किया है, वह इस प्रकार है-

”BEA condemned vicious threats issued to Aajtak anchor Rohit Sardana for his tweets questioning bias over freedom of expression. He was slammed with life-threatening calls and msgs.The BEA urges the law-enforcement agencies to ensure safety and protection of Rohit n his family. such acts of intolerance in the world’s largest democracy that is constitutionally bound to protect free speech”.

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Zee Hindustan की एंकर्स अब सभी प्रांतों के परिधान में दिखेंगी (देखें वीडियो)

State make the nation की थ्योरी के आधार पर Zee Hindustan की एंकर्स अब देश के सभी प्रान्तों के परिधान में खबरें पढ़कर लोगों को जोड़ने का प्रयास करेगी। इस बाबत चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ जगदीश चंद्रा ने एक आदेश जारी किया है। हिंदुस्तानी होने के गौरव को समाहित किए हुए इस आदेश में एंकर्स के लिए भारत के विभिन्न प्रांतों के परिधानों को पहन कर खबर पढ़ने की बात कही गई है।

इस आदेश का अनुपालन शुरू कर दिया गया है। ऐसा पहली बार है जब किसी न्यूज चैनल ने भारतीय के विभिन्न प्रांतों के परिधान को अपने एंकर्स के लिए अनिवार्य किया हो। इस शानदार पहल का हर कोई स्वागत कर रहा है। देखें संबंधित वीडियो…

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हाल-ए-दूरदर्शन : पुरुषोत्तम रुपाला को गुजरात का सीएम बना डाला! (देखें वीडियो)

नवनीत मिश्र
लगता है दूरदर्शन वाले आजकल भांग खाकर काम कर रहे हैं। खासकर एंकर और प्रोड्यूसर। सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की। जब योग्यता नहीं जोड़-जुगाड़ से भर्तियां होती हैं तब यही हाल होता है। यूं तो मैं दूरदर्शन देखता नहीं। मगर, मंगलवार को दिल ने कहा-चलो, खैर खबर लेते हैं। तीन बजे का बुलेटिन चल रहा था। अचानक एंकर साहिबा के मुंह से निकली गुजरात की एक खबर ने चौंका दिया। पुरुषोत्तम रुपाला को कई बार गुजरात का सीएम बता डाला। दिमाग ठनक गया कि जुलाई में केंद्रीय मंत्री बने रूपाला कब सीएम बने। हमें लगा कि शायद हमीं अज्ञानी हैं। कई बार गूगल चेक किया। जब आश्वस्त हो गए तो खबर लिखना बनता था।  

खबरों के प्रसारण में ऐसी लापरवाहियां कई चीजें दर्शातीं हैं। मसलन, प्रोड्यूसर और एंकर पढ़ते-लिखते भी नहीं क्या? सामान्य ज्ञान इतना कमजोर है कि राज्यों के मुख्यमंत्री का नाम भी नहीं जानते?  कभी चीन के राष्ट्रपति XI जिनपिंग के नाम का अलेवन जिनपिंग उच्चारण कर दूरदर्शन की एंकर ने इस सरकारी चैनल को हंसी का पात्र बना दिया था। लगा कि इसके बाद दूरदर्शन के अफसर ठीक से स्टाफ की निगरानी करेंगे। उन्हें जागरूक रहने की नसीहत देंगे।  मगर, इस बार तो लापरवाही की हद पार हो गई। मंगलवार को दूरदर्शन पर तीन बजे के न्यूज बुलेटिन पर एक खबर ने सुधी दर्शकों को चौंका दिया।

केंद्रीय मंत्री को बना दिया मुख्यमंत्री : एंकर जब न्यूज पढ़ रहीं थीं तो पुरुषोत्तम रुपाला को गुजरात का मुख्यमंत्री बताया। यह सुनकर मुझ जैसे तमाम दर्शक चौंक पड़े होंगे। पहले तो लगा कि शायद एंकर के मुंह से गलती से निकल गया। मगर बाद में जब रुपाला का वीडियो चलने लगा, उसके नीचे भी उनके परिचय में मुख्यमंत्री लिखा गया। इससे साफ पता चला कि जिस भी प्रोड्यूसर ने बुलेटिन तैयार किया, उसे यह तक पता नहीं कि गुजरात का मुख्यमंत्री विजय रुपानी हैं न कि पुरुषोत्तम रुपाला।  यहां बता दें कि जिस पुरुषोत्तम को गुजरात का मुख्यमंत्री बताया गया, वे गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं। जुलाई में उन्हें कैबिनेट विस्तार के दौरान मोदी ने अपनी टीम में बतौर मंत्री शामिल किया। संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

लेखक नवनीत मिश्र इंडिया संवाद से जुड़े हैं. संपर्क : navneetreporter007@gmail.com

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…जब एंकर अंकुश वाजपेयी बुलेटिन खत्म कर बाहर आए तो पता चला बीमार मां चल बसीं

Mohit Shrivastava :  एक एंकर बुलेटिन पढ़ रहा हो… तभी पीसीआर पैनल पर बैठा पैनल प्रोड्यूसर एंकर को बताता है कि तुम्हारी मां की तबियत बहुत खराब है… उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया है… तुम भी तुरंत चले जाओ… एंकर कहता है- ”नहीं, बुलेटिन पूरा हो जाए तब जाऊंगा”…

जब वो बुलेटिन खत्म कर बाहर आता है तो पता चलता है कि उसकी मां हमेशा के लिए दुनिया से चली गई… मध्यप्रदेश के रीजनल न्यूज चैनल न्यूज़29 के एंकर अंकुश वाजपेयी के साथ यह वाकया हुआ है… कुछ महीनों पहले छत्तीसगढ़ के रायपुर के आईबीसी 24 मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ चैनल की एंकर सुप्रीत कौर के साथ भी ऐसी घटना घटी… एंकर सुप्रीत ने पति की मौत की ब्रेकिंग खुद पढ़ा था…

पत्रकार मोहित श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

इस घटना के बारे में भोपाल के एक अखबार ने भी कुछ यूं लिखा है…

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महिला एंकर ने घूंघट ओढ़े डिबेट शो की शुरुआत कर हरियाणा सरकार की तुच्छ मानसिकता को मारा तमाचा (देखें तस्वीरें और वीडियो)

आपने तरह-तरह के लाईव शो, डिबेट, बुलेटिन देखा होगा. लेकिन यदि आप अपना टीवी सेट आन करते हैं और सामने टीवी की एंकर घूंघट कर लाईव डिबेट करती नजर आए तो आप जरुर चौंक जाएंगे. ऐसा ही कुछ हुआ STV HARYANA NEWS में. हरियाणा के इस रीजनल न्यूज चैनल की एग्जीक्यूटिव एडिटर और एंकर प्रतिमा दत्ता ने लाईव शो की शुरुआत घूंघट ओढ़कर की.

इसके पीछे वजह है हरियाणा सरकार की वह हरकत जिसमें घूंघट को महिलाओं के लिए आन बान शान बताया गया है. हरियाणा सरकार की ‘कृषि संवाद’ नामक पत्रिका में घूंघट वाली महिला की तस्वीर छपी है. महिला अपने सिर पर चारा लेकर जा रही है. इसमें कैप्शन में लिखा है- ”घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान”. इसको लेकर हरियाणा सरकार घिर गई है.

जहां एक तरफ हरियाणा की बहू बेटियों ने घूंघट से बाहर निकलकर देश-प्रदेश का नाम रोशन किया. वहीं हरियाणा सरकार द्वारा घूंघट को हरियाणा की पहचान बनाना और बताना बेहद छोटी सोच का उदाहरण है. हरियाणा सरकार की इसी ‘तुच्छ सोच’ के खिलाफ प्रतिमा दत्ता ने महिलाओं का पैनल बिठा कर घूंघट में लाईव डिबेट की शुरुआत की और प्रदेश सरकार की आंख खोलने की कोशिश की. उन्होंने अपने इस शो के जरिए बता दिया की अब बहू–बेटियां घूंघट से बाहर निकलकर बहुत आगे निकल चुकी हैं और पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, इसलिए इन्हें फिर से घूंघट में न कैद किया जाए.

इस चर्चिच डिबेट शो को देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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”बकवास 7×24” चैनल, चीखू ऐंकर और एक गधे का लाइव इंटरव्यू

विनय श्रीकर

देश के सबसे लोकप्रिय खबरिया चैनल ”बकवास 7×24” का चीखू ऐंकर पर्दे पर आता है और इस खास कार्यक्रम के बारे में बताता है। ऐंकर– आज हम अपने दर्शकों को दिखाने जा रहे हैं एक ऐसा लाइव इंटरव्यू, जिसको देख कर वे हमारे चैनल के बारे में बरबस कह उठेंगे कि ऐसा कार्यक्रम तैयार करने का बूता किसी और चैनल में नहीं है। स्टूडियो में गधे का प्रवेश। माइक लेकर चैनल का पत्रकार गधे से मुखातिब होता है। इंटरव्यू शुरू होता है–

पत्रकार– क्या आप विश्वास के साथ कहेंगे कि कि आप गधे ही हैं।
गधा— उतने ही विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मैं पक्का गधा हूं, जितने विश्वास के साथ तुम अपने को टीवी पत्रकार कहते नहीं अघाते।

पत्रकार— जब आपको कोई गधा कह कर पुकारता है तो कैसा अहसास करते हैं ?
गधा— हमें इसका कोई गुरेज नहीं। तुम भी धड़ल्ले से मुझे गधा कह कर पुकारो। कतई बुरा नहीं मानेंगे, क्योंकि नाम से पुकारने की कुप्रथा इंसानों में है। दुर्भाग्य से पालतू कुत्ते भी इस कुप्रथा का शिकार हैं। हम गधों ने इस कुप्रथा से अपने को दूर रखा है। पूरी दुनिया की गधा बिरादरी में जाति, रंग, नस्ल या पंथ-धर्म जैसी वाहियात बातों के लिए भी कोई जगह नहीं है।

पत्रकार— क्या आपके मम्मी-पापा भी गधे थे ?
गधा— तो क्या तुम जैसे इंसानों के मां-बाप गधे होंगे ? क्या गधेपन का सवाल किया है यार ! किस गधे ने तुमको टीवी पत्रकार बना दिया है ?

पत्रकार— अपनी जबान पर काबू रखिये, गधा साहब ! हमारे चैनल के संपादक ने हमें रखा है। उन्हें आप गधा नहीं बोल सकते। वह अव्वल दर्जे के बुद्धिमान और विद्वान व्यक्ति हैं।
गधा— खैर चलो, तुमको मेरी खरी बात नहीं सुहाई तो अपने शब्द वापस लेता हूं। आगे जो पूछना हो पूछो।

पत्रकार— आप कहां के रहने वाले हैं और आपका पालन-पोषण कहां हुआ है ?
गधा– मेरा जन्म एवं पालन-पोषण एक भारतीय धोबी के घर में हुआ है। और, मैं भारत का एक पशु-नागरिक हूं।

पत्रकार— गधा साहब, आपका जनधन खाता किस बैंक में खोला गया है ? आपका आधार कार्ड बना है या नहीं ? अगर नहीं बना है तो क्यों नहीं ?
गधा— बरखुरदार, पक्के गंवार लगते हो। तुमको यह भी नहीं आता कि किससे क्या सवाल करना चाहिए। मेरी राय है कि तुम पत्रकारिता का पेशा छोड़ दो और चाट का ठेला लगाया करो। रहे तुम्हारे सवाल तो अव्वल ये सवाल तुमको इस देश के वजीरे-आजम से पूछने चाहिए। दूसरी बात, यदि हमारा खाता खुलेगा तो उसका नाम जनधन खाता नहीं पशुधन खाता होगा। जहां तक आधार कार्ड की बात है, तो उसके लिए दोनों हाथों की अंगुलियों के छाप की जरूरत होगी। यार, तुम तो निरे अज्ञानी लगते हो। हमारी बिरादरी का संबोधन पाने लायक भी नहीं हो।

(झुंझलाया हुआ गधा सिपों-सिपों करता इंटरव्यू बीच में छोड़ कर स्टूडियो से निकल भागता है।)

लेखक विनय श्रीकर वरिष्ठ पत्रकार हैं और ढेर सारे बड़े हिंदी अखबारों में उच्च पदों पर कार्य कर चुके हैं. उनसे संपर्क shrikar.vinay@gmail.com या 9792571313 के जरिए किया जा सकता है.

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‘एनडीटीवी 24×7’ की एंकर ने लाइव डिबेट में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को शो से जाने के लिए कह दिया

Vineet Kumar : ये संबित पात्रा का अपमान नहीं, टीवी में भाषा की तमीज बचाने की कोशिश है… कल रात के शो में निधि राजदान (NDTV 24X7) ने बीजेपी प्रवक्ता और न्यूज चैनल पैनल के चर्चित चेहरे में से एक संबित पात्रा से सवाल किया. सवाल का जवाब देने के बजाय संबित ने कहा कि ये एनडीटीवी का एजेंडा है, चैनल एजेंडे पर काम करता है. निधि राजदान को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उसके बाद आखिर-आखिर तक सिर्फ एक ही बात दोहराती रही- ”प्लीज, आप इस शो से जा सकते हैं. आप प्लीज ये शो छोड़कर चले जाएं. ये क्या बात हुई कि आपसे कोई सवाल करे तो आपको वो एजेंडा लगने लग जाए.”

संबित इसके बावजूद शो में बने रहे और कहा कि वो चैनल को एक्सपोज करेंगे, निधि ने आगे जोड़ा- ”आपको दूरदर्शन की तरह जो चैनल ग्लोरिफाय करके दिखाते हो, वहीं जाएं, एनडीटीवी पर मत ही आएं.”

इस पूरी घटना के कई पाठ हो सकते हैं. इसे संबित पात्रा सहित देश की सबसे बड़ी पार्टी का अपमान के साथ जोड़कर देखा जा सकता है. दूसरी तरफ निधि राजदान की बतौर एक एंकर ताकत का भी अंदाजा लगाया जा सकता है. उनकी हीरोईक प्रेजेंस को सिलेब्रेट किया जा सकता है और विरोधी पार्टी के लोग रात से ही शुरु हो गए हैं. ये भी कहा जा सकता है कि एक एंकर जब अपने काम को ठीक-ठीक समझ पाए तो वो बहस के नाम पर कुछ भी बोलने नहीं दे सकते. लेकिन इन बहुस्तरीय पाठ के बीच जो सबसे जरुरी चीज है कि निधि राजदान ने जिस अंदाज में संबित पात्रा को शो से जाने कहा और एजेंड़े शब्द पर आपत्ति दर्ज की, वो इस बात की मिसाल है कि टीवी में तेजी से खत्म होती भाषा के बीच उसे बचाने की जद्दोजहद और तमीज बनाए रखने की कोशिश है. तथ्य के बदले पर्सेप्शन या धारणा, सहमति-असहमति के बजाय खुली चुनौती और देख लेंगे के अंदाज में जो नुरा कुश्ती चलती रहती है, उससे अलग निधि का इस तरह टोका जाना इस बात का संकेत है कि आप कहने के नाम पर कुछ भी नहीं कह सकते.

व्यावसायिक स्तर पर एनडीटीवी ग्रुप के अपने कई पेंच हो सकते हैं और उन्हें वैधानिक स्तर पर चुनौती मिलती रही है लेकिन एक एंकर जब सतर्कता से अपने पैनलिस्ट को पर्सेप्शन बनाने से रोकते हैं तो इसका एक अर्थ ये भी है कि वो अपने चैनल ब्रांड को लेकर कॉन्शस है. उन्हें पता है कि जब एजेंडा शब्द को पचा लिया जाएगा तो इसकी ब्रांड वैल्यू पर बुरा असर पड़ेगा. इसे सुनकर रह जाना खुद की क्रेडिबिलिटी पर बड़ा सवाल है.

आज जबकि हर दूसरे-तीसरे चैनल के एंकर ब्रांडिंग और वीरगाथा काल में फर्क करना तेजी से भूलते जा रहे हों, निधि राजदान का ये हस्तक्षेप टीवी में भाषा की तेजी से खत्म होती तमीज की तरफ इशारा है. एक मीडिया छात्र के नाते हमें इस सिरे से भी सोचना होगा कि एक तरफ जब एंकर खुद बेलगाम होते जा रहे हों, वो खुद ऐसे शब्दों का प्रयोग करते आए हों जिन्हें सुनकर आपकी उम्मीदें घुट-घुटकर दम तोड़ दे रही हों, निधि राजदान का ये अंदाज न्यूज चैनल की एक दूसरी परंपरा जो तेजी से खत्म होती जा रही है, याद करने की बेचैनी है, उसे बचाए रखने की कोशिश है.

आनेवाले समय में बहुत संभव है संबित सहित पूरी तरह उनकी पार्टी भी इस चैनल का बायकॉट कर दे लेकिन इससे पहले इस वीडियो से गुजरा जाएं तो आप इस बात से असहमत नहीं हो सकेंगे कि भाषा की ध्वस्त परिस्थिति में एक एंकर ऐसा करके दरअसल खुद को, अपने पेशे की गरिमा बचाने की कोशिश कर रही हैं. अपने सालों की उस मेहनत को जो नौकरी से कहीं आगे की चीज हैं. एक मीडियाकर्मी यदि भाषा के स्तर पर समझौते कर लेता है तो इसका मतलब है कि बाकी का उसका पूरा काम व्याकरण ठीक करते रहने में निकल जाएगा. भाषा व्याकरण से कहीं आगे एक बेहतर समाज की परिकल्पना है.

वीडियो के लिए चटकाएं.

https://www.youtube.com/watch?v=mhSKGOEHM9A

मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार की एफबी वॉल से.

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सुप्रीत कौर के लिए मन भर आया, तनुजा दीदी का सबक याद आया….

आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया में जब छत्तीसगढ़ के न्यूज़ चैनल IBC24 की एंकर सुप्रीत कौर के काम के बारे में पढ़ा तो अंग्रेज़ी कुछ खास न जानने के बावजूद मन भर आया। सुप्रीत कौर चैनल में जिस वक्त ऑन एयर थी उसी वक्त एक रोड एक्सीडेंट की खबर ब्रेक हुई। सुप्रीत कौर ने समाचार देना शुरू किया तभी संवाददाता ने जो डिटेल्स दिये उन दृश्यों से पता चला कि सड़क दुर्घटना में सुप्रीत कौर के ही पति की मौत हो चुकी है। सुप्रीत ने विचलित हुए बिना अपनी ड्यूटी पूरी की।

यह पहाड़ टूटने जैसे घोर दुःख के बीच कर्तव्य पालन की बड़ी इंसानी मिसाल है। बड़े बड़े हिम्मतवर सुध बुध खो देते हैं, सदमें में चले जाते हैं। सुप्रीत कौर जैसी इंसानियत और शख्सियत का होना कितने भी बड़े दुख के बावजूद ईमानदार कर्तव्य पालन की एक जीती जागती घटना है। इसे कभी न भुलाया जा सकेगा! मुझे बीते सालों की एक बात याद आती है-

2003 या 04 का साल रहा होगा। मई जून की चिलचिलाती, लू भरी गर्मियों के दिन। आकाशवाणी रीवा में मेरी एनाउंसमेंट की नाइट ड्यूटी थी। मैं नया नया था। काम बड़ा और ज़िम्मेदारी भरा होता था। भीतर से डर और धुकधुकी जाते ही न थे। संयोग से उस दिन युववाणी और चौपाल दोनों के कम्पियर की ड्यूटी नहीं लगी थी। सब मुझे ही करना था। ड्यूटी बड़ी पैक्ड थी। मैं गांव से दोपहर में ही आ गया था। कोई दिली बात थी कि मैंने खाना नहीं खाया था और तबियत भी ख़राब थी।
 

ड्यूटी ठीक-ठाक शुरू हुई। सब ठीक ठाक जा रहा था। लेकिन कमजोरी से हिम्मत चुक रही थी। सीनियर एनाउंसर तनुजा मित्रा जिन्हें मैं तनुजा दीदी कहता हूँ और जिनके लिए मेरे दिल में अमिट लगाव और सम्मान है, ड्यूटी ऑफिसर थीं। तनुजा दीदी कभी न हलके मूड में दिखती थीं न माफ़ करनेवाली। सदा एक सा अनुशासन और कड़ाई। वे थोड़ी नरम और मिलनसार केवल तब लगतीं थीं जब रात के 9 बजे के आस-पास खाने के लिए पूछतीं और खुद खाना खाने के बाद पान खाकर इत्मीनान से पांच दस मिनट के लिए बैठतीं। तब वे बड़ी खिलकर देखतीं थीं और कोई न कोई ताकत की बात बोलतीं थीं।

तनुजा दीदी बहुत कीन थीं। प्यारी आवाज़ की धनी एनाउंसर। बेटे बहु के साथ रहतीं थीं। पति बहुत पहले गुज़र गये थे। मैंने उनसे बहुत रेडियो सीखा। कोई फॉल्ट तनुजा दीदी से रिपोर्ट होने से नहीं बच पाती थीं। लेकिन वे डांटती नहीं थीं। कुछ खास दूसरों की तरह स्टूडियो आकर कुछ नहीं कहती थीं। ज़लील करना उनके स्वभाव में ही नहीं था। वे सबसे वाजिब दूरी रखतीं थीं लेकिन उसमें बड़ी आत्मीयता, सौजन्य और सम्मान भी रहते थे। लेकिन ख़ाली होने पर ड्यूटी रूम में दरयाफ्त ज़रूर करती थीं। क्या क्या गलती हुई? उनके पूछने में ही दम और सच निकल आते थे। भीतर भीतर कुछ चुभ भी जाता था।

उस दिन मुझसे विज्ञापन छूट गया था, फ़िलर नहीं बज पाया था और गोइंग ओवर एनाउंसमेंट में निजी उदासी चली गयी थी।

तनुजा दीदी ने मेरी ग़लती मुझसे ही सुनकर गलती हो गयी के जवाब में कहा- शशिभूषण, तुम ग़लती करने के लिए स्टूडियो में नहीं होते हो। स्टूडियो निजी सुख-दुख की जगह नहीं है। एक बार कंसोल के सामने बैठो तो घर परिवार भुला दो। एनाउंसमेंट भले तुम करते हो लेकिन वे तुम्हारी भावनाओं के लिए नहीं हैं। रेडियो सुनने वाले लाखों लोग तुम्हें नहीं, प्रोग्राम सुनने के लिए रेडियो चालू करते हैं।

और भी कई बातें थीं। उस दिन ही ये सबक मिला कि कैसे लोग अपने हिस्से का काम करते हैं। काम में काम की मर्यादा से बड़ा कुछ नहीं। अपना काम करो और फालतू उलझो मत। मैं भावुक हो चला था। लेकिन तनुजा दीदी निस्पृह थीं। मुझे तनुजा दीदी से दूसरी सीख या कहिए सपोर्ट यह मिले कि बहस करना कभी नहीं छोड़ना। मैंने कहा था कि मैं हमेशा बहस में पड़ जाता हूँ और इससे बड़े दुख और नुकसान मिलते हैं। तनुजा दीदी ने शांत भाव से कहा- तुम बहस करना छोड दोगे तो अपना बड़ा नुकसान करोगे। तर्क तुम्हारे स्वभाव में है। नाराज़गी की परवाह मत करो। अपने स्वभाव के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।

तनुजा दीदी के जीवन के दुःख याद करता हूँ तो उनकी ड्यूटी, आवाज़ और सीखें और प्यारी हो उठती हैं। उनकी सीखें मंत्र सरीखी लगती हैं। सालों हो गये उनकी कोई खबर नहीं। लेकिन वे कभी भूल नहीं सकतीं।

आज यही खयाल आता है कोई चाहे जहाँ है लेकिन अपना काम सच्चाई से करता है तो दुनिया उसी से चलती है। संसार सच्चाई से ही चल रहा। इतनी चीज़ें ठीक ठाक है तो जाने अनजाने लोगों की ईमानदार, नि:स्वार्थ  मेहनत से ही

अच्छे लोग अपने काम से एक दिन अवश्य जाने जाते हैं। ज़िन्दगी का कुछ ठीक नहीं आज है कल न रहे। लेकिन काम रहते हैं।

सुप्रीत के लिए सैल्यूट और संवेदनाएं…

शशिभूषण की एफबी वॉल से.

मूल खबर पढ़ने के लिए नीचे प्रकाशित न्यूज कटिंग पर क्लिक करें….

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न्यूज चैनल आईबीसी24 की एंकर सुरप्रीत कौर को सलाम!

छत्तीसगढ़ का एक न्यूज चैनल आईबीसी-24 नाम से है. इसमें न्यूज एंकर के बतौर सुरप्रीत कौर काम करती हैं. सुरप्रीत जब कल खबर पढ़ रही थीं तभी एक ब्रेकिंग न्यूज आई. यह न्यूज उनके पति की सड़क हादसे में मौत से संबंधित थी. सुरप्रीत अपने पति की मौत की खबर को भी लाइव न सिर्फ पढ़ गईं बल्कि मौके पर मौजूद रिपोर्टर से विस्तृत जानकारी लेकर अपने दर्शकों को अपडेट किया.

उनके इस प्रोफेशनल रवैये की हर ओर तारीफ हो रही है. अपने काम के प्रति इस तल्लीनता और लगन की हर कोई सराहना कर रहा है.

सुरप्रीत शनिवार की सुबह रोजाना की तरह ऑफिस आईं और न्यूज बुलेटिन पढ़ने लगीं. इसी दौरान महासमु्ंद जिले के पिथौरा में हुए एक सड़क हादसे की जानकारी आई तो इस महिला एंकर ने उसकी ब्रेकिंग न्यूज पढ़ी. इसी ब्रेकिंग न्यूज में उसके पति की मौत की भी खबर थी.

इस प्रकरण पर एक पत्रकार की टिप्पणी यूं है :

खबर और पत्रकार का क्या रिश्ता होता है शायद एक ऐसी पत्नी से ज्यादा अच्छे से कोई नहीं समझा सकता जो अपने जीवन साथी की मौत की खबर खुद ब्रेक करे। सच में सुप्रीत कौर एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अपने काम को दायित्व स्तर से भी आगे जाकर पूरा किया। मैं सुप्रीत के पति हर्षद की असामयिक मौत पर संवेदना प्रकट करता हूँ एवं उनकी दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूँ। ईश्वर सुप्रीत को इस विपदा से लड़ने की ताकत दे।

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सईद अंसारी यानि एक अद्भुत एंकर, एक बेजोड़ इंसान

Vikas Mishra : सईद अंसारी…नाम तो सुना होगा..। जितने बढ़िया एंकर, उतने ही बेहतरीन इंसान भी। हमेशा हंसते हुए और गर्मजोशी के साथ मिलते हैं। हर किसी की मदद के लिए तैयार, पक्के यारबाज। मुझे नहीं लगता कि दुनिया में कोई ऐसा भी इंसान होगा, जिसने कभी ये शिकायत की हो कि सईद अंसारी ने मुझसे कोई गलत बात की, तल्ख आवाज में बात की। जमीन से बिल्कुल जुड़े हुए, बिल्कुल इगोलेस, कमाल के इंसान। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अगर किसी एंकर का कोई स्लॉट तय है तो वो कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता कि उस स्लॉट में कोई और एंकरिंग करे, लेकिन सईद भाई इस नियम से परे हैं।

न्यूज 24 में जब मैं शाम साढ़े सात बजे का न्यूज स्पेशल बनाता था, तब उसके एंकर एक रोज सईद भाई होते थे, अगले रोज अंजना। अगर कोई हल्का फुल्का या फिर किसी फिल्मी मसालेदार सब्जेक्ट पर शो होता था तो मैं सईद भाई से कह देता कि ये सब्जेक्ट आप लायक नहीं है, आप हमारे मुख्य एंकर हैं, तो मैं इसे किसी नए एंकर से करवा लेता हूं। सईद भाई बिल्कुल तैयार। बोलते-जी हां विकास भाई आप सही कह रहे हैं। सईद के इस दरियादिली में न्यूज 24 में कई नए एंकर भी तैयार हो गए। कई बार उनके साथ एंकरिंग में मैंने कुछ प्रयोग भी किए, सईद भाई हर बात के लिए तैयार मिलते।

सईद अंसारी के साथ बहुत सी खूबियां जुड़ी हैं। ये कुल दो- ढाई मिनट में कोट-टाई पहनकर तैयार हो जाते हैं। चलते कम हैं, दौड़ते ज्यादा हैं। न्यूजरूम में भी दौड़ते ही रहते हैं। हमेशा इनके चेहरे पर आपको ताजगी दिखेगी। सईद भाई तो स्टार न्यूज में लगातार 18 घंटे बिना ब्रेक के लाइव एंकरिंग करके वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। जिसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में बाकायदा दर्ज किया गया है। काम के जुनून का एक मजेदार वाकया सुनिए। न्यूज 24 में सईद भाई घंटों से एंकरिंग कर रहे थे। कोई बड़ी घटना हो गई थी। उस वक्त चैनल पर विजुअल चल रहे थे, पीछे सईद अंसारी की आवाज आ रही थी। अचानक उनकी आवाज के साथ, वॉशरूम में फ्लश चलने की हल्की सी आवाज आई। दस सेकेंड में बंद भी हो गई। दरअसल हुआ ये था कि सईद भाई को जोरों से वाशरूम जाने की तलब लगी हुई थी, लेकिन वो मौका नहीं ढूंढ पाए थे। ईपी (इयरफोन) उनके कान में था, पैनल को उन्होंने इशारे में बता भी दिया था। वो मुतमईन थे कि इस दौरान उन्हें स्क्रीन पर दिखाया नहीं जाएगा, इस बीच वो वाशरूम चले गए, खबर के बारे में बोलते रहे, और वाशरूम से फारिग होकर लौट भी आए।

साल 2009 की बात है, तब मैं जब न्यूज 24 में था। मोटरसाइकिल छोड़कर कार खरीदने का मूड बना रहा था। कई बार मीटिंग में भी मेरी कार का मुद्दा उठ गया। मेरे सामने सवाल कुछ पेशगी की रकम का था, क्योंकि मेरे अकाउंट में कभी पैसे अमूमन न पहले रहे, न उस वक्त रहे, न आज रहते हैं। खैर, एक रोज मेरे मोबाइल में बैंक से एक मैसेज आया, जिसके मुताबिक मेर खाते में 60 हजार रुपये आए थे। मैं परेशान कि ये पैसे कहां से आए। मैंने चैनल की मीटिंग में भी कहा कि न जाने कहां से खाते में 60 हजार रुपये आए हैं, कहीं तनख्वाह दो बार तो नहीं आ गई। सईद भाई बोले-अरे विकास भाई, पैसे आ गए तो सोचिए मत, अब कार खरीद लीजिए। शाम को मेरी परेशानी भांपते हुए सईद भाई ने बताया-विकास भाई आपका अकाउंट नंबर पता करके ये मैंने ही भेजा है, अब कार खरीदिए। खैर, उस वक्त मैंने वैगन आर कार खरीदी, जिसे प्यार से मेरे घर में वैगू नाम दिया गया। कार आ गई, पैसे चुक गए। मजे की बात ये थी कि कई बार न्यूजरूम में जब सईद तेजी से पास से गुजरते तो मैं जोर से उनसे कहता-सईद भाई मुझसे पैसा उधार लिए हैं क्या जो नजर बचाकर निकल रहे हैं। सईद झेंप जाते, क्योंकि उन्होंने सख्ती से मना कर रखा था कि उनसे पैसे लेने वाली बात मैं किसी से न कहूं।

सईद भाई को बच्चों से बहुत प्यार है। किसी पार्टी वगैरह में जाते हैं तो सभी बच्चों का मजमा जुटा लेते हैं। उन्हें बाकी लोगों से मिलना जुलना उतना रास नहीं आता, जितना बच्चों के बीच वो रमते हैं। हमारे वरिष्ठ साथी कहते हैं-सईद अंसारी ही अगला चाचा नेहरू बनेगा। जो बच्चा सईद भाई से एक बार मिल ले, फिर उनका फैन हो जाता है। कोई भी सईद भाई को न्योता दे, सईद भाई पहुंचते जरूर हैं, हालांकि वो अक्सर पार्टी में पहुंचने वाले और पार्टी से जाने वाले सबसे आखिरी सदस्य होते हैं।

2009 में सईद भाई ने नई नई स्कॉर्पियो खऱीदी थी। न्यूज 24 की छत पर एक रोज यूं ही बातचीत में मैंने उनसे कहा कि इस बार गांव जाऊंगा तो आपकी स्कॉर्पियो ले जाऊंगा। सईद भाई ने चाबी जेब से निकाली, बोले-अभी लीजिए। मैंने कहा-जब जाऊंगा तो ले लूंगा। सईद बोले नहीं, अभी लीजिए, मैं आपकी वैगन आर ले लूंगा। संयोग देखिए, जब हम लोग छत पर रात में ये बातचीत कर ही रहे थे, उसी रात उनकी नई नवेली स्कॉर्पियो चोरी हो गई। सईद के चेहरे पर इसका मलाल नहीं था। वो पहले जैसे ही मस्त नजर आते रहे।
सईद एंकर हैं, उनके हजारों फैन हैं, जब वो चैनल की वेबसाइट पर फेसबुक लाइव में आते हैं तो पल भर में हजारों लाइक्स, शेयर और कमेंट आ जाते हैं। जब सईद बाहर जाते हैं, उनके साथ फोटो खिंचवाने और सेल्फी लेने वालों में होड़ मच जाती है।

सईद किसी को निराश भी नहीं करते। सईद जैसे हैं, वैसे ही रहना और दिखना चाहते हैं, किसी शोहरत की उन्हें दरकार नहीं, शायद यही वजह है कि लोगों के लाख कहने के बावजूद सईद ने न तो फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाया और न ही ट्विटर पर। सईद से आप कभी किसी बड़े ओहदेदार से दोस्ती या रिश्तों का जिक्र नहीं सुनेंगे ( हालांकि उनके ऐसे कई लोगों से अच्छे रिश्ते हैं), लेकिन दफ्तर के गार्ड, हाउस ब्वाय, पैनल के स्टाफ, स्विचर और तमाम कनिष्ठ साथियों से सईद के हमेशा अच्छे रिश्ते रहते हैं। सईद रोजाना सबका हाल चाल पूछते हैं। सभी गार्ड्स से उनके अच्छे रिश्ते हैं, यही वजह है कि दफ्तर में उनकी गाड़ी के लिए कभी पार्किंग फुल नहीं होती। ऊंचाई पर पहुंचकर भी किस तरह इंसान विनम्रता बनाए रखे, ये पाठ सईद अंसारी अपने व्यक्तित्व से हमें रोज पढ़ाते रहते हैं।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत विकास मिश्र की एफबी वॉल से.

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डेढ़ घंटे माथा फोड़ने के बाद एंकर अजय कुमार ने जाना- ये बाबा पागल है!

न्यूज नेशन के पराक्रमी एडिटर अजय कुमार को डेढ़ घंटे माथा फोड़ने के बाद पता चला कि उनके बाबा बवाली यानी ओम बाबा उर्फ स्वामी ओम का मानसिक संतुलन हिल गया है और उसे इलाज की जरूरत है. अजय कुमार को बहुत पहले जब ‘आजतक’ के साथ थे, देखा था और उन्हें बाकी पत्रकारों के मुकाबले थोड़ा संजीदा पत्रकार समझता था. लेकिन बीच के समय में कभी-कभार ही दर्शन मिले. कल उनका एक कार्यक्रम न्यूज नेशन पर देखा ‘बवाली बाबा’. देखकर लगा कि टीआरपी की हवस पत्रकार को क्या से क्या बना देती है.

जिस बाबा से कोई दो मिनट बात न करे, उसे आजकल टीवी वाले एक-एक, दो-दो घंटे टीवी स्टूडियो में बिठाए रखते हैं. उठ-उठकर चल देता है, पकड़-पकड़कर फिर बिठा दिया जाता है. एंकर-एंकराइन और बाबा ये ही तीन लोग बोलते रहते हैं. बाकी गेस्ट में जो समझदार हैं, खामोश रहते हैं. कुछ पूछने पर ही बोलते हैं, अन्यथा नहीं. कुछ जो टीआरपी के लिए लालायित हैं, बीच-बीच में टोक-टाककर बात पूरी होने ही नहीं देते. आसाराम-राधे मां आदि-आदि के बाद अच्छा ‘भगवाधारी’ मिला है टीवीवालों को….

एंकराइन महोदया तो और दो कदम आगे….अजय कुमार गरज रहे थे, तो वे बरस रही थीं. बवाली बावा की गालीगलौज पर अजय कुमार ने उन्हें टोका कि उनका चैनल राष्ट्रीय है और उनका शो पारिवारिक है, जो पांच साल का बच्चा भी देखता है, लेकिन वहां उनसे कोई पूछने वाला नहीं था कि जिस विषय पर वे चर्चा कर रहे थे और जिसमें सनी लियोनी को बार-बार दिखाकर वे सवाल कर रहे थे, अश्लील, किसी महिला को छूने वगैरह-वगैरह के मुद्दे पर बाबा को घेर रहे थे, वो शब्द क्या पांच साल के बच्चे के कान में नहीं जाएंगे?

हद तो तब हो गई जब अजय कुमार को बीच-बीच में बाबा से फरमाइश करते सुना कि एक बार वही वाला नागिन डांस हो जाए…. अच्छा आप बाबा हैं तो हनुमान चालीसा पढ़कर सुना दीजिए…. अच्छा, ये बताइए कि सलमान खान को थप्पड़ कैसे मारा? ये कैसा शो है भाई…. क्या बेचना चाहते हो? कोई घिनौना काम करके आए बंदे को स्टूडियो में बिठाकर उससे घंटों यही पूछते रहते हो- कैसे किया घिनौना काम? क्यों किया? करके बताओ? करते वक्त क्या था दिमाग में?… और अंत में बैलेंस करने के लिए- तुम्हें शर्म नहीं आई ऐसा घिनौना काम करते? उफ्फ… पूरे शो में  चीखना-चिल्लाना, शोरगुल और अंत में हाथापाई…. हां, इन लोगों ने बड़ी कामयाबी से शो खत्म होते-होते हाथापाई और मारपीट भी करवा ही दी. फिर कहते रहे, हम किसी हिंसा में विश्वास नहीं करते. बहुत ही फूहड़ और भौंडा….

आजकल इसका भी चलन निकला है. चौक-चौराहे से लेकर स्टूडियो तक में हंगामा-बवाल करवा दो. आप कार्यक्रम कर रहे हैं या तमाशा? दर्शकों पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है…. कोई महिला दर्शक दीर्घा से उठती है, बवाली बाबा की ओर बढ़ती है ऐसे, जैसे अभी पीट देगी. बहस सुनते-सुनते, देखते-देखते वह खुद को ही जज समझने लग जाती है. उत्तेजना हावी हो जाती है… सही-गलत का फैसला लगे हाथ… खुद अजय कुमार और दो-चार लोग बीच-बचाव करते हैं, मजमा जुटता है, खींचतान, गालीगलौज, हाथापाई और मारपीट….. हो गया भाई हो गया, शो हिट हो गया… तालियां… जिसने गलत किया, उसे गालियां… और जो उस गलत को दिखाकर, उसमें मिर्च-मसाला लगाकर, उसे बेच गया, उसके लिए तालियां…..

एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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