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कांग्रेस के बुरे दिन आए तो पंकज शर्मा फिर पत्रकारिता में लौट आए!

साढ़े सात साल पहले पत्रकारिता से विदाई लेकर कॉंग्रेस पार्टी में चले गए पंकज शर्मा फिर पत्रकारिता में लौट रहे हैं. नवभारत टाइम्स की अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर वे 2007 में कॉंग्रेस में शामिल हो गए थे. कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भाषण लिखना उनका असली काम था. साथ ही उन्हें पार्टी के मुखपत्र कॉंग्रेस संदेश के संपादन का जिम्मा भी दे दिया गया था. कुछ साल बाद शर्मा को कॉंग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया, लेकिन किसी भी राज्य का प्रभार इसलिए नहीं मिला कि असली काम तो भाषण लिखने का ही था.

साढ़े सात साल पहले पत्रकारिता से विदाई लेकर कॉंग्रेस पार्टी में चले गए पंकज शर्मा फिर पत्रकारिता में लौट रहे हैं. नवभारत टाइम्स की अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ कर वे 2007 में कॉंग्रेस में शामिल हो गए थे. कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का भाषण लिखना उनका असली काम था. साथ ही उन्हें पार्टी के मुखपत्र कॉंग्रेस संदेश के संपादन का जिम्मा भी दे दिया गया था. कुछ साल बाद शर्मा को कॉंग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया, लेकिन किसी भी राज्य का प्रभार इसलिए नहीं मिला कि असली काम तो भाषण लिखने का ही था.

अपने खाली समय का इस्तेमाल पंकज शर्मा ने मध्यप्रदेश के इंदौर को अपना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए किया. मगर पार्टी ने उन्हे 2009 में उम्मीदवार बनाया नही और 2014 में इंदौर को राहुल गांधी के प्राइमरीस वाले प्रयोग में दिग्विजय सिंह ने शामिल करवा दिया. शर्मा देखते रह गये. वैसे लड़ते भी तो मोदी की आंधी में बुरी तरह उड़ जाते. सुमित्रा महाजन के खिलाफ लड़ना वैसे भी किसके बस की बात थी. अब जब कॉंग्रेस 44 पर आ गई है और शर्मा को सात साल में की मेहनत बेकार जाती दिखाई दे रही है तो उन्हे फिर मीडिया की याद आ रही है. खबर है कि पंकज शर्मा तीन-चार नावों में से किसी एक में चढ़ने की तैयारी कार रहे हैं. दक्षिण भारत के एक समाचार चैनल का उत्तरभारतीय हिन्दी अवतार लॉंच करेंगे या राजधानी के एक अंग्रेजी दैनिक के नंबर दो होंगे या देश के एक बड़े गुटखा किंग के हिन्दी दैनिक को दिल्ली में संभालेंगे या फिर खुद का पब्लिकेशन लॉंच करेंगे. लेकिन इतना पक्का है कि राजनीति में उनका समय पूरा हो गया लगता है. (कानाफूसी)

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

उपरोक्त पोस्ट पर पंकज शर्मा की प्रतिक्रिया क्या है, जानने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें…

अगर मैं मीडिया की किसी नौकरी में लौट भी जाऊं तो इसका अर्थ यह तो नहीं होगा कि राजनीति में मेरा समय पूरा हो गया है : पंकज शर्मा

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1 Comment

1 Comment

  1. pardeep

    August 2, 2014 at 7:13 am

    मुझे लगता है की यह गलत सूचना है अगर ऐसा है भी तो पत्रकार बिरादरी को खुस होना चाहिए की रोजगार के नए अवसर मिलेगे जहा तक राजनीती और पत्रकारिता का सवाल है तो बहुत से कांग्रेसी और भाजपाई पत्रकारिता और राजनीती साथ में कर रहे है

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