झारखण्ड में पत्रकार संगठन के नाम पर दुकानदारी चलाने वाले झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन का स्वघोषित नेता शाहनवाज़ हसन ने रांची के मीडिया कर्मियों का लाखों रुपया हड़प लिया है. अपने मेहनत की गाढ़ी कमाई के लिए आधा दर्जन से भी ज़्यादा लोग परेशान हैं.
गत वर्ष शाहनवाज़ ने भोपाल से प्रसारित न्यूज़ चैनल न्यूज़ वर्ल्ड का फ्रेंचाइजी झारखण्ड में लिया था. तीन महीने काम कराने के बाद शहनवाज़ ने हरमू रोड स्थित चैनल के दफ़्तर का शटर गिरा दिया. अपने आप को पत्रकारों का नेता बताने वाला शाहनवाज़ फिलहाल गायब है.
एक सीनियर पत्रकार प्रभात जायसवाल का तीन महीने का बकाया न मिलने के कारण वह अपने पिता का इलाज ठीक से नहीं करा पाए. इसके चलते पिताजी गुजर गए. प्रभात खुद भी गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती थे तो भी उनका बकाया पैसा नहीं दिया.
शाहनवाज़ खुद को झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन नाम के एक पत्रकार संगठन की आड़ में बचा रहा है. वह इसी संगठन की आड़ में ग्रामीण पत्रकारों की आंखों में धूल झोंक रहा है. आधा दर्जन पत्रकारों सहित उन पत्रकारों का वह मुजरिम है जिन्हें उसने अपनी धूर्तता से ठगा है. जिन पत्रकारों का पैसा लेकर वह फरार है, उन पत्रकारों के नाम इस प्रकार हैं-
- सुबोध कुमार( आईटी कम कैमरामैन) छतीस हज़ार
- चंदन वर्मा (रिपोर्टर कम कैमरामैन) दस हज़ार
- राजेश कृष्ण (सीनियर रिपोर्टर) इकीस हज़ार
- प्रभात रंजन(रिपोर्टर) छतीस हज़ार
- कल्याणी सिंघल(मार्केटिंग एग्जक्यूटिव) बीस हज़ार
- मृणाल कुमार (ऑफिस बॉय) दस हज़ार
- रामेश्वरम प्रिंटर, रांची तीस हजार
- प्रभात एडवरटाइजिंग नब्बे हज़ार
- अरविंद (ब्यूरो हेड) पचहत्तर हज़ार
पत्रकार अरविंद प्रताप की रिपोर्ट. संपर्क : [email protected] , 9471584457
इन आरोपों पर पत्रकार शाहनवाज हसन का क्या कहना है, पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें-
मेरे पर आरोप लगाने वाले अरविंद गुप्ता उर्फ अरविंद प्रताप की असलियत जानें : शाहनवाज़ हसन
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Shahnawaz Haasan
July 6, 2019 at 9:26 pm
प्रिय यशवंत जी, अरविंद प्रताप उर्फ अरविंद गुप्ता मुझ से वर्ष 2016 में पहली बार मिला था।तब मैं न्यूज़ वर्ल्ड का झारखण्ड ब्यूरो था।लंबे समय से वह बेरोज़गार था और मुझ से कहीं नौकरी लगाने की गुहार लगा रहा था।मैं ने इस युवक पर तरस खाकर चैनल में न्यूज़ डेस्क देखने के कार्य पर न्यूज़ वर्ल्ड में लगवाया था।इसे जो कार्य सौंपा गया उसे पूरा करने में असक्षम रहा।इसने वर्ष 2017 सितंबर में ही किसी अन्य संस्था को जॉइन कर लिया जिसका प्रमाण मौजूद है।अरविंद गुप्ता को न्यूज़ वर्ल्ड में कार्य करते हुये 25000₹ सैलरी के रूप में अगस्त तक भुगतान किया गया जिसकी जानकारी मुझे चैनल के एकाउंट्स से मिली है।मैं इस चैनल में ब्यूरो प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था,इस चैनल का मैं मालिक नहीं था।जब जब रांची प्रेस क्लब का चुनाव समीप आता है तब तब यह इस तरह का दुष्प्रचार केवल Lime Light में बने रहने के लिये करता है।पिछले प्रेस क्लब चुनाव से पूर्व भी वह यही कर रहा था उसके बावजूद उसकी ज़मानत ज़ब्त हो गयी।स्वयं को पत्रकार बताने वाला यह व्यक्ति पंचायत चुनाव में भी अपनी ज़मानत ज़ब्त करवा चुका है।इसके विरुद्ध पत्रकारों ने दो वर्ष पूर्व ही झारखण्ड के सभी जिलों में लिखित शिकायत दर्ज करायी थी। इसके ऊपर धमकी देने का भी मामला दर्ज है,यह बदनाम करने की धमकी देकर वसूली करना चाहता था जिसका प्रमाण भी मौजूद है।इसके विरुद्ध और भी कई शिकायतें मिली हैं जिसपर कार्यवाई के लिये लिखित शिकायत दर्ज की गई है। यशवंत जी मैं चैनल का मालिक नहीं हूं एक पत्रकार एंव ब्यूरो के रूप में जुड़ा था वर्तमान में एक दैनिक समाचार पत्र में मैं राजनीतिक संपादक हूँ और मेरा कार्यक्षेत्र दिल्ली है।
Arvind Pratap
August 4, 2019 at 2:07 pm
आदरणीय यशवंत जी,
झारखण्ड की पत्रकारिता का कुख्यात नाम शाहनवाज़ हसन जो कि एक बड़ा ब्लैकमेलर है, शोषक है, पत्रकारों को लूटना जिसका पेशा है, उसने आपके पोर्टल के माध्यम से कहा है कि उसने तरस खा कर मुझे नौकरी पर रखा साथ ही कई आपत्तिजनक बातें भी कही है, तेरी औकात नहीं है शाहनवाज़ कि तू मुझे नौकरी पर रखे, तू अच्छे से जानता है कि सच क्या है फिर भी भर्म फैला रहा है। भूल गया क्या कि तब मेरे पास नौकरी के तमाम बड़े अवसर थे, इसके गवाह रांची के मेरे कई मीडिया कर्मी दोस्त भी हैं लेकिन तब मैं मीडिया हाउस को लेकर बहुत सेलेक्टिव था, बहुत आग्रह के बाद तेरे झांसे में आने के बाद मैनें ब्यूरो हेड कम समाचार सम्पादक के रूप में चैनल जॉइन किया था जिसका पत्र भी मेरे पास है।
2014 में दिल्ली से आने के बाद नक्षत्र न्यूज़ रांची में सीनियर एंकर कम एजक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में मैनें जॉइन किया था, शाहनवाज़ भी 2014/15 में रांची से प्रसारित रीजनल चैनल नक्षत्र में जमशेदपुर से स्ट्रिंगर था जिसे नफरत फैलाने के आरोप में एनआईए की टीम ने गिरफ्तार किया था भारी तादाद में सीडी कम्प्यूटर भी उसके आवास से पुलिस ने जप्त किया था, इसके बाद नक्षत्र न्यूज़ ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया था। दरअसल शाहनवाज़ जैसे लोग एक प्लानिंग के साथ, सन्गठन की आड़ में अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। मेरे द्वारा भेजे गए किसी भी सवाल का जवाब उसने नहीं दिया है। जबकि मेरे सवाल क्या थे ये आपने प्रकाशित किया है 2017 में नक्षत्र न्यूज़ बन्द हो गया, तब मेरा सेलेक्शन आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के लिए हो गया था। कशिश न्यूज़ सहित कई मीडिया हाउस से भी लगातार मुझे जॉइन करने के ऑफर आ रहे थे, कशिश न्यूज़ के ब्यूरो हेड और मेरे मित्र सुरेंद्र सोरेन इसके गवाह भी हैं। इस बीच शाहनवाज़ से मुलाक़ात हुई तब मुझे इसने बताया कि उसने भोपाल से प्रसारित न्यूज़ वर्ल्ड चैनल की उसने फ्रेंचाइजी ली है आप कुछ महीनो के लिए ब्यूरो हेड का काम अपनी टीम के साथ संभाल लीजिये। बहुत आग्रह के बाद मैंने सोचा कि चलो ठीक है किसी की मदद हो जाएगी और कुछ पत्रकारों को नौकरी भी मिल जाएगी तब मैनें अपने जानने वाले लोगों को भी एक टीम के रूप में जॉइन करा दिया। अब सर जिनके बकाए हैं वे कहने के लिए तैयार हैं कि उनका बकाया उसने रखा है तब बचता ही क्या है। न्यूज़ वर्ल्ड में जिस शख्श का पैसा लगा है उसका भी लाखों रुपये भी उसने हड़पे हैं, बहुत ही शातिर किस्म का इंसान है शाहनवाज़ जो अपने तीन चार लोगों को रखता है। सोशल मीडिया में किसी के बारे में भी उटपटांग लिखने के लिए। लेकिन सर मैं घबराने वालों में से नहीं हूं उस आदमी नें सन्गठन के नाम पर पत्रकारों को बहुत चुना लगाया है और आज भी लगा रहा है। मेरे पास उसके सारे प्रमाण पत्र और गवाह भी हैं जिसके आधार पर यह साबित कर दूंगा की उसने पत्रकारों को कितना शोषित किया है। सर ऐसे बहरूपियों का सच सामने लाना बहुत ज़रूरी है और आपने उस इंसान के सच को सबके सामने लाकर उसे नँगा कर दिया है। उसकी तिलमिलाहट स्पष्ट झलक रही है। उसके गुर्गे भी गुर्रा रहे हैं ये आप भी देख रहे हैं। मै दावा करता हूं कि मेरे खिलाफ लगाए गए उसके सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उसने तो पैसों के उन बकायों के बारे में तो ज़िक्र तक नहीं की जिनका वह हक मार कर बैठा है, स्पष्ट है सर, सच सामने आने के बाद बौखलाया वह इंसान केवल मुझे टारगेट करता रहा। जबकि सर मेरा पत्रकारिता जीवन खुली किताब की तरह है। 2010 में दिल्ली से मास कॉम करने के बाद सुदर्शन न्यूज़, जीएनएन, आईबीएन के बाद रांची में नक्षत्र न्यूज़, न्यूज़ वर्ल्ड, कशिश न्यूज में काम किया उसके बाद अभी डीडी किसान रांची के साथ साथ एफ़एम रेनबो रांची में आरजे के साथ साथ राष्ट्रीय खबर और गाँव कनेक्शन के लिए भी लिख रहा हूं, झारखण्ड का एक जाना माना वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी हूँ, रांची लॉयन्स क्लब के स्पोकपर्सन भी हूं। रांची के बड़े हर सामाजिक गतिविधियों में शामिल भी रहता हूं। शाहनवाज़ ने लिखा है कि पंचायत चुनाव में मेरी ज़मानत जप्त हुई थी, तो शाहनवाज़ पहले नालेज ले ले मुझसे और तुम्हे बता दूं कि मैनें पंचायत नहीं बल्कि नगर निकाय के लिए चेयरमैन का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था और बीजेपी की सुनामी के बाद भी दूसरे स्थान पर रहा था और यह सब निर्वाचन आयोग के वेबसाइट पर भी दर्ज है वेबसाइट खोलने आता है तो देख लेना झारखण्ड निकाय चुनाव का रिजल्ट, झारखण्ड का इकलौता पत्रकार था मैं जिसने निकाय चुनाव में इतनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी, तूने जिस रांची प्रेस क्लब के चुनाव की बात कर रहा है उसका भी डिटेल देख लेना बेटा की में किस स्थान पर था, पत्रकार भाइयों को मैं बताना चाहता हूँ कि मैं प्रेस क्लब के महासचिव पद से भी चुनाव लड़ चुका हूं जिसमें भी मुझे चुनाव में खड़े अन्य 30 साल से भी ज्यादा अनुभवी सम्पादक प्रत्याशियों के बनिस्पत सम्मान जनक वोट मिले थे तीसरे स्थान पर था मैं, इसका भी वेबसाइट देख लेना शाहनवाज़। शाहनवाज़ हसन प्रेस क्लब के मेंबर बनने के लिए नाक रगड़ रहे हो न तुम, तमाम पैरवी और दबाब के बाद भी तुम जैसे दागी को प्रेस क्लब रांची की मेम्बरशिप नहीं मिली यह सब काफी है यह साबित करने के लिए कि तुम कितना गया गुजरा इंसान है। इसकी पुष्टि भी तमाम पत्रकार मित्र कर सकते हैं और सुन ले शाहनवाज़ तेरी गीदड़ भभकीयों से अरविंद प्रताप डरने वाला नहीं है, जब तक तुम सबके पैसे नहीं देता तेरे साथ मेरी आर पार की लड़ाई जारी रहेगी, तेरे कलेजे पर मूंग दलता रहूंगा। जहां छिप जा तुझे हम ढूंढ निकालेंगे। वैसे भी मजलूम पत्रकारों की तुझे है जरूर लगेगी। जिस चीफ सेक्रेटरी के साथ तस्वीर खिंचवाकर डाला डाला है न उसकी सच्चाई भी लोगों को पता है कि कैसे तुमने फ़र्ज़ी तरीके से झूठ बोलकर उनका अपॉइंटमेंट लिया है। यह सब मुझे सीएस के ओएसडी और मेरे मित्र बता चुकी हैं जिन्होंने तुम्हे उनसे मिलवाया था, दुबारा मिलकर दिखा देना। हिम्मत है तो सामने आकर बात कर न भाई। चूहे की तरह बिल में काहे घुसा है।
सच ऐसे ही सामने लाते रहिये यशवंत जी आपका हृदय से आभार।
श्यांश
July 6, 2019 at 10:19 pm
अरविंद प्रताप पिछले 2 वर्षों से ऐसा दुष्प्रचार कर रहा है।शाहनावज़ हसन चैनल के ब्यूरो प्रमुख थे मालिक नहीं,शाहनावज़ जी के माध्यम से नौकरी पाने के बाद झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन में वह प्रदेश संयुक्त सचिव के पद पर आसीन होकर अपनी मनमानी चलाना चाहता था जब उसकी नहीं चली तो वह रजत गुप्ता के पत्रकार संगठन में जुड़ गया।न्यूज़ वर्ल्ड में मैं भी जिला ब्यूरो के रूप में कार्य कर रहा था उसकी यह सूचना पूरी तरह निराधार है।केवल प्रेस क्लब के चुनाव के लिये वह इस तरह का दुष्प्रचार कर रहा है।उसके विरुद्ध सभी जिलों में शिकायत भी दर्ज है।
Arvind
August 21, 2019 at 3:32 pm
कौन है रे भाई तुम श्यांश, सामने आ कर बात कर। तूझे तो जानता भी नहीं हूँ। अच्छा तो तू शाहनवाज़ की डिजिटल पैदाइश है। समझ गया तो तू है फ़र्ज़ी वाला श्यांश। चल हवा आने दे।
Sanju
July 6, 2019 at 10:22 pm
अरविंद प्रताप उर्फ़ अरविंद गुप्ता न्यूज़ वर्ल्ड और झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन में एक षड्यंत्रकारी के रूप में जुड़े थे।अरविंद गुप्ता को JUJ के अध्यक्ष रजत गुप्ता ने षड्यंत्र रचने के लिये ही भेजा था।जब वह इसमें असफ़ल रहे तो वह ऐसा दुष्प्रचार केवल प्रेस क्लब के चुनाव लड़ने के लिये करने लगे।प्रेस क्लब के चुनाव में ज़मानत ज़ब्त होने के बाद वह पंचायत चुनाव में भी अपनी ज़मानत ज़ब्त करवा बैठे।शाहनावज़ हसन चैनल के ब्यूरो प्रमुख थे और मैं धनबाद जिला ब्यूरो प्रमुख था, शाहनावज़ जी मालिक नहीं थे।उस मक्कार और जालसाज़ व्यक्ति के कारण कई पत्रकार बेरोज़गार हो गये, वह स्वयं तो हर महीने 25000₹ लेता रहा पर किसी अन्य पत्रकार की चिंता कभी नहीं की।वह केवल शब्दों से खेलना जानता है।उसके विरुद्ध कई जिलों में शिकायत दर्ज है।
Arvind Pratap
August 4, 2019 at 2:19 pm
सही कहा आपने, उसपर केस भी चल रहा है और जेल भी गया था। एनआईए ने उसे तब जमशेदपुर से गिरफ्तार किया था। उसके घर से भारी संख्या में सीडी, फ्लॉपी और कम्प्यूटर जप्त किया गया था, इसका वीडियो भी वायरल है। उस समय नक्षत्र न्यूज़ में वह स्टिंगर था, इस घटना के बाद चैनल ने धक्का मार कर उसे बाहर कर दिया था।
हिमांशु सिंह
July 6, 2019 at 10:46 pm
श्रीमान,गंगा मेंं किचड उछालने से गंगा गंदा नहीं होती।खुद गंदगियां फेकने वाले व फैलाने वाले गंदा होतें हैं।आपको शहनाज हसन क्या हैं वो बताना चाहता हूं।जाकर पुछो उस अबला विधवा औरत से बुढे माता पिता से अनाथ बच्चों से जिसके पिता,पति व बेटा कलम के सिपाही सच्चाई लिखने मेंं अपनी आहुति दी है।उनका मात्र एक आशा कि किरण शहनवाज हसन है।आंचलिक पत्रकारों को बताने की जरूरत नहीं है शहनवाज हसन के बारे मेंं।तुम जैसों को दुकानदारी नहीं चलने दिया गया।तो दुष्प्रचार करना शुरु कर दिया।पहले अपनी गिरेबान झांक कर देखो।आंचलिक पत्रकारों के यान शान बान हैं शहनवाज हसन।
rajesh murmu
July 10, 2019 at 9:17 pm
शहनबाज हसन पर जमशेदपुर में कोई केस भी चल रहा है न , शायद देशद्रोह का ?
Arvind Pratap
August 4, 2019 at 2:13 pm
सही कहा आपने, उसपर केस भी चल रहा है और जेल भी गया था। एनआईए ने उसे तब जमशेदपुर से गिरफ्तार किया था। उसके घर से भारी संख्या में सीडी, फ्लॉपी और कम्प्यूटर जप्त किया गया था, इसका वीडियो भी वायरल है। उस समय नक्षत्र न्यूज़ में वह स्टिंगर था, इस घटना के बाद चैनल ने धक्का मार कर उसे बाहर कर दिया था।
हिमांशु सिंह
July 6, 2019 at 10:50 pm
अरविंद प्रताप उर्फ़ अरविंद गुप्ता पिछले 2 वर्षों से दुष्प्रचार कर रहा है।शाहनावज़ हसन चैनल के मालिक नहीं ब्यूरो प्रमुख थे,हज़ारों करोड़ के चैनल के मालिक शाहनावज़ हसन कैसे हो सकते हैं ? चैनल में उन्हें ब्यूरो के रूप में रखा गया था।शाहनावज़ जी के माध्यम से नौकरी पाने के बाद झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन में वह बार बार गिड़गिड़ा कर पद देने की मांग करने लगा,एक षड्यंत्र के तहत वह न्यूज़ वर्ल्ड और झारखण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन से जुड़ा था।वह अपनी मनमानी चलाना चाहता था जब उसकी नहीं चली तो वह रजत गुप्ता के पत्रकार संगठन में जुड़ गया।कभी पंचायत चुनाव लड़ता है कभी दूसरों को धमकी देता है यही उसका असली चाल चरित्र है।
Arvind Pratap
August 2, 2019 at 6:13 pm
शाहनवाज़ के कुत्तों तुम्हें जितना भौंकना है भौंक लो. बुल्कुल जाहिलियत से भरी है तुम सबों की भाषा, उसकी असलियत जब सामने आएगी तो तुम किसी लायक नहीं रहोगे और हाँ अगर मुझसे मिलने की तमन्ना हो तो रांची आ जाओ आँखों में आँखें डाल कर बात करने, आ जाओ बैठ कर बात करते हैं, देखते हैं तुम जैसे सड़क छापों में कितना दम है, सबूत के साथ सच्चाई बताउंगा वैसे अंधभक्ति से बाहर निकलो तो अच्छा रहेगा। वैसे तुम जैसों लोगों के तो मैं मुंह भी नहीं लगना चाहता जो तरफदारी कर रहे हों पत्रकारों के शोषक का, लेकिन एक मौक़ा दे रहा हूं और हां केस तो मैं तुम जैसे गंवारों पर करूंगा जिन्हें लिखने की भी तमीज़ नहीं है. जब भी आओ तो इस नंबर पर बात कर लेना- 9471584457
Rajesh Kumar
August 3, 2019 at 6:05 pm
आदरणीय यशवंत सर ,
आपके भड़ास न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से मैं यह बताना चाहता हूँ की जिन नामों का जिक्र हमारे आदरणीय अरविन्द जी ने किया है जिनका बकाया है, उनमें मेरा भी नाम है मैं बताना चाहता हूँ की काम कराने के बाद भी शाहनवाज़ ने हमें भ्र्म में रखा बार बार मांगने के बाद भी पैसा नहीं दिया, पत्रकार भाई अंदाजा लगा सकते हैं कि किसी भी पत्रकार को 3 महीने की सैलरी न देकर चैनल बंद कर दिया जाए तो उसका क्या हाल होगा। हम लगातार सैलरी मांगते और पत्रकारों का कथित नेता बन शहनवाज़ हमें बरगलाता रहा पैसों की मध्यस्थता के लिए रांची के एक प्रमुख अखबार के सम्पादक ने हमारी मीटिंग भी लालपुर के इलाके में कराई, ईद के बाद पैसा देने का वादा करके शहनावा ज़ ने कभी हमें पैसा नहीं दिया। इस मसले की जानकारी के लिए पत्रकार मित्र उक्त संपादक महोदय से इस नंबर पर बात भी कर सकते हैं 9523351595. जिस अरविन्द जी के बारे में शाहनवाज़ और उसके चमचों ने उटपटांग लिखा है उनके बारे में वे कुछ नहीं जानते की वे कौन हैं, शाहनवाज़ का तो उनके सामने खड़े होने की भी हैसियत नहीं है. जमशेदपुर में नफरत फैलाने के आरोप में शाहनवाज़ जेल भी जा चुका है और अपने कुकर्मों से बचने के लिए वह संगठन की आड़ में रहता है, इसकी पुष्टि भी यसवंत जी जमशेदपुर पुलिस या वहां के पत्रकारों से किया जा सकता है. उसका विडिओ भी है हमारे पास. शाहनवाज़ हसन के चमचों अपने मुगालते से बाहर निकलो और हिम्मत है तो सामने आकर बात करो बुजदिल की तरह क्यों बात करते हो. या उस चोर और फरेबी शाहनवाज़ से पूछो की पैसे बकाये की बात सच है या झूठ, क्या अपना हक मांगना गुनाह है? क्या अपने हक के लिए आवाज़ उठाना गुनाह है? अगर है तो हम हरगिज अपना हक नहीं छोड़ने वाले शाहनवाज़ को पत्रकारों का बकाया पैसा देना ही होगा।
Arvind
August 21, 2019 at 3:39 pm
अबे शाहनवाज़ के फ़र्ज़ी डिजिटल पैदाइश बेटा संजू, जरा निर्वाचन आयोग, गूगल और प्रेस क्लब के वेबसाइट चेक कर ले जा। उससके बाद बात करना कि अरविंद गुप्ता उर्फ प्रताप कौन है।
Santosh kumar
September 9, 2019 at 11:07 pm
बेहद संजीदगी से मैं सभी पोस्ट पढा. अरविंद प्रताप पर जितने मनगढ़ंत आरोप यह शहनवाज हसन नामक बहरूपिया लगा रहा है वो बिल्कुल तथ्य विहीन और निराधार है. ये बहरूपिया मेरे जमशेदपुर से जी बिलॉन्ग करता है. बेहद शातिर दिमाग का प्रयोग करके पहले सामनेवाले को विश्वास में लेता है उसके बाद उसका शोषण करता है. इस रंगीन लोमड़ी का शिकार अगर सबसे अधिक कोई हुआ है तो वह मैं हूं. इस कमीने ने मेरे पूरे पत्रकारिता करियर को दांव पर लगा दिया. इसकी वजह से जमशेदपुर के पत्रकार मुझे आतंकवादी का सहयोगी कह कर पुकारते हैं. अपने साथ बैठने नहीं देना चाहते जबकि इस साले से मैं 3 साल पहले ही अलग हो गया, लेकिन अब तक मेरा पाप नहीं धुल सका. झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के नाम पर यह साला दुकानदारी चलाता था और हम लोगों से दलाली करने को कहता था. इतना बड़ा कमिना धरती पर शायद पत्रकारिता जगत में दोबारा पैदा ना हो. साला न्यूज़ वर्ल्ड के नाम पर (मेरे कमाई का पहला नैनो कार जो बड़ी जतन से मैंने खरीदे थे) इसने बर्बाद कर दिया. 5 महीना फोकट का न्यूज़ वर्ल्ड में खटवाया पांच देने के बदले 5 लाख का चूना लगा गया. बहुत बड़ा भेड़िया है ये. अभिजीत अधरजी नाम का एक गरीब पत्रकार को अपना कैमरामैन बनाकर जमशेदपुर में रखा था, ये साला उसका पैसा भी खा गया. संगठन की आड़ में बहुत घिनौना काम यह कर रहा है ये. इसको जमशेदपुर से तो बेदखल कर ही दिए दिमाग लगाकर इस साले को रांची से भी खदेड़ने का प्रयास कीजिए. सबको यही कहता है कि उसको हम नौकरी पर रखे हैं… वह मेरा चेला है.. वह शराब पीकर लुढ़का रहता था… मतलब धरती का सबसे शरीफ इंसान यही है. बहुत पत्रकारों का यह कैरियर खाया है. ये अपने आगे किसी की नहीं सुनता, जबकि ये कभी पत्रकार बन ही न सका. जमशेदपुर आता है तो अपने चेलों के माध्यम से गेस्ट हाउस को बुक कराकर रहता है. जबकि साले का अपना बपौती घर जमशेदपुर में है. इसको वहां भी घुसने नहीं दिया जाता.