पीआईबी कार्ड में बंदरबांट

काम सीईओ का, कार्ड संपादक का…यह है पीआईबी… पत्र सूचना कार्यालय पत्रकारों को मान्यता देने के मामले में वैसे तो कागज पर कागज मांगती है। कभी नियुक्ति पत्र तो कभी किसी भी साल का अलग से विवरण। इन कारणों से कई पत्रकारों को मान्यता मिलने में बहुत देरी होती है। लेकिन जिसे मान्यता देनी होती है, उसके लिए नियमों को किनारे रखने में देरी नहीं लगायी जाती है।

ऐसा ही एक मामला संसद के राज्य सभा टीवी में काम करने वाले एक अधिकारी का आया है जो काम तो प्रशासनिक करता है लेकिन पीआईबी कार्ड संपादक के तौर पर बना दिया गया है। इस कार्ड की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इसके द्वारा किसी भी मंत्रालय में बिना पास बनवाए प्रवेश किया जा सकता है और कहीं भी जाया जा सकता है।

संसद के राज्य सभा टीवी में मनोज कुमार पांडेय की नियुक्ति चीफ इक्जीक्यूटिव आफिसर के तौर पर 31 मई 2019 को की गयी थी। उन्होंने उसी दिन प्रसार भारती के सीईओ शशिशेखर वेंपती से चार्ज लेकर कामकाज आरंभ कर दिया। वेंपती को सीईओ का जिम्मा अतिरिक्त प्रभार के रूप में मिला था। राज्य सभा टीवी में प्रधान संपादक के रुप में राहुल महाजन काफी पहले से काम कर रहे हैं जबकि उनके बाद कार्यकारी संपादक के रूप में विभाकर की भी नियुक्ति हुई है।

पीआईबी संपादकों या संवाददाताओं को मान्यता देने के मामले में बहुत अधिक पड़ताल करके कदम उठाता है। लेकिन इस मामले में सरकारी अधिसूचना के बाद भी मनोज कुमार पांडेय को संपादक का कार्ड जारी कर दिया गया ( देखें पीआईबी सूची में 66 नंबर)। इस बात की भी जानकारी मिली है कि उनकी पुलिस जांच संबंधी कार्यवाही भी नहीं की गयी। चूंकि वे खुद सूचना सेवा के अधिकारी रहे हैं, इस नाते उनके मामले में पक्षपात किया गया है यह बात साफ तौर पर समझ में आ रहा है।

वैसे तो पीआईबी की मान्यता मिलना आज के जमाने में बहुत कठिन काम हो गया है। इसके लिए काफी कड़ा नियम बना है और कमेटी में भी मामला जाता है। इस कमेटी में एसोसिएशनों के प्रतिनिधि होते हैं लेकिन इसमें कैसे काम हो रहा है इससे पता चलता है।

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One comment on “पीआईबी कार्ड में बंदरबांट”

  • भानप्रकाश says:

    PIB में सिंडिकेट है पता नहीं कैसे काम कर्ता जो लोग जैनुअन है उनको कार्ड नहीं देता या उनकी फाइनल गायब कर देता है या उनको परेशान पर परेशान कर्ता रहता है। और कहता रहता अगले हफ्ते मिल जायेगा ऐसे ही टरकाता रहता है यहाँ कौन मालिक है पता नहीं मैने 2019 में एपलाई किया था आज तक नहीं मिला जब भी जाता हु एक मैडम हैं जो देखती हैं कहती हैं अगले हफ्ते मिल जायेगा अब पता नहीं चल रहा अगला हफ्ता कब आएगा। भगवान् मालिक ईस पीआईबी का पता क्या रैकेट चलता है।

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