वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पीहू’ 28 सितंबर को होगी रिलीज, पहला आफिसियल पोस्टर जारी

वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पीहू’ 28 सितंबर को रिलीज हो रही है. इस फिल्म का पहला आफिसियल पोस्टर रिलीज कर दिया गया है. पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी ने ये पोस्टर सोशल मीडिया पर जारी किया जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं. पीहू फिल्म रिलीज से पहले ही काफी चर्चा बटोर चुकीहै. यह फिल्म देसी-विदेशी कई एवार्ड भी पा चुकी है.

मोरक्को के जगोरा में 14वें ट्रांस-सहारा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म ने दो अवॉर्ड जीते. फिल्म ने तीन दिसंबर को संपन्न हुए महोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म जीता और सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पीपुल्स च्वाइस अवॉर्ड भी जीता. फिल्म ‘पीहू’ अब तक ईरान, वैंकूवर, पाम स्प्रिंग्स, मोरक्को और जर्मनी के फिल्म समारोहों में अपनी धूम मचा चुकी है.

इसे न सिर्फ फिल्म की कहानी के लिए सराहा गया बल्कि दो वर्ष की मायरा के अभिनय ने भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया. ‘पीहू’ पिछले वर्ष इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में इंडियन पैनोरमा श्रेणी में भी सेलेक्ट हुई थी. जहां दर्शकों ने फिल्म की संवेदनशीलता के लिए उसे काफी पसंद किया था.

फिल्म के डायरेक्टर विनोद कापड़ी का कहना है- ”यह एक सिंगल कैरेक्टर वाली फिल्म है जिसकी पात्र भी महज दो साल की बच्ची है. यह फिल्म राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव के गलियारे में धूम मचा चुकी है, जो हम सबके लिए बेहद खास है. सिनेमाहाल / थिएटर जाकर फिल्म देखने वालों की तारीफ इस फिल्म को मिलेगी, ये उम्मीद है.”

Vinod Kapri

निर्देशक विनोद कापड़ी ने बीते साल 2017 में ही यह फिल्म बना कर तैयार कर दिया था. कई न्यूज चैनलों के प्रधान संपादक रह चुके विनोद कापड़ी ने ‘मिस टनकपुर हाजिर हों’ से हिन्दी सिनेमा में पदार्पण किया था. उनकी एक डॉक्यूमेंट्री ”Can’t Take This Shit Anymore” के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.

उत्तराखण्ड की रहने वाली प्रेरणा की नन्ही बेटी पीहू पर आधारित ये फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है. पीहू’ एक सामाजिक थ्रिलर फिल्म है, जिसकी कहानी दो वर्षीय एक बच्ची के इर्द-गिर्द घूमती है. यह बच्ची विचित्र स्थितियों में फंस जाती है. फिल्म 2 साल की बच्ची पीहू की कहानी कहती है जो सुबह से लेकर शाम तक लगभग 12 घंटे की उसकी अन्तः मन की उथल पुथल और उसके क्रियाकलापों के जरिये आगे बढ़ती है.

परिवार के सदस्यों के बीच कम्यूनिकेशन गैप के कारण नए स्वरूप में जिस प्रकार की स्थिति आज परिवारों में उत्पन्न हो रही है उस ओर पीहू की कहानी सचेत करती है. पीहू को उसके माता पिता एक घर में अकेले छोड़ कर चले जाते है ऐसे में वह काफी वक्त घर पर अकेले रहती है. वह क्या क्या करती है और किन किन मुसीबतों में फंसती है इसका जिक्र ही फिल्म का मूल संदेश है. फिल्म का एक ही दृश्य जिसमें छोटी बच्ची मायरा फ्रिज से सामान निकालते निकालते खुद को उसमें बंद कर लेती है, इसके बाद फ्रिज का दरवाजा नहीं खुलता. आपके रोंगटे खड़े कर देगा.

माना जा रहा है कि विनोद कापड़ी की ये फिल्म पीहू एक बड़ी हिट साबित होगी.

#PIHU

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