अनूप की याचिका पर हाईकोर्ट ने फर्जी सर्कुलेशन दिखाने वाले अखबारों की जानकारी मांगी

लखनऊ में भ्रष्‍ट पत्रकारिता के खिलाफ लगातार आंदोलन छेड़ने वाले पत्रकार अनूप गुप्‍ता की पहल फर्जी सर्कुलेशन दिखाने वालों पर भारी पड़ने वाली है. श्री गुप्‍ता ने बड़े-छोटे अखबारों के गलत सर्कुलेशन दिखाए जाने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पिछले साल एक पीआईएल दायर की थी. लखनऊ बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र व राज्‍य सरकार से उनके सूचना विभाग के माध्‍यम से दस दिन के अंदर सारी जानकारी मांगी है.

अनूप ने हाई कोर्ट को बताया था कि तमाम अखबार केवल हलफनामा दाखिल करते हुए फर्जी सर्कुलेशन दिखाते हैं तथा सूचना विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके सरकारों से विज्ञापन के जरिए बड़ी कमाई करते हैं. इसके चलते जनता की मेहनत का पैसा पत्रकारिता को धंधेबाजी बनाने वालों की जेबों में जा रहा है. उल्‍लेखनीय है ऐसे अखबारों को दिए जाने वाले विज्ञापनों में से कमीशन का एक बड़ा हिस्‍सा सूचना विभाग के लोगों के बीच भी बंटता है, लिहाजा फर्जी सर्कुलेशन दिखाए जाने के खेल में कोई जांच नहीं की जाती है.

श्री गुप्‍ता की याचिका पर जस्‍टिस इम्तियाज मुर्तजा एवं एसएन शुक्‍ला की पीठ ने राज्‍य सरकार के सूचना विभाग से जानकारी तलब की है. केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी पूरी जानकारी मांगी गई है. आरोप है कि करीब 1500 से ज्‍यादा अखबार एवं पत्र-पत्रकाएं हैं, जो गलत प्रसार दिखाकर सरकारी धन की लूट कर रहे हैं. इस गोरखधंधे के चलते लगभग डेढ़ अरब रुपए का चूना सरकार को लग रहा है. याची ने कोर्ट से निवेदन किया था कि इस बड़ी धांधली की जांच कराई जानी चाहिए. 

सरकार की तरफ से बताया गया है कि 23 फरवरी 2012 को राज्‍य के सूचना सचिव ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर सर्कुलेशन की जांच किए जाने की मांग की थी. कोर्ट ने केंद्र एवं राज्‍य दोनों से दस दिन के बारे में सारी जानकारी उपलब्‍ध कराने को कहा है. कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के सूचना विभाग तथा फर्जी सर्कुलेशन दिखाकर लाखों रुपए के विज्ञापन, राज्‍य मुख्‍यालय की मान्‍यता तथा आवास प्राप्‍त करने वाले लोगों में हड़कंम्‍प मचा हुआ है.

याची श्री गुप्‍ता का आरोप है कि अभी तक यह व्‍यवस्‍था रही है कि अखबार संचालित करने वाला हलफनामे के माध्‍यम से गलत सर्कुलेशन दिखाकर ऊंचे दर पर विज्ञापन दर तय करा लेता है. अनूप कोर्ट जाने पहले पत्रकारिता के माध्‍यम से भ्रष्‍ट पत्रकारों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए हुए हैं. जनहित याचिका दायर करके उन्‍होंने कानूनी तरीके से भी मीडिया के भीतर भ्रष्‍टाचार करने वालों को निशाने पर लिया है. अनूप की तरफ से अधिवक्‍ता रोहित त्रिपाठी ने पक्ष रखा जबकि सरकार की तरफ से अपर मुख्‍य स्‍थाई अधिवक्‍ता एचके भट्ट ने पैरवी की.

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Comments on “अनूप की याचिका पर हाईकोर्ट ने फर्जी सर्कुलेशन दिखाने वाले अखबारों की जानकारी मांगी

  • RNI के अनुसार दिल्ली से सर्वाधिक प्रकाशित होने वाली हिन्दी के लघु समाचारपत्र “राष्ट्रवादी टाइम्स” है.यह अखबार दावा करती है की वह “अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्क,देश हित और जनकल्याण के प्रति समर्पित” परन्तु यह उतना ही बड़ा झूठ है जितना बड़ा सच यह है की यह सिर्फ उसी दिन प्रकाशित होती है जिस दिन सरकारी विज्ञापन आता है और वो भी 5-10 प्रतियां.इसके संपादक राम शकल तिवारी ऐसे आत्ममुग्ध आदमी हैं जो बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं,परन्तु इनके राष्ट्रवादी चरित्र तब दरकने लगता है जब इनसे बात-चीत आगे बढती है.इस खोल से निकलते ही यह महाभोज के दा साहेब की तरह की दिखाई देते हैं.एक व्यापारी जिसने अखबार के व्यापार को कमीशन और ब्लैकमेल का धंधा बना रखा है.दिल्ली में DAVP के सरकारी बाबुयों को खरीद कर कैसे अपना विज्ञापन लिया जाता है,यह इनको मालूम है.नाम में राष्ट्रवादी लगा लेने से कोई अखबार राष्ट्रवादी नहीं हो जाता है.यह गोरखधंधा इन जैसे काले जादूगरों के कारण बदनाम होता जा रहा है.

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  • मैं हिन्दी के लघु समाचार पत्रों पर शोध कर रहा हूं,इन घटिया लोगों ने बदनाम कर दिया है.

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  • prabhat tripathi says:

    Anup ne kam acha kiya.lakin anup bhi ek magzine drashthant publish karte hain.ushme publish hone wale govt ad commercial ad kaha se aate hain iski bhi jaanch honi chaiye.pil karne wale ko khud double standard nahi hona chaiye.khud govt ka house niralanager lucknow me kis hasiyat se liye hain.court ko bataye?

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  • Good Work… , LIU ki farji report ke aadhar per di jane wali press manyata ke liye bhi kuch kiya jana chahiye..- ye aarthik hi nahi desh ki suraksha se bhi juda mamla he..!

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