Paid news in India and underpaid media employees

Whenever India runs an electoral battle, the ‘paid news’ syndrome in radio and television continues to haunt the general populace, as well as the election authority. A number of cases are already registered against various political parties for allegedly bribing some selected media houses of the largest democracy in the world or for facilitating campaign related favourable coverage in expenses of cash (or kind).

प्रिंट एंड इलेक्ट्रानिक्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ से 21 पत्रकारों का इस्तीफा

अंबाला : यहां के पत्रकारों की संस्था ‘प्रिंट एंड इलेक्ट्रानिक्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की आपसी फूट अब खुलकर सामने आने लगी है। 21 पत्रकारों ने एसोसिएशन से इस्तीफा दे दिया है। 

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: अखबारों-टीवी की विज्ञापन नीति और नैतिक मापदंडों के लिए मदद करें : बड़े नाम के किसी भी अखबार और पत्रिका को उठा लीजिए, मजीठिया वेतन बोर्ड आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पत्रकारों को वेतन देने में बहानेबाजी कर रहे अखबार मालिकों की माली हैसियत सामने आ जाएगी। लेकिन इनके अखबारों में विज्ञापनों की इतनी भरमार रहती है कि कभी तो उनमें खबरों को ढूंढना पड़ता है। लेखकों को दिए जा रहे पारिश्रमिकों की हालत यह है कि सिर्फ लेख लिखने के दम पर गुजारा करने की बात सोची नहीं जा सकती। हमारे देश में सिर्फ एक अखबार या पत्रिका में लेख या स्थायी स्तंभ लेखन के जरिए गुजारे की कल्पना करना, उसमें भी हिन्दी भाषा में, असंभव है।

7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

New law needed to govern salary in print media : Ravindra Kumar

New Delhi: Outgoing president of Indian Newspaper Society (INS) Ravindra Kumar today (Friday) said a new law is required to govern salary and other issues relating to print media and called the wage boards “life-threatening disease” as their recommendations have put a “crippling burden” on the industry. In his Presidential address at the 75th annual general meeting of INS, Kumar said implementation of recommendations of the Majithia Wage Board has badly hit all newspaper establishments and urged the government to do away with them.

अनूप की याचिका पर हाईकोर्ट ने फर्जी सर्कुलेशन दिखाने वाले अखबारों की जानकारी मांगी

लखनऊ में भ्रष्‍ट पत्रकारिता के खिलाफ लगातार आंदोलन छेड़ने वाले पत्रकार अनूप गुप्‍ता की पहल फर्जी सर्कुलेशन दिखाने वालों पर भारी पड़ने वाली है. श्री गुप्‍ता ने बड़े-छोटे अखबारों के गलत सर्कुलेशन दिखाए जाने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में पिछले साल एक पीआईएल दायर की थी. लखनऊ बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र व राज्‍य सरकार से उनके सूचना विभाग के माध्‍यम से दस दिन के अंदर सारी जानकारी मांगी है.