जवाहर सरकार ने ‘प्रचार भारती’ कहा तो ‘प्रसार भारती’ के मीडियाकर्मी भड़के, देखें प्रेस रिलीज

प्रसार भारती सरकारी हाथी है. जिसकी सरकार सेंटर में होती है, उसके गुण गाता है. प्रसार भारती के सीईओ से लेकर यहां कार्यरत ज्यादातर कर्मी भी बहती गंगा में हाथ धो लेते हैं.

मोदी राज में प्रसार भारती को लेकर भी यही कहानी है. इसे सरकारी भोंपू कहा जाता है. पहले की सरकारों के राज में भी इसे सरकारी भोंपू कहा गया.

दंगों को लेकर प्रसार भारती के सीईओ शशिशेखर वेंपति ने बीबीसी पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगा दिया. प्रसार भारती की नीतियों को लेकर इस संस्था के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार ने इसे ‘प्रचार भारती’ का नाम दे दिया.

अब प्रसार भारती में काम करने वाले पत्रकारों ने एक प्रेस रिलीज जारी कर जवाहर सरकार के वक्तव्य की निंदा की है.

जाहिर है, प्रसार भारती के लोग निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से बात रखने की जगह सरकार की मुंहदेखी करने-कहने में लगे हैं और इसे हर कोई समझ भी रहा है.

देखें प्रेस रिलीज-

प्रेस विज्ञप्ति

नई दिल्ली : प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार की एक टिप्पणी को लेकर प्रसार भारती के सौ से ज्यादा कर्मचारियों और पत्रकारों ने कड़ी निंदा की है। जवाहर सरकार ने अपनी एक टिप्पणी में प्रसार भारती को प्रचार भारती कहा है।

जवाहर सरकार ने यह टिप्पणी प्रसार भारती के मौजूदा सीईओ शशिशेखर वेम्पति के एक कदम पर की है। दरअसल बीबीसी के एक निमंत्रण को ठुकराते हुए शशिशेखर वेम्पत्ति ने दिल्ली दंगों की एक तरफा रिपोर्टिंग पर ध्यान दिलाया था। शशिशेखर बीबीसी का आमंत्रण ठुकराते हुए उसे दिल्ली दंगों की एकतरफा रिपोर्टिंग और बहुत हद तक फेकन्यूज फैलाने के लिए नसीहत दी थी। इस चिट्ठी में श्री वेम्पति ने जान जोखिम में डालकर ड्यूटी निभा रहे महिला और पुरूष पुलिसवालों के खिलाफ भड़काऊ रिपोर्टिंग पर बीबीसी समेत अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर सवाल उठाया था।

फरवरी के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में हुई हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने एकतरफा, भड़काऊ भारत विरोधी रिपोर्टिंग की और बहुत हद तक फेक न्यूज़ फैलाई। और इनमें बीबीसी भी शामिल था। इस संदर्भ में जब प्रसार भारती के सीईओ श्री शशिशेखर वेम्पति ने बीबीसी के एक निमंत्रण को ठुकराते हुए उसकी एकतरफा रिपोर्टिंग की तरफ ध्यान दिलाया और विशेषकर अपनी जान जोख़िम में डालकर ड्यूटी दे रहे वर्दीधारी पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के खिलाफ भड़काऊ रिपोर्टिंग पर आपति जताई तो जवाहर सरकार ने इसकी आलोचना की।

अपने पूर्व सीईओ की आलोचना से आहत प्रसार भारती के कर्मचारियों और पत्रकारों का कहना है कि प्रसार भारती के सीईओ का बयान उन पत्रकारों/ कर्मचारियों के लिए गर्व का विषय है। कर्मचारियों और पत्रकारों ने जवाहर सरकार के बयान की निंदा करते हुए कहा है कि वे यह कैसे भूल सकते हैं कि दिल्ली की हिंसा में कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा ने अपनी जान गंवाई और सैंकड़ों पुलिसकर्मी घायल हुए। जिनमें से कुछ की हालत अब भी बेहद गंभीर है। प्रसार भारती के पत्रकारों और कर्मचारियों का कहना है कि बीबीसी ने दिल्ली हिंसा की रिपोर्टिंग करते हुए जानबूझ कर इन सब तथ्यों को नज़रंदाज़ किया।

अपने निंदा प्रस्ताव में प्रसार भारती के कर्मचारियों और पत्रकारों ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्य की बात है कि जब प्रसार भारती के वर्तमान सीईओ ने भारत के हक में इस मुद्दे पर अपना रूख साफ किया तो प्रसार भारती के पूर्व सीईओ श्री जवाहर सरकार ने बजाय इस मुद्दे पर देश के साथ और प्रसार भारती के साथ खड़े होने के उन्होंने प्रसार भारती को प्रचार भारती कह कर उस संस्था का अपमान किया जिसके वे खुद मुखिया रहे। अत: हम प्रसार भारती के सभी पत्रकार/कर्मचारी इस कृत्य के लिए श्री जवाहर सरकार की कड़ी भर्त्सना करते हैं।

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