प्रशांत किशोर का काला सच

बाएं लेखक राजीव सिंह जादौन और दाएं शाश्वत गौतम

Rajeev Singh Jadaun : कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक शाश्वत गौतम ने सो कॉल्ड चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और अपने एक पूर्व सहयोगी पर पाटलीपुत्रा थाना में धोखाधड़ी का और पटना सिविल कोर्ट में वॉयलेशन ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है। शाश्वत गौतम का यह आरोप है कि प्रशांत किशोर ने 18 फरवरी को “बात बिहार की” नाम से जिस कैम्पेन की शुरुआत किया है उसका पूरा आइडिया और कंटेंट शाश्वत गौतम के ब्रेन चाइल्ड प्रोजेक्ट “बिहार की बात” से चोरी किया गया है जिसे प्रशांत किशोर ने शाश्वत गौतम के सहयोगी के माध्यम से हासिल किया है।

दरअसल यह जो भी मामला चल रहा है इसका एक प्रत्यक्षदर्शी और हिस्सा मैं (राजीव) भी हूँ। “बिहार की बात” नाम से जो कैम्पेन शुरू होने वाला था इस बात की पूरी जानकारी शाश्वत गौतम, मेरे और एक अन्य व्यक्ति जिसका नाम एफआईआर में दर्ज है के अलावा किसी को भी विस्तृत रूप में नहीं थी। लीगल आस्पेक्ट की वजह से मैं इतने दिनों तक चुप था अब सच्चाई सबके सामने ला रहा हूँ।

किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि ‘मनुष्य भाव से मिलता है या स्वभाव से या फिर अभाव से’। मेरे और शाश्वत जी का मिलना स्वभाव से हुआ। हमारी दोस्ती की नींव में इंटेलेक्ट था। शाश्वत गौतम से मेरी मुलाकात लगभग छः महीने पहले पटना के एक बौद्धिक गलियारे में हुई थी। उससे पहले हमलोग एक दूसरे के प्रशंसक थे लेकिन मिले नहीं थे। मिलने पर उन्होंने कहा कि तुम ही राजीव प्रताप सिंह जादौन हो, कई लोगों से तुम्हारी बड़ाई सुन चुका हूँ इनदिनों क्या करते हो? मैंने कहा कि पढ़ाई-लिखाई का काम करते हैं, पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के पटना जिला के अध्यक्ष थे लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी० पी० सिंह) जी की जयंती को मनाने को लेकर हुए विवाद की वजह से मैंने कॉमरेडों को और कॉमरेडों ने हमको लाल सलाम बोल दिया। उस दिन समय का अभाव था, इस वजह से हमलोग एक दूसरे के फोन नम्बर का आदान-प्रदान किए और उन्होंने कहा कि फ्री होकर फोन करना।

उसके बाद हमलोगों का मिलना-जुलना जारी रहा। भारत की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति, लेफ्ट और राइट विचारधारा, समाजवादी/क्षेत्रीय पार्टियों, कांग्रेस पार्टी को लेकर हमलोगों के बीच घंटो बहस होती थी। एक दिन उन्होंने कहा कि बिहार को किस नजरिए से देखते हो और इसके सुधार के लिए क्या किया जा सकता है। इस पर मैंने अपनी राय रखी। उसके बाद उन्होंने कहा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे बिहार के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव आए। फिर उन्होंने ‘बिहार की बात’ कैम्पेन की बात मुझसे साझा किया। मैंने सोचा- बैठे रहता हूँ या किसी नेता ने फोन कर कह दिया कि राजीव जी फलाँ डेट को विधानसभा में बोलना है एक भाषण लिखकर भेज दीजिएगा, ऐसा करते रहने से अच्छा है बिहार की बात कैम्पेन को शुरू किया जाए। प्रयास करने में क्या जाता है, नहीं कुछ होगा तो तजुर्बा होगा।

इससे पहले शाश्वत जी ने एक और लड़के से बात किया था जिसे मैं भी जानता था और जिसके साथ पटना में आई बाढ़ के दौरान हमलोगों ने साथ मिलकर राहत एवं बचाव का काम किया था। इस तरह बिहार की बात नाम की गाड़ी आगे बढ़ने लगी। शाश्वत जी ने कहा कि तुम दोनों मिलकर ही इसको लीड करो मेरी भूमिका मेंटर/पेट्रॉन की रहेगी। लीगल, इकोनॉमिक, टेक्नॉजिकल रूप से तुमलोगों को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी यह मैं आश्वस्त करता हूँ। बस तुमलोग मेरे प्रति लॉयल और ईमानदार रहना।

जब मैं बिहार की बात कैम्पेन की टीम का अहम हिस्सा बनने वाला था उससे पहले मैंने कांग्रेस और जदयू के अपने लोगों से पूछा कि शाश्वत जी कैसे आदमी हैं। तो सबों ने यही कहा कि जानकार व्यक्ति हैं डेटा और फाइनेंस पर इनको महारथ हासिल है, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए हैं, कुछ दिनों के लिए अमेरिका में मैरीलैंड प्रान्त के वॉटर कमीशन में डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट में सिविल सर्वेंट थे, नीतीश जी के सहकार रहे हैं, घनश्याम तिवारी के बाद और प्रशांत किशोर से पहले जदयू का कम्युनिकेशन यही देखते थे और जदयू के प्रवक्ताओं को ट्रेंड भी करते थे, फाइनेंस कमीशन से कोऑर्डिनेशन की भी जिम्मेवारी इन्ही की थी, नीतीश जी के बीजेपी से मिलने पर इन्होंने जदयू छोड़ दिया और राहुल गांधी के लिए काम करने लगे, सुलझे हुए व्यक्ति हैं तिकड़म करने में माहिर नहीं हैं इस वजह से बिहार जैसे जगह में इस आदमी की कद्र नहीं है। लोगों की राय जानने और खुद से अवलोकन करने के बाद मुझे लगा कि यह आदमी जेन्युइन है एवं इनके साथ कामकर बहुत कुछ सीखा जा सकता है और मैं बिहार की बात कैम्पेन से जुड़ गया।

इसी क्रम में हमलोगों ने Bihar ki Baat नाम से एक वाट्सएप ग्रुप बनाया जिसमें मेरे, शाश्वत जी और पूर्व साथी के अलावा कोई अन्य सदस्य नहीं था। बिहार की बात को कैसे सफल किया जाए उसके लॉजिस्टिक्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ग्राफिएक्स, कन्टेंट सब कुछ की चर्चा होती थी। एक और जरूरी बात मैं, शाश्वत जी और हमारे पूर्व साथी ने मिलकर 21 दिसंबर को राष्ट्रीय जनता दल के बंद के दौरान फुलवारी शरीफ में हुए दंगे के दौरान मारे गए युवक आमिर हंजला की स्टोरी को राष्ट्रीय स्तर के तमाम अखबारों और चैनलों में प्रसारित करवाने का काम किया था और आमिर हंजला के परिजन के लिए डिजिटल फंड रेज करवाने का काम भी किया था।

शाश्वत जी का व्यवहार हमारे साथ एक मेंटर से ज्यादा बड़े भाई की तरह था। उन्होंने मुझको व्यक्तिगत रूप से पब्लिक फाइनांस, पॉलिसी मेकिंग, बजट, इकोनॉमिक सर्वे के ऊपर कई दिन घंटों पढ़ाया। डेटा की गुत्थियों को कैसे सुलझाकर आम आदमी के लिए सरल बना दिया जाए यह भी बताया। मैरियाना मैज़ुकाटो (Mariana Mazzucato) और येनिस वैरौफैकीस(Yanis Varoufakis) जैसे अर्थशास्त्रियों के कामों से रूबरू करवाया। अन्य बहुत से टॉपिक हैं जिसपर उन्होंने मुझे बताया है।

जनवरी के पहले सप्ताह में मैं दिल्ली गया था हमलोग बिहार को लेकर कुछ करना चाहते हैं वह कैसे बेहतर तरीके से हो इसको लेकर मैंने लुटियंस दिल्ली की नेतानगरी के नेता, मीडिया, ज्युडिशयरी, ब्यूरोक्रेसी के अपने मित्रों से चर्चा किया था। उनलोगों ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। यहाँ जरूरी बात यह है कि मैंने उनलोगों से बिहार की बात ही नाम होगा या कंटेंट, डिजाइन और रणनीति को लेकर कुछ भी चर्चा नहीं किया था।

इसी बीच 25 जनवरी के आसपास अचानक शाश्वत जी का हमको फोन आता है कि राजीव उससे (पूर्व सहयोगी) बात करो वह मेरा फोन नहीं उठा रहा है मैं पचास बार फोन कर चुका हूँ। मैं आश्चर्यचकित था! कोई कितना भी व्यस्त हो या विपत्ति में हो फोन तो उठा ही सकता है उसमें भी उस व्यक्ति का जिसके साथ इतने बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा हो। यह सिलसिला 3-4 दिनों तक चलता रहा। शाश्वत जी और उनके बीच में मेरे ही माध्यम से बात हुई। 6 फरवरी को शाश्वत जी का लेपटॉप जो कि हमारे पूर्व सहयोगी के पास था मेरे माध्यम से शाश्वत जी को प्राप्त हुआ।

18 फरवरी को जब प्रशांत किशोर का प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रहा था उस वक़्त मेरे पास बहुत से लोगों का फोन आया जो कह रहे थे कि राजीव जी पीके ने आपका वाला ही कैम्पेन करने का ऐलान किया है। प्रशांत किशोर का प्रेस कॉन्फ्रेंस देखते हुए मेरा कलेजा कटा जा रहा था। हमारे तीन महीने की मेहनत जिसमें हमने रात-रात भर जगकर काम किया था उस पर पानी फिर चुका था। हम लोगों से कह भी नहीं सकते थे लोग हमारा मजाक उड़ाते थे। 18 तारिख को ही हमारी मुलाकात न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार रुचिरा गुप्ता जी से हुई। हमलोगों के बीच पूरा गमगीन माहौल देखकर रुचिरा जी भी दुःखी थी। ड्रॉप करते वक़्त रुचिरा जी ने सांत्वना देते हुए कहा था कि राजीव डोंट वरी, अपनी लकीर उससे बड़ी करो, मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे साथ है बच्चे।

किसी की भी मर्यादा होती है, उसकी अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा होती है। किसी भी व्यक्ति के ऊपर बेवजह आरोप लगा देना तो उसका कैरेक्टर ऐसेसिनेशन होता है। हमारा कैम्पेन तो चोरी हो चुका था। हमने अपने-अपने स्तर से तहकीकात किया फिर मामला चोरी करने का सही लगा। तब जाकर पाटलीपुत्रा थाना में प्रशांत किशोर के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। उससे पहले कोई पत्रकार इस खबर को छूने तक को तैयार नहीं था। शाश्वत जी ने कुछ पत्रकारों को बताया तो पत्रकार कहते थे जाने दीजिए शाश्वत जी कुछ नहीं होगा। 26 फरवरी को जब एफआईआर हुआ उसके बाद थाना के माध्यम से हिंदुस्तान के क्राइम बीट देखने वाले संवाददाता ने इस स्टोरी को ब्रेक किया। 27 को जब यह बात हिंदुस्तान अखबार के मुख्यपृष्ठ पर छपी मैं सोया हुआ था उस वक्त एक मित्र ने हमको फोन कर पूछा कि राजीव जी क्या माजरा हैं आप तो शाश्वत जी से जुड़े हुए हैं बताईए। हिंदुस्तान के बाद ही इंडियन एक्सप्रेस से लेकर अन्य राष्ट्रीय मीडिया इदारों ने इस खबर को छापा।

किसी का आइडिया चुरा लेना या कॉपीराइट का इशू कितना गंभीर मामला है यह बात भारत जैसे देश में लोगों को समझ में ही नहीं आता है। शेष नारायण सिंह, जयशंकर गुप्ता, अशोक कुमार पांडेय, नीतिन ठाकुर, सुजाता चखोरबाली, रीवा सिंह, मृणाल वल्लरी, विचित्रमणि राठौर जैसे अपने कुछ मित्रों और अविभावकों को मैं चाव से पढ़ता हूँ उनलोगों की लिखी किसी एक लाइन की बात को भी मैं फेसबुक स्टेटस या व्हाट्सएप स्टोरी में लगाता हूँ तो लिखता हूँ कि कॉपीड फ्रॉम मिस एक्स और मिस्टर वाई’ज फेसबुक वॉल। यहाँ तो पूरा का पूरा हमारा कांसेप्ट ही चुरा लिया गया सोचिए हमपर क्या बीतती होगी।

कानून निष्पक्ष होकर अपना काम करे और दूध का दूध और पानी का पानी करे हम इसकी उम्मीद करते हैं। न्याय और सत्य पर मुझे भरोसा है। हमारी परंपरा सत्य के साथ और न्याय के पक्ष में खड़ा होने की है। मैं सत्य के साथ हूँ। भले ही वह सत्य प्रशांत किशोर, हमारे पूर्व सहयोगी, यहाँ तक कि शाश्वत गौतम या फिर खुद मुझे ही क्यों न नुकसान करे फिर भी मैं सत्य के साथ ही रहूँगा।

जहाँ तक रही बात प्रशांत किशोर की तो मुझे बहुत पहले यह ज्ञान हो गया था कि यह आदमी महा फ्रॉड है। दलाली में यह चंद्रास्वामी की कार्बन कॉपी है। खबरों को प्लांट करवाकर अपनी छवि चमकाता है। ताकि लोग इसे पावरफूल समझे और समाज की तो यह सच्चाई है ही कि मजबूत आदमी से सब कोई जुड़कर रहना चाहता है उस फर्जी खबर के प्रभाव से लोग इससे एसोसिएट रहे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रशांत किशोर को जेड सिक्योरिटी सुरक्षा देने वाली है यह खबर फॉल्स थी लेकिन इस खबर ने प्रशांत किशोर का प्रतिबिंब आम जनमानस में कितना गहरा बनाया होगा कोई भी मीडिया को जानने समझने वाला समझ सकता है। प्रशांत किशोर मीडिया में एनडीटीवी के करसपोंडेंट मनीष जैसे लोगों से अपने पक्ष में नैरेटिव गढ़वाता है। मुझे एक चीज पर ताज़्जुब होता है प्रशांत किशोर कोयम्बटूर में रहे, प्रशांत किशोर ने चिकमंगलूर में कुछ कहा, प्रशांत किशोर ने टिम्बकटू में कुछ बोला, प्रशांत किशोर फरकिया गए इन तमाम खबर को एनडीटीवी के ब्लॉग पर पटना में बैठा हुआ उसका करसपोंडेंट मनीष ही कैसे लिखते हैं। इस बात पर मैं रवीश कुमार की बात कि ‘मीडिया पर सवाल करना चाहिए’ को एनडीटीवी पर अप्लाई करता हूँ तो मनीष का झोल समझ में आता है। सोचिए दाल में कितना काला है।

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जीत का श्रेय प्रशांत किशोर को देने वाली बात भी प्लांटेड हैं। यह नैरेटिव इसीलिए गढ़ा गया क्योंकि महागठबंधन की जीत में लालू प्रसाद यादव की भूमिका को जनता के बीच कमकर प्रस्तुत किया जाए। सोचिए कोई भी राजनीति में दो ध्रुव मिल जाए तो उसका जीतना तय ही है। फिर सामने सुनामी हो या हुदहुद हो। अब कल को अगर भाजपा और कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़े(जो की ऐसा होने वाला ही नहीं है) फिर मुकाबला ट्रम्प से हो पुतिन से हो या डी० रूजवेल्ट से हो उसमें उस एलाइंस की जीत अवश्य ही होगी।

“बिहार की बात” से “बात बिहार की” का मिलना, 16 फरवरी को 12 बजकर 58 मिनट पर गूगल डोमेन पर “बात बिहार की” का रजिस्ट्रेशन होना और आनन फानन में 18 फरवरी को प्रशांत किशोर का प्रेस करना और उस कॉन्फ्रेंस में जो फ्लायर प्रशांत किशोर द्वारा लोगों के बीच बांटा गया जिसमें “बिहार की बात” की तरह ही लोगो था और उस लोगो का बैकग्राउंड भी “बिहार की बात” के लोगो की तरह ही पीला था उस फ्लायर का गायब हो जाना कहता है कि सबकुछ महज हुश्न-ए-इत्तेफाक ही नहीं है। बिहार के युवाओं से अपील है कि आप यदि राजनीति में जाना चाहते हैं तो प्रशांत किशोर जैसे फ्रॉड के झाँसे में आकर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने के बजाए जनता के बीच जाइए और ईमानदारी से लोगों के सरोकारों को उठाइए जनता आपको सर आंखों पर बिठा कर रखेगी।

कानून अपना निष्पक्ष काम करे, हम इसकी उम्मीद करते हैं। हमें न्याय पर विश्वास है।

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