बिस्कुटिया चैनल की क्रांतिकारिता कब तक?

बिस्कुटिया चैनल में बड़ा नाम… कहते है ना कि घूर के दिन भी फिरते हैं। क्या यह कहावत एक छोटे से चैनल सूर्या समाचार के साथ मीडिया जगत का बड़ा नाम पुण्य प्रसून वाजपेयी के जुड़ जाने के कारण चरितार्थ होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

पुण्य प्रसुन वाजपेयी ने कल जिस धमाकेदार अंदाज में शुरुआत की है, उससे उन्होंने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि खबरों को वो अपने ही तरीके से परोसेंगे और कोई समझौतावादी रास्ता नहीं अख्तियार करेंगे।

चैनल का मालिक एक बिस्कुट व्यापारी है जिससे यह भी जाहिर है कि उसने भी चैनल में पैसा खबरों का व्यापार करने के लिए लगाया है, ना कि पत्रकारिता को मिशन मानकर लगाया है। उसकी भी यही सोच होगी कि पुण्य प्रसून वाजपेयी के माध्यम से उसे भी टीआरपी मिले और विज्ञापनों की झड़ी लगना शुरू हो जाये।

व्यापारी आदमी सत्ता के ख़िलाफ वहीं तक जा सकता है जब तक उसका कोई नुकसान न हो। जैसे ही उसे नुकसान पहुंचने का खतरा उत्पन्न होगा, इसकी आहट भी होगी। वो सबकुछ छोड़कर समझौते की राह पर चल निकलेगा।

ऐसा नहीं है कि पुण्य प्रसून यह सब कुछ नहीं जानते हैं। वो यह सब अच्छी तरह से जानते हैं। भुक्तभोगी जो ठहरे। अब वो अपनी राह में कितने दिनों तक ठहर पाएंगे, उनकी नई पारी कितनी लम्बी होगी, इस सूर्या को कितना तेज दिला पाएंगे? बिस्कुट खिला कर कितना पानी पिलायेंगे? इसे तो आने वाला समय बतायेगा पर उन्होंने आगाज़ जोरदार किया है। उससे भक्ति रस में डूबे लोगों में खलल जरूर पड़ गया है।

‘सूर्या समाचार’ चैनल कुछ घटनाओं को लेकर पूर्व में विवादित भी रहा है। यह खैर अतीत की बात है। इस चैनल पर कल रात 9 बजे पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी प्राइम टाइम कार्यक्रम ‘जय हिंद’ लेकर उपस्थित हुए। टीवी न्यूज चैनल की पत्रकारिता का यह जाना पहचाना चेहरा अपने धारदार और सत्ताविरोधी पत्रकारिता के लिए जाना जाता है लेकिन अपनी इस छवि के साथ एक बिस्कुट कम्पनी के मालिकाना हक वाले इस चैनल में कितना न्याय कर पाएंगे? पत्रकारिता को कितना जी पाएंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा पर फिलहाल हम उनकी लगभग छह माह बाद शुरू हुई इस नई पारी के लिए शुभकामना ही व्यक्त कर सकते हैं।

लेखक अनिल पांडेय रायगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code