रिया में गुनाहगार ढूंढना सभी समस्याओं का हल है!

-शीतल पी सिंह-

मेरे एक बहुत ही प्रिय रिश्तेदार और बेहद समझदार युवा मित्र ने14 अगस्त को सुशांत मामले की अंदरूनी वजह सामने रख दी थी। बात ऐसी थी कि बिना पुष्ट प्रमाण के आगे बढ़ाना अपराध होता। अब बड़ी बड़ी एजेंसीज की जांच भी यही सब टीवी पर लीक कर कर के सरकार की सेवा कर रही हैं।

अब यह तो सिद्ध हो ही गया है कि है यह आत्महत्या ही और ठाकरे परिवार को लपेटने और हत्या करवाने की टीवी कथाएं सिर्फ़ राजनीतिक अफवाह भर थीं । ज्यादा से ज्यादा रिया को बिहार चुनाव के दौरान बकरी बनाकर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एजेंसीज कुछ दिन जेल भले ही भेज दें।

सास बहू के झगड़े का सीरियल देखता/जीता समाज

औसतन घर के लड़के की बीबी से भारतीय परिवारों के संबंध तनावपूर्ण रहते हैं । ज़्यादातर बार स्थिति तनावपूर्ण किंतु नियंत्रण में रहते हुए बीत जाती है परन्तु अनेक बार स्थिति नियंत्रण से बाहर चली जाती है । बदलती आर्थिक परिस्थितियों ने समाज में अब संयुक्त परिवारों के युग को समाप्ति पर ला दिया है और न्यूक्लियर परिवार चलन में हैं यानि मियाँ बीबी बच्चा!

इस परिवर्तन की प्रक्रिया के अनवरत चलते हमारे समाज में सास बहू का रिश्ता सीरियलों का एक हिट विषय है जो आदर्श (प्रेमपूर्वक रहता संयुक्त परिवार) ढूँढता है पर उसे विद्रूप मिलता है और जिन प्रतीकों में वह आदर्श ढूँढता है उन्हें वह निजी जीवन में लिव इन , एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर और न जाने किस किस नयी संरचना
में पाता है ।

संयुक्त परिवारों में जवान हुए बेटों पर माँ बाप भाई बहन रिश्तेदार उसकी शादी / अफ़ेयर से पहले आदतन हक रखते हैं जो एक युवा स्त्री के उसके जीवन में कदम रखते ही एक सपने की तरह टूट जाता है । युवक स्वाभाविक तौर पर इस नये रिश्ते में गुम होता है/होना चाहता है और पुराने रिश्ते उनके साझा जीवन में उसकी एकाएक पैदा हुई अनुपस्थिति से बेचैनी महसूस करने लगते हैं । माँ बहन भाई रिश्तेदार इस बेचैनी को बहुधा उस नई स्त्री द्वारा उनके बेटे पर किये गये जादूटोने आदि प्रचलित संकल्पनाओं में व्यक्त करते हैं और अपने बेटे को मासूम / निर्बोध समझते रहते हैं । यह अंतर्विरोध आमतौर पर उस नई स्त्री से शत्रुता पैदा करने लगता है जिसके प्रतिवाद में वह नई स्त्री भी अनेकानेक बार शत्रुवत आचरण करने लगती है क्योंकि वह अकारण ही टार्गेट की गई होती है ।

दुनियाँ में दहेज के लिये की जाने वाली अनगिनत हत्याओं में दक्षिण एशिया ,ख़ासकर भारत और ख़ासकर हिंदू समाज कुख्यात है । परिवार और उसके बेटे के जीवन में नई स्त्री के शामिल होने से बिगड़े तानेबाने में इस समस्या का काफ़ी बड़ा रोल है । जब बेटा बीबी की जगह माँ बहन की चुग़लियाँ सुनने लगता है तो वह भी बीबी बदल की स्कीम के इस शार्टकट का अपराधी हुआ मिलता है । दूसरी तरफ़ इस पर बने क़ानून के दुरुपयोग का रास्ता भी खुल चुका है जो हमारी रवायत के अनुसार हर क़ानून के दुरुपयोग का रास्ता हमारे पास है ही ।

रिया के कल आये साक्षात्कार में यही द्वन्द्व सामने आया । उसके ब्वायफ्रेंड के परिवार के अनुसार इसी लड़की के कारण लड़का हाथ से /दुनिया से गया । जबकि चार चार बेहद समर्थ बहन बहनोइयों और बड़ी सरकारी नौकरी कर चुके पिता के संयुक्त ढाँचे में परिवार के बेटे से तालमेल न रख पाने की कमी बहस से नदारद है । उसके लिये तरह तरह के झूठ गढ़े बोले परोसे जा रहे हैं और राजनैतिक कारणों से सरकार पक्षीय टीवी चैनलों / सोशल मीडिया गैंग्स के प्रचंड बहुमत ने उस लड़की में हर वह दोष ढूँढ लिया है जो भले ही उसमें न हो पर कोई सुनने तक को तैयार नहीं। अब पूरा देश रिया का ससुराल पक्ष है!

सीमा की ज़मीन हड़प लिये जाने, कोविड 19 में दुनिया में सबसे बुरे हाल में पहुँच जाने, अर्थव्यवस्था के रसातल में पहुँच जाने और बेरोज़गारी के ऐतिहासिक विस्फोट से चरमराते नक़ली समाज के लिये रिया में गुनहगार ढूँढना सभी समस्याओं का हल है! इस समाज का कोई भविष्य नहीं जिसे अपने आप से संवाद करना ही न आता हो!

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