उपराष्ट्रपति के लखनऊ दौरे से पहले आरटीआई कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों का दौर, हालात आपातकाल जैसे

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन करने आने वाले उपराष्ट्रपति के विरोध की येश्वर्याज सेवा संस्थान की घोषणा से बौखलाए शासन-प्रशासन ने लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी. एक तरफ येश्वर्याज की सचिव और समाजसेविका उर्वशी शर्मा को तो महिलाओं की गिरफ्तारी के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों को खूंटी पर टांगकर रात 09 बजे एसएसपी लखनऊ से कल के कार्यक्रम के पास देने के सम्बन्ध में बातचीत कराने की झूठी बात कहकर हजरतगंज महिला थाने ले जा कर नज़रबंद कर दिया गया.

येश्वर्याज के कोषाध्यक्ष और आरटीआई कार्यकर्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी को पहले खंदारी बाजार पुलिस चौकी, फिर थाना विभूतिखंड गोमतीनगर, फिर चिनहट थाने ले जाया गया और फिर अंत में कैसरबाग थाने में नज़रबंद कर दिया गया. खबर लिखे जाने तक उर्वशी और तनवीर नज़रबंद हैं. येश्वर्याज के सदस्य और वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार गोयल के घर के बाहर पुलिस की जबरदस्त घेराबंदी करके उनको कल रात से उनके घर में ही नज़रबंद करके रखा गया है तो वहीं कल रात से ही हरपाल सिंह, संजय आज़ाद सहित अनेकों आरटीआई कार्यकर्ताओं को अवैध हिरासत में लेने के लिए पुलिस उनके घरों पर लगातार दबिश दे रही है.

गौरतलब है कि लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन ने घोषणा की थी कि आज सायं 04:30 बजे संगठन के 2 सदस्य हाथ में काली पट्टी बांधकर उपराष्ट्रपति और कार्यक्रम के अन्य अतिथियों को गुलाब का फूल देकर अपना विरोध व्यक्त करेंगे और संगठन के 2 सदस्य आज ही हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क में पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक अपने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

येश्वर्याज द्वारा एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करते हुए यूपी के शासन-प्रशासन के इस दमनात्मक कदम को अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या की संज्ञा देते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के लखनऊ दौरे से पहले आरटीआई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों, नज़रबंदियों और उनके घरों पर दी जा रही दबिशों को आपातकाल की संज्ञा दी और शासन-प्रशासन के इन दमनात्मक क़दमों की भर्त्सना की है. लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज सेवा संस्थान विगत 2 वर्षों से उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में महिला यौन-उत्पीडन मामलों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार विशाखा समिति बनाने और आयोग की सभी कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिंग कराने, इन रिकॉर्डिंग्स को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्ष द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने की व्यवस्थाएं कराने की मुहिम चला रहा है और उपराष्ट्रपति का विरोध भी इसी मुहिम का एक हिस्सा था.

ऐसे में अगर सरकार पूरा जोर लगाकर आरटीआई कार्यकर्ताओं को आरटीआई भवन और हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क जाने से बलपूर्वक रोककर मात्र 2 आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा किये जाने वाले आज के सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम को रोक भी लेती है तो भी क्या सरकार के यह दमनात्मक कदम उसकी असफलता को खुद-ब-खुद बयाँ नहीं कर रहे हैं और क्या आरटीआई कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों ने उस पारदर्शिता कानून की ही हत्या नहीं कर दी है जिसके संरक्षण के लिए बने आरटीआई भवन का उद्घाटन करने उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री आ रहे हैं.

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