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बाइडेन-मोदी प्रेस वार्ता में वॉल स्ट्रीट जर्नल की सबरीना सिद्दीक़ी ने पूछे ये तीन सवाल!

प्रकाश के रे-

बाइडेन-मोदी प्रेस वार्ता में वॉल स्ट्रीट जर्नल की सबरीना सिद्दीक़ी ने तीन सवाल पूछकर दोनों नेताओं के लिए बड़ा अच्छा मौक़ा दे दिया. राष्ट्रपति बाइडेन से पहला सवाल उनका यह था कि उनके द्वारा चीनी नेता को डिक्टेटर कहने से क्या अमेरिका-चीन संबंध प्रभावित होंगे.

राष्ट्रपति बाइडेन के ऐसा कहने से स्वाभाविक रूप से चीन नाराज़ है. तो, अमेरिकी राष्ट्रपति को नाराज़गी दूर करने का अवसर मिल गया. उन्होंने कहा कि संबंधों पर असर नहीं होगा, विदेश सचिव ब्लिंकेन का चीन दौरा ‘ग्रेट’ रहा और वे चीनी राष्ट्रपति शी से मिलेंगे.

दूसरा सवाल भारत में लोकतंत्र और मानवाधिकार को लेकर था. यह भी राष्ट्रपति बाइडेन के लिए एक अवसर रहा. उन्होंने कह दिया कि दोनों नेताओं के बीच खुलकर चर्चा हुई, अमेरिका की तरह भारत के डीएनए में भी डेमोक्रेसी है. यह कहकर उन्होंने अपनी पार्टी को भी तुष्ट कर दिया और भारतीय नेतृत्व को भी. उनकी इस बात को प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया भी.

इसी विषय पर उनका तीसरा सवाल भारतीय प्रधानमंत्री से था. सबरीना ने फिर सुरक्षित खेलने का मौक़ा दिया. उन्होंने कहा कि कुछ मानवाधिकार संगठन ऐसा कहते हैं, जबकि उन्हें ठोस आँकड़े/तथ्य देना था. फिर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस संबंध में क्या कदम उठा रहे हैं. इस सवाल के इन दो सिरों के बीच प्रधानमंत्री के लिए संक्षिप्त भाषण दे देना निश्चित ही आसान रहा होगा.

भारतीय पत्रकार का सवाल हास्यास्पद था.


आवेश तिवारी-

9 साल में एक सवाल और हवा गुल। वॉल स्ट्रीट जर्नल की महिला पत्रकार के महज एक सवाल ने मोदी की अमेरिकी यात्रा और बाइडेन के साथ बातचीत से बने पूरे माहौल में करिखा घोल दिया है। भारतीय मीडिया द्वारा बनाया गया पूरा माहौल गड़बड़ा गया है। अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दोयम दर्जे के व्यवहार को लेकर जब मोदी से सवाल किया गया तो चेहरा सफेद हो गया, हवाइयां उड़ रही थी, झूठ साफ पकड़ा जा रहा था।

सबरीना का सवाल सुनिए और मोदी की का चेहरा देखिए। ऐसे सवाल कॉन्फिडेंस को ही खत्म कर देते हैं। यकीन मानिए हिंदुस्तान के एक कस्बाई रिपोर्टर के सवाल का जवाब देने का साहस मोदी के पास नहीं है। इस प्रेस कांफ्रेंस में भारत की ओर से किसी एजेंसी का कुमार नाम का पत्रकार था। उसने क्लाइमेट चेंज पर सवाल किया।

यह सबरीना सिद्दीकी है वॉल स्ट्रीट जर्नल की वाइट हाउस कॉरस्पॉडेंट इसके पहले गार्जियन में थीं। इनके एक सवाल ने जहां अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के होश उड़ा दिए वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई।

सबरीना का बाइडेन से सवाल था कि आप लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बात करते हैं तो आप भारत से कैसे अच्छे संबंध रख सकते हैं जहां पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और फ्री प्रेस को दबाया जा रहा है?

सबरीना ने मोदी से सवाल किया कि आपके देश में जो अल्पसंख्यकों को दबाया जा रहा है और निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है उसको लेकर के आप क्या कर रहे हैं हैं?

सैल्यूट सबरीना

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