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सहाराकर्मियों ने 2 जून तक मांगा वेतन और बकाये के लिये पीडीसी चेक, अन्यथा 3 जून से हड़ताल

सहारा मीडिया (राष्ट्रीय सहारा हिन्दी, उर्दू और सहारा टीवी) के कर्मचारियों ने उच्च प्रबंध तंत्र और समूह संपादक विजय राय के अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उप श्रमायुक्त नोयडा, जिलाधिकारी और एसएसपी नोयडा को पत्रक भेजकर 2 जून तक मई माह का नकद वेतन और बकाया वेतन के लिये पीडीसी चेक की मांग की है जिससे समय आने पर वह अपने बकाया धनराशि का भुगतान ले सकें अन्यथा 3 जून को वह हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे.

सहारा मीडिया (राष्ट्रीय सहारा हिन्दी, उर्दू और सहारा टीवी) के कर्मचारियों ने उच्च प्रबंध तंत्र और समूह संपादक विजय राय के अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उप श्रमायुक्त नोयडा, जिलाधिकारी और एसएसपी नोयडा को पत्रक भेजकर 2 जून तक मई माह का नकद वेतन और बकाया वेतन के लिये पीडीसी चेक की मांग की है जिससे समय आने पर वह अपने बकाया धनराशि का भुगतान ले सकें अन्यथा 3 जून को वह हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे.

सहारा के कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनका भुगतान न हुआ तो 3 जून को कार्य करने की स्थिति में नहीं होंगे. कर्मियों ने कहा है कि प्रबंधन अभी तक लगातार झूठे आश्वासन देता रहा है. जिसके कारण उनके परिवार भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. वैसे सहारा कर्मी 27 मई को ही हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन राष्ट्रीय सहारा नोयडा और टीवी नोयडा के कर्मचारी अपने दावे से मुकर गये.

नोयडा कर्मी पहले आरोप लगाते थे कि सहारा के पटना, गोरखपुर और कानपुर यूनिट के कर्मचारी दोगलेपन का व्यवहार करते हैं, लेकिन 27 मई को लखनऊ व वाराणसी यूनिट के कर्मचारी पूरी तरह से हड़ताल के लिये तैयार थे, लेकिन नोयडा के कर्मचारी 7 बजे से ही सभी यूनिटों को ले आउट ओर पेज भेजकर दोगलापन का परिचय देने लगे.

इसी तरह नोयडा टीवी के कर्मचारी भी हड़ताल को लेकर घूम- घूम कर लम्बे- लम्बे दावे करते रहे, लेकिन जब 27 मई को टीवी को ब्लैक आउट (हड़ताल) करने का मामला आया तो वह भी दोगलापन का परिचय देने में सबसे आगे रहे. अब अगले इम्तहान की घड़ी एक बार फिर 3 जून को सामने है. देखिये कौन-कौन यूनिट हड़ताल में शामिल होती है और कौन दोगलापन का कार्य करती है.

एक सहारा कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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2 Comments

2 Comments

  1. Insaf

    May 31, 2016 at 4:25 pm

    सहारा प्रबंधन को परिवार के साथियों की मांग को हलके नहीं लेना चाहिए. यह धुआं है. चिंगारी बनते देर नहीं लगेगी. प्रबंधन के लोग भी सहारा परिवार के ही लोग है. अभी ९९ फीसदी लोग सहाराश्री के अगले कदम के इंतजार में है. बुद्धिमानी इसी में है कि सहाराश्री भूखे कर्मियों की बात माँ ले. वे अपना पैसा माँ रहे है. कोई भीख नहीं. कई सहराकर्मियों का परिवार उजड़ने के कागर पर है. यदि बा बिगड़ी तो अनर्थ हो सकता है. क्या सहाराश्री की यह इक्छा है कि उनके परिवार के सदस्य भूखे रहकर दिन रात काम करते रहे. यह मत भूलिए परिवार के सदस्य है तभी तक सहारा है. क्या विनाशकाले विपरीत बुद्धि तो नहीं हो गयी है. माँ दुर्गा सदबुद्धि दे. अभी तो सेबी से लड़ रहे है . १२ लाख सहारा कर्मियों से कैसे लड़ पाएंगे. समय रहते निर्णय ले. यदि कोई आदर से मांग रहा है तो उसकी कमजोरी न समझे. ऐसे लोग विवश होकर याचना कर रहे है. सब कुछ आपके हाँथ में है .

  2. अरुण श्रीवास्तव

    May 31, 2016 at 7:46 pm

    पहले तो इस निर्णय के लिए बधाई। हडताल हमारा लोकतांत्रिक हथियार है। लेकिन हर बार की तरह कदम आगे बढाकर पीछे न खींच लिया जाए। हर यूनिट को साथ लेकर चलें। अब तक ऐसा होता रहा है कि एक यूनिट क्या कर रहा है दूसरे को पता ही नहीं चलता था। मुख्यालय नोएडा से सूचनाओं का अभाव रहता है। पिछले बार की हडताल स्वतः स्फूर्ति थी हर बार ऐसा होगा यह जरूरी भी नहीं।
    हाँ एक बात और शशि राय जैसे जयचंदों से सावधान रहने की जरूरत है।

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