इस भ्रष्ट अधिकारी की दुर्गति तो देखिये…

Vishnu Gupt : आप भी सबक लीजिये, गलत काम और भ्रष्टाचार से बचिये… यह जो फर्श पर बैठा हुआ मोटा सा आदमी है, वह सजल चक्रवर्ती है। सजल चक्रवर्ती झारखंड सरकार का मुख्य सचिव था। मुख्य सचिव का रूतबा आप जानते होंगे। रांची जैसे शहर में जिलाधिकारी था। जिलाधिकारी के तौर पर इनके कई किस्से थे, खासकर आवारागर्दी, यारगर्दी, सुंदरीगर्दी के काफी लोमहर्षक कहानियां बनायी थी इन्होंने। चारा घोटाले ये फंस गये। जेल जाने के बाद भी झारखंड के भ्रष्ट सरकारों ने इन्हें मुख्य सचिव बना डाला।

अब इस अधिकारी को चारा घोटाले में सजा हो गयी। ये जेल में बंद हैं। ये चारा घोटाले के मुकदमे की सुनवाई के लिए कोर्ट आये। पर कोर्ट की पहली मंजिल तक चढने में इनकी ऐसी दुर्गति हो गयी। इनकी दो बीवियां इनकी आवारागर्दी और सुंदरीगर्दी से परेशान होकर तलाक देकर चली गयीं। इनके पैसों और इनकी पैरवी पर राज करने वाले लोग आज इनके साथ नहीं हैं। इन्हें कोई खड़ा करने के लिए हाथ भी देने के लिए तैयार नहीं हैं। अब जिंदगी के अंतिम दिन इन्हें जेल में ही गुजारने होंगे। इसीलिए आदमी को ऐसी दुर्गति से बचने के लिए ईमानदारी और नैतिकता की जरूरत होती है।

Rajiv Nayan Bahuguna : यह मोटा सजल चक्रबर्ती है। कभी झारखण्ड का चीफ सेक्रेटरी था। चटोरा और गांठ का कच्चा। जो मिला भकोसता गया। हज़ार से लेकर करोड़ तक अंटी करता चला। पूरा मुर्ग उड़ाने के बाद आधा किलो रसगुल्ला खाता था। इसकी पहली जनानी इसे छोड़ भागी। क्यों न भागती। रात को बिस्तर पर उसे लगता, कि किसी ने उसके ऊपर गर्म आटे की बोरी रख दी हो। फिर दूसरी शादी की। वह इसकी जमा जथा ले भागी।

इसके पास बचे सिर्फ नोटों के बोरे। लेकिन उनका क्या करता। क्या जनानी की जगह नोट की बोरी के साथ सोता रात को? करना परमात्मा का यह हुआ, कि चारा घोटाला में धरा गया। अदालत में पेशी को आया, तो सीढ़ी न उतर पाया। घिसट कर ग्राउंड फ्लोर पर आया, और बैठ गया। आज इसके साथ कोई नहीं। यह बेसिकली एक कुली है। क्योंकि इसका वेट 150 kg है। यह हर समय 80 किलो extra वजन ढोता फिर रहा है। मेरे सूबे में भी एक cs ऐसा ही था। वह इतना मोटा तो न हुआ, पर कर्म उसके भी ऐसे ही थे। लास्ट में एक cm के पैसे लेकर भागा। अब कोढ़ी की तरह अकेला रहता है।

वरिष्ठ पत्रकार विष्णु गुप्त और राजीव नयन बहुगुणा की एफबी वॉल से.

अपडेट-

झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती का पांच नवंबर 2020 को निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, ​​केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने शोक प्रकट किया। सजल चक्रवर्ती काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। बेंगलुरु स्थित अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे अपनी बीमारी का इलाज कराने के सिलसिले में बेंगलुरु गए हुए थे। इसी दौरान हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। वे 1980 बैच के IAS अधिकारी थे। चारा घोटाला मामले में सजल चक्रवर्ती भी दोषी पाए गए थे। संयुक्त बिहार के दौरान सजल चक्रवर्ती 1992 से 1995 के बीच चाईबासा के कलेक्टर थे।



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