एक राज्य के सबसे बड़े अधिकारी रहे इस शख्स की बेबसी देखिए

Navniet Sekera : एक राज्य के सबसे बड़े अधिकारी की बेबसी। पाप अपने बाप का नही होता, ये 24 Jan को रांची कोर्ट में देखने को मिला। ये सजल चक्रवर्ती है कुछ दिन पहले तक झारखंड के चीफ सेक्रेटरी थे लेकिन चारा घोटाला में इनका भी नाम आ गया और दोषी भी करार हो गए। सोचिये एक हमारे बिहार में दरोगा बन जाता है तो पूरे गांव प्रखंड में उसकी टशन हो जाती है। बड़े बड़े लोग झुक के हाय हेलो करते हैं। सजल चक्रवर्ती तो मुख्य सचिव थे दिन में ना जाने कितने IAS/IPS पैर छूते होंगे लेकिन आज इनकी बेबसी देख कर दिल रो गया।

इस भ्रष्ट अधिकारी सजल चक्रवर्ती की दुर्गति तो देखिये…

Vishnu Gupt : आप भी सबक लीजिये, गलत काम और भ्रष्टाचार से बचिये… यह जो फर्श पर बैठा हुआ मोटा सा आदमी है, वह सजल चक्रवर्ती है। सजल चक्रवर्ती झारखंड सरकार का मुख्य सचिव था। मुख्य सचिव का रूतबा आप जानते होंगे। रांची जैसे शहर में जिलाधिकारी था। जिलाधिकारी के तौर पर इनके कई किस्से थे, खासकर आवारागर्दी, यारगर्दी, सुंदरीगर्दी के काफी लोमहर्षक कहानियां बनायी थी इन्होंने। चारा घोटाले ये फंस गये। जेल जाने के बाद भी झारखंड के भ्रष्ट सरकारों ने इन्हें मुख्य सचिव बना डाला।

विधवा का प्रधान से लेकर सचिव तक कुल 13 ने किया यौन शोषण, सबको हुआ एड्स

Satyendra PS : यह खबर अश्लील हो चली मानवता का अजीब किस्सा है। विधवा हो गई युवती का राशन कार्ड और विधवा पेंशन बनवाने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर सरकारी कर्मी मिलाकर 13 लोगों ने यौन शोषण किया। महिला को एड्स था और इन सभी दुष्टों को एड्स हो गया।

दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान योगी सरकार

यूपी की योगी सरकार दागी आईएएस सत्येंद्र सिंह पर मेहरबान है. यही कारण है कि इस भाजपा सरकार में इस घोटालेबाज अफसर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है. आईएएस सत्येंद्र सिंह एनआरएचएम घोटाले के भी आरोपी हैं. वे अब भी एक बड़े पद पर तैनात हैं.  सत्येंद्र सिंह जब एनआरएचएम में जीएम हुआ करते थे तो उन्होंने काफी खेल किए. इसी कारण उन्हें आरोपी बनाया गया. सीबीआई जांच के दौरान सत्येंद्र सरकारी गवाह बन गए. इसी कारण उनके खिलाफ चलने वाली सभी जांच ठंढे बस्ते में डाल दी गई. पर क्या सरकारी गवाह बनने से गुनाह माफ़ हो जाते हैं?

करप्शन किस कदर हमारे खून में समाया है, समझा रहे हैं आजतक के पत्रकार विकास मिश्र

Vikas Mishra : मेरे एक मित्र अभी एक शहर में एसपी सिटी हैं। एक रात जब हम मिले, चर्चा छिड़ी तो उन्होंने कहा-‘भाई मैं तो बस ईमानदारी से काम कर रहा हूं, कोई तीन-पांच नहीं।’ मुझे लगा कि शायद मोदी के प्रभाव में ईमानदार हो गए हैं। बात बढ़ी तो वो बोले-‘किसी को सताकर नहीं कमाना है भाई, बिना पैसे दिए पोस्टिंग मिली है, मैं तो बाहर का पैसा छूता नहीं हूं, बस महीने के जो ढाई-तीन लाख बंधे हुए आते हैं, उसी से काम चलाता हूं।’

मेधावी छात्रों का हक लूटने वाला भ्रष्टाचारी अनिल यादव अब अपने कुकर्मों की सजा भुगतेगा : शलभ

सक्रिय पत्रकारिता में रहते हुए यूं तो कई यादगार खबरें की, इन खबरों से तमाम पीड़ितों को इंसाफ भी मिला और गुनाहगारों को सजा भी. यकीन मानिए जब ऐसी खबरें अपने मुकाम तक पहुंचती है तो एक पत्रकार को भी वैसे ही सुख की अनुभूति होती है जैसे एक पीड़ित को इंसाफ मिलने पर. ऐसी ही थी यूपी लोकसेवा आयोग के भ्रष्टाचार की खबर. खुद भी प्रतियोगी छात्र रहा हूं. सिविल की तैयारियां की है. इसीलिए एक सामान्य परिवार के बेरोजगार का दर्द जानता हूं. उसकी आंखों में पलने वाले सपनों और माता-पिता, रिश्तेदारों की उम्मीदों का बोझ महसूस कर सकता हूं.

यूपी के दागी चीफ सेक्रेट्री की विदाई तय, केंद्र से लौटे राजीव कुमार सिंह को मिलेगी जिम्मेदारी

यूपी के दागी नौकरशाह और चीफ सेक्रेट्री राहुल भटनागर ने भाजपा राज में भी कई महीने तक निर्विरोध बैटिंग कर ली, यह उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में से एक माना जाना चाहिए. जिस राहुल भटनागर के कार्यकाल में और जिस राहुल भटनोगर के अनुमोदन से यूपी में दर्जनों गोलमाल हुए, वही राहुल भटनागर आज भी खुद को पाक साफ दिखाकर मुख्य सचिव की कुर्सी हथियाए हुए हैं.

महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया को भेज दिया लीगल नोटिस!

उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (यूपीएसआईडीसी) के विवादित चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को लीगल नोटिस भेज दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स में कानपुर डेटलाइन से रिपोर्टर हैदर नकवी ने एक रिपोर्ट छापी कि कैसे एक लाख रुपये महीने तनख्वाह पाने वाला एक बाबू (यानि अरुण मिश्रा) देश के शीर्षस्थ वकीलों को अपना मुकदमा लड़ने के लिए हायर करने की क्षमता रखता है. ये शीर्षस्थ वकील हैं सोली सोराबजी, हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अन्य.

एक सामान्य इंजीनियर यूपी में कैसे बन गया अरबपति… जानिए महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्र की कहानी

भ्रष्ट अफसरों की पोषक उत्तर-प्रदेश की कोख से उत्पन्न एक मुख्य अभियन्ता अपने पद का दुरुपयोग कर अरबों की परियोजनाओं से करोड़ों की हेरा-फेरी कर अपना घर भरता रहा। काली करतूतों से कमाई गयी दौलत से चन्द वर्षों में ही यूपी और दिल्ली जैसे शहरों में अनगिनत जमीन-जायदाद का मालिक भी बन गया। आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जांच हुई तो भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। लगभग छह माह तक जेल की सलाखों के पीछे रहे फिर भी तत्कालीन अखिलेश सरकार की आंख का तारा बने रहे। उपहार स्वरूप दोबारा उसी जगह पर तैनाती भी दे दी गयी। स्थिति यह है कि यह अभियन्ता अब खुलेआम भ्रष्टाचार के नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है और योगी सरकार भी कमोवेश मूकदर्शक बनी हुई है।

ये हैं भ्रष्टाचार के पितामह उर्फ अरुण मिश्रा

मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शरद पवार को पद्मविभूषण से सम्मानित किया!

Abhiranjan Kumar : एक तरफ़ कांग्रेसी थे, जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल इत्यादि को भी भारत रत्न दिये जाने लायक नहीं समझा, दूसरी तरफ़ भाजपाई हैं, जो कांग्रेस-कुल के भ्रष्ट लोगों का भी तुष्टीकरण करने में जुट गए। एक दिन वे उन्हें भ्रष्ट कहते हैं, दूसरे दिन पद्मविभूषण घोषित कर देते हैं। याद कीजिए, हालिया महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के तमाम नेताओं ने किस तरह से एनसीपी को भ्रष्टाचार का पर्यायवाची बताया था।