रायपुर । लंदन में रहकर भी भारत की मिट्टी से जुड़े संदीप नैय्यर ने पहली किताब के रूप में उपन्यास ‘समरसिद्धा’ में सुंदर प्रयास किया है, ऐसा करके संदीप ने अपने पिता वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैय्यर की तरह साहित्य के रंग में रंगने का संकेत दिया है। यह बात रविवार को ‘समरसिद्धा’ के विमोचन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकार संजय द्विवेदी ने कही।
छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के तत्वावधान में वृंदावन हॉल में शाम साढ़े 4 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ। कथाकार मंजूर एहतेशाम, पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी, उपन्यासकार तेजिंदर, साहित्यकार सुी जया जादवानी और कवि डॉ.सुधीर सक्सेना ने उपन्यास का विमोचन किया। पत्रकारों से चर्चा में संदीप नैय्यर ने कहा कि समरसिद्धा में आठवीं शताब्दी के दौर में दर्शन के समर्थन और विरोध के जैसे ही हालात वर्तमान में भी देखने को मिलते हैं। समय के साथ बदलती सोच और इसमें आ रहे अंतर के साथ पाठक कथानक में आगे बढ़ेंगे। प्रेम, पीड़ा के साथ प्रतिशोध की आहट भी कथानक में जुड़ी है। साथ ही पढ़ने में अरुचि से पाठकों को दूर रखने के लिए इसमें एक्शन, रोमांच के साथ भावनात्मक पहलू को भी जोड़ा है। कार्यक्रम के अंत में डॉ.सुधीर शर्मा ने आभार व्यक्त किया। (साभार- नई दुनिया)