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भ्रष्टाचार और तानाशाही के चंगुल में फंस कर कराह रहे UNI के कर्मचारियों के लिए आगे आएं

UNI को दलालों, भ्रष्टाचारियों, भू माफियाओं, यूनियन के ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराने और इस संस्थान के कर्मचारियों को प्रताड़ित होने से बचाने के लिए आप सब आगे आयें… साथियों, देश की प्रमुख समाचार एजेंसी UNI यानि यूनीवार्ता आज जिस दौर से गुजर रहा है उससे आप सब भलीभांति परिचित है. इस संस्थान के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी जो कांग्रेस के पूर्व राज्य सभा सदस्य भी हैं, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और सेबी की तरफ से अपनी गिरफ्तारी की संभावनाओं को देखते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने के कोशिश कर रहा है. वो खुद को इस संस्था का चेयरमैन बताने से भी इनकार कर रहा है. ऐसे परिस्थिति में इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था का चेयरमैन कौन है, माहेश्वरी को बताना होगा. उसने क्या किसी और को चेयरमैन बना दिया? यदि ऐसा है तो किस तरह यह धोखाधड़ी की गयी?

UNI को दलालों, भ्रष्टाचारियों, भू माफियाओं, यूनियन के ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराने और इस संस्थान के कर्मचारियों को प्रताड़ित होने से बचाने के लिए आप सब आगे आयें… साथियों, देश की प्रमुख समाचार एजेंसी UNI यानि यूनीवार्ता आज जिस दौर से गुजर रहा है उससे आप सब भलीभांति परिचित है. इस संस्थान के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी जो कांग्रेस के पूर्व राज्य सभा सदस्य भी हैं, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और सेबी की तरफ से अपनी गिरफ्तारी की संभावनाओं को देखते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने के कोशिश कर रहा है. वो खुद को इस संस्था का चेयरमैन बताने से भी इनकार कर रहा है. ऐसे परिस्थिति में इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था का चेयरमैन कौन है, माहेश्वरी को बताना होगा. उसने क्या किसी और को चेयरमैन बना दिया? यदि ऐसा है तो किस तरह यह धोखाधड़ी की गयी?

यह वही संस्था है जहाँ के संपादक नीरज बाजपाई, वरिष्ठ पत्रकार अशोक उपाध्याय (ऊपर तक पहुँच रखने वाला) और कर्मचारी यूनियन का नेता मोहन लाल जोशी दलित प्रताड़ना के मामले में तिहाड़ जेल की हवा खा चुके हैं. ऐसे कर्मचारियों को निकालने के बजाये उन्हें वर्तमान प्रबंधन सर आँखों पर बिठा रखा है. ऐसे chargesheeted बदनाम कर्मचारियों की UNI में तूती बोलती है. यहाँ आलम तो यह है कि यूनियन के नेता इस संस्थान को अपनी ऊँगली पर नचा रहा है और उसी के इशारों पर प्रबंधन कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहा है. महिला कर्मचारियों पर भी इनको टेढ़ी नज़र है.

अपने अखबार में करोड़ों का घोटाला करने और अपनी संस्था में लाखों गरीब का पैसा डकारने के बाद प्रफुल्ल माहेश्वरी अब UNI को भी बर्बाद करने पर तुला हुआ है. तभी तो इसने इस संस्था को एक गैरपत्रकार और भू माफिया विश्वास त्रिपाठी के हवाले कर दिया ताकि यहाँ भी उसका खेल चलता रहे. हालाँकि खुद को बचाने के लिए एक ग्रुप एडिटर का इंतजाम कर लिया गाया जिसके पास कोई पॉवर नहीं है और वह भी त्रिपाठी और यूनियन के इशारे पर ही काम कर रहा है. १४ माह के सैलरी बैकलॉग और हर महीने सैलरी नहीं मिलने के बावजूद यहाँ के कर्मचारी डर से बिना कुछ बोले काम करते चले आ रहे हैं और उन्हें इन सबके बावजूद और अधिक प्रताड़ित किया जा रहा है.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने दिनांक १४ फ़रवरी २०१४ को पत्र संख्या E/DL/978/Comp.I/EPFO/ By hand के जरिये UNI के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी, डायरेक्टर विश्वास त्रिपाठी, सुभाष शर्मा डायरेक्टर और श्रीपति औकोलेकर डायरेक्टर के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना नयी दिल्ली में एक आपराधिक मामला सेक्शन ४०६/४०९ ऑफ़ इंडियन पीनल कोड के तहत दर्ज करवाया है. यहाँ व्याप्त भ्रष्टाचार और धांधली के मामले केंद्रीय गृह मंत्रालय के संज्ञान में भी है

कर्मचारियों के भविष्य निधि का पौने सात करोड़ रुपया गबन करने के अलावा प्रबंधन कर्मचारियों के क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट सोसाइटी का पौने तीन करोड़ रुपया भी डकार गया है. सैलरी स्लिप पर हर माह कर्मचारियों के वेतन से क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट सोसाइटी के नाम पर पैसे काट लेने के बावजूद भी उन्हें कई वर्षों से इंटरेस्ट और लोन नहीं दिया गया और पैसे वापस मांगने पर लौटाए भी नहीं जा रहे हैं. इस संस्थान के कुछ कर्मियों के खिलाफ एक महिला पत्रकार के उत्पीड़न सम्बंधित मामलें में राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल पर दिल्ली पुलिस जांच कर रही है. इस संस्थान में महिला कर्मचारी आज भी पीड़ित हैं.

संस्थान के अन्य कर्मचारियों की हालत भी दयनीय है. सैलरी के आभाव में उन्हें घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है और इस परिस्थिति में तबादले की दोहरी मार भी कर्मचारियों को झेलनी पड़ रही है. भयवश कर्मचारी सैलरी नहीं मांग पा रहे अन्यथा उन्हें भी कहीं दूर फेंक दिया जायेगा और उनके परिवार की स्थिति भी आलमगीर साहब के परिवार जैसे ही हो जाएगी. सैलरी संकट और तबादला के कारण ही आलमगीर की इस वर्ष जून माह में आकस्मिक मौत हो गयी थी.

तालिबानी शासन के तहत जीने को मजबूर यहाँ के कर्मचारियों की मुक्ति के लिए सरकार, पीसीआई, राष्ट्रीय महिला आयोग, ह्यूमन राइट्स कमीशन, विभिन्न पत्रकार संघ, सांसदों, विधयाकों और राजनीतिज्ञों तथा अन्य संस्थानों को स्वत:स्फूर्त आगे आना होगा.

इसके लिए एक दिसम्बर को ‘सेव UNI मूवेमेंट’ की तरफ से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

By save UNI movement.

sujit kumar
[email protected]
 

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