सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में राहुल गांधी से सात दिन में जवाब तलब किया

कोर्ट ने कहा- हमारे फैसले में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई, भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने दायर की थी अवमानना याचिका

राफेल डील की पुनर्विचार याचिका पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई के लिए तैयार हो जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा यह कहे जाने पर कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया कि राफेल मामले में भ्रष्टाचार हुआ है,का संज्ञान लेते हुये उच्चतम न्यायालय ने राहुल को अवमानना नोटिस जारी करके 22 अप्रैल तक जवाब तलब किया है। उच्चतम न्यायालय ने राहुल गांधी से उनकी टिप्पणी पर 22 अप्रैल को या उससे पहले जवाब देने को कहा है। मामले की सुनवाई 23 अप्रैल को होगी ।

दरअसल, हाल ही में राफेल मामले में हो रही सुनवाई पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र की दलील खारिज करते हुए कहा था कि गोपनीय दस्तावेजों को सबूत माना जा सकता है और वह पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगा। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उसके फैसले में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। फैसला कानूनी सवाल पर आधारित था। राहुल के इस बयान के खिलाफ भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने याचिका दाखिल की है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी। कोर्ट ने राफेल मामले को लेकर कुछ दस्तावेजों की स्वीकार्यता तय की थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी ने इस अदालत का नाम लेकर राफेल सौदे के बारे में मीडिया व जनता में जो कुछ कहा उसे गलत तरीके से पेश किया। न्यायालय ने कहा कि राफेल मामले में दस्तावेजों को स्वीकार करने के लिए उनकी वैधता पर सुनवाई करते हुए इस तरह की टिप्पणियां करने का मौका कभी नहीं आया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई की पीठ ने कहा कि कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की, इसका मतलब है कि राहुल गांधी का बयान गलत है। पीठ ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी को गलत तरह से पेश किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका

उच्चतम न्यायालय ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। न्यायालय ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। इनमें कुछ गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी लगाई गई थीं। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से आपत्ति दर्ज कराई थी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियों को पुनर्विचार याचिका का आधार नहीं बनाया जा सकता। न्यायालय ने उनकी यह दलील खारिज कर दी थी।

उच्चतम न्यायालय के फैसले पर राहुल ने अमेठी में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने आज मान लिया कि राफेल मामले में कोई न कोई भ्रष्टाचार हुआ है। इस पर जांच हुई तो इसमें दो नाम आएंगे- नरेंद्र मोदी जी और अनिल अंबानी जी के। उन्होंने कहा- चौकीदार चोर है। देश के 30 हजार करोड़ रुपए चोरी करके अनिल अंबानी को दिए हैं।

मीनाक्षी लेखी का क्या था कहना?

मीनाक्षी लेखी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरह से पेश किया है। लेखी का आरोप था कि राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ बयान को इस तरह से पेश किया है जैसे वह उच्चतम न्यायालय का बयान हो। दरअसल, राहुल गांधी लगातार अपनी टिप्पणी ‘चौकीदार चोर है’ के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं।

इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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