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उत्तर प्रदेश

50 से अधिक सहायक प्रोफेसर भर्ती में स्कैम की हुई पुष्टि, कॉलेज में मचा हाय-तौबा

अरविंद कुमार सिंह-

चर्चित अल्पसंख्यक संस्था शिब्ली नेशनल कालेज आजमगढ़ में हुई 52 सहायक प्रोफेसर भर्ती घोटाले की तस्वीर डीएम की जांच रिपोर्ट आने के बाद अब साफ हो चुकी है। शिकायतकर्ता राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच के अध्यक्ष शशांक शेखर सिंह पुष्कर की एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 6-6 आरोपों की डीएम की तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने पुष्टि कर दी है। इसी के साथ नियुक्तियों में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद होना भी साबित हो गया है।

सबसे गंभीर सवाल तो यह कि चयन की प्रक्रिया ही पूरी नहीं की गई, बिना लिखित परीक्षा के आनन-फानन में सीधे साक्षात्कार करा, प्रबंध समिति के रिश्तेदारों, कुलपति के चहेतों की भर्तियां कर दी गई थीं। उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम और राजभवन की नियुक्ति में पारदर्शिता संबंधित 18 मई 2021के शासनादेश की जमकर धज्जियां उड़ाई गई।

जांच कमेटी की आख्या आ जाने के बाद सीएम कार्यालय और उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन के लिए भी पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करने के अतिरिक्त अब दूसरा कोई चारा नहीं बचा है।

बताते चलें कि मुख्यमंत्री द्वारा पिछले साल जनवरी 2023 में की गई घोषणा, अब प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा विभाग में नियुक्तियों के लिए अलग-अलग चयन आयोग नहीं रहेगा, बल्कि एक आयोग बनेगा। इधर घोषणा हो रही थी और शासन उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग बनाने की प्रक्रिया में संलग्न था। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के अल्पसंख्यक कालेजों में वर्षों से रिक्त पदों पर भी आनन-फानन में भर्तियां शुरू हो गईं। अकेले आजमगढ़ के शिब्ली कालेज में 55 पदों की अनुज्ञा प्रबंध समिति ने उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज से आनन-फानन में लेकर भर्तियां शुरू कर दिया।

भर्ती प्रक्रिया शुरू होतें ही भ्रष्टाचार और घोटाले की भी शुरुआत हो गई। 52 के करीब हुए सहायक प्रोफेसर की नियुक्तियों में जमकर नियमों को धज्जियां उड़ाई गईं, जिन अधिकारियों को पर्यवेक्षण या निगरानी करनी थी, वे भी इस भ्रष्टाचार की बहती गंगा में डूबकी लगाने लगे। उनके भी कैंडिडेट इस वैतरणी में पार होने लगे। भारी पैमाने पर धन उगाही और नियम विरुद्ध नियुक्तियां होने का आरोप लगाते हुए अनेक अभ्यर्थियों ने भी शिकायत की। उसी आवाज को राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच ने भी जोर शोर से उठाया। इसके अध्यक्ष शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 7 अगस्त से लगातार मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेटरी और राज्यपाल को लिखित शिकायतें भेजते रहे। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

बावजूद इसके वे हार नहीं माने और 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद से मिलकर शिब्ली भर्ती घोटाले की शिकायत की। सीएम के प्रमुख सचिव ने उसी दिन इस गंभीर प्रकरण की जांच करने के लिए कमिश्नर आजमगढ़ को आदेश दिया। कमिश्नर ने शासन के आदेश के अनुपालन में इसकी जांच के लिए जिलाधिकारी आजमगढ़ विशाल भारद्वाज को आदेश दिया। जिलाधिकारी ने रोहित कुमार अतिरिक्त मजिस्ट्रेट प्रथम आजमगढ़ के नेतृत्व में मुख्य कोषाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की जांच कमेटी गठित कर दिया।

इस कमेटी ने नियुक्त हुए सहायक प्रोफेसर की मैनेजमेंट से रिश्ते और सगे-संबंधियों की जांच उपजिलाधिकारी सदर से करायी, जिसमें एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर की जांच आख्या में भाई-भतीजावाद और सगे संबंधियों की नियम विरुद्ध नियुक्तियों की पुष्टि हो गई।

प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली के सगे भाई मो० कासिफ और बहनोई मो० अशरफ को भी सहायक प्रोफेसर बना दिया गया। शिबली को संचालित करने वाली संस्था दि आजमगढ़ मुस्लिम एजूकेशन सोसायटी ‘के चेयरमैन शौकत अली के पुत्र मोकर्रम अली की नियुक्ति उस फारसी विषय में कर दी गई जिसमें वर्षों से निर्धारित छात्र संख्या ही नहीं था। फिर अनुज्ञा कैसे मिल गई इसकी भी जांच हो तो, उच्च शिक्षा निदेशालय और मैनेजमेंट के सांठ-गांठ का भी पता चल जाएगा।

हालांकि, बताया जाता है उच्च शिक्षा निदेशक प्रयागराज प्रो ब्रम्हदेव और मैनेजमेंट के काफी करीबी रिश्ते थे। ब्रह्मदेव अपने रिश्ते को निभाते हुए 29 फरवरी को सेवानिवृत्त हो गए।

हायर एजुकेशन प्रयागराज की जांच कमेटी और कुलपति पर उठे सवाल!

जिलाधिकारी आजमगढ़ ने शासन और मंडलायुक्त दोनों को शिब्ली नेशनल कालेज आजमगढ़ में 52 सहायक प्रोफेसर भर्ती घोटाले कि जांच आख्या भेज दिया। रिपोर्ट आने के बाद जहां शिब्ली कालेज में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी बृजकिशोर त्रिपाठी और निदेशक उच्च-शिक्षा प्रयागराज पर भी सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर जब नियुक्ति प्रक्रिया ही अपूर्ण थी और चयन में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सगे संबंधियों की नियुक्तियां की गईं तो फिर नवनियुक्त 10 सहायक प्रोफेसरों की सैलरी कैसे पास कर दिया गया। पिछले 6 महिने में निदेशालय की जांच टीम ने क्या जांच किया।

जब शिकायतकर्ता शशांक शेखर सिंह पुष्कर पर लगे 6 से अधिक आरोपों की सीएम कार्यालय की जांच कमेटी ने पुष्टि कर दी और उनके आरोपों में सत्यता पायी गई तो फिर महाराजा सुहेल देव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ के कुलपति ने जानबूझकर जांच के दौरान ही 10 सहायक प्रोफेसर की नियुक्तियों को कैसे अनुमोदित कर दिया। आखिर जांच-पड़ताल की जिम्मेदारी तो विश्वविद्यालय को थी, और राजभवन ने भी उन्हें जांच कर आख्या भेजने का आदेश दिया था। ऐसे अनेक सवाल चर्चा में हैं। वहीं नवनियुक्त 52 सहायक प्रोफेसर नियुक्तियां अधर में लटकती नज़र आ रही हैं।

हालांकि, उच्च शिक्षा अनुभाग-6 उत्तर प्रदेश शासन के 25 अक्टूबर के आदेश पर उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के निदेशक ब्रह्मदेव ने शिब्ली की जांच के लिए संयुक्त निदेशक डॉ केसी वर्मा और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी बृजकिशोर त्रिपाठी की एक संयुक्त टीम गठित किया था। टीम ने अभी जांच की रिपोर्ट भी नहीं भेजी, कि जांच के दौरान 10 उन सहायक प्रोफेसर की सैलरी पास कर दिया, जिसकी जांच के लिए टीम गठित किया गया था। सवाल यह है कि क्या इस टीम को वित्तीय मामलों में निर्णय लेने का अधिकार था। जबकि जांच आख्या शासन को भेजा ही नहीं गया।

मामले की लीपापोती और प्रकरण में हायर एजुकेशन की टीम की भूमिका संदिग्ध होने पर एक बार फिर शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने मुख्यमंत्री और चीफ सेक्रेटरी को 23 जनवरी को लिखित शिकायत की, चीफ सेक्रेटरी के निर्देश पर उच्च शिक्षा अनुभाग-6 ने 22 फरवरी को एक बार फिर सीधे निदेशक उच्च-शिक्षा प्रयागराज और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी से आख्या तलब किया है। जिसको लेकर क्षेत्रीय अधिकारी और निदेशालय में भी हड़कंप मचा हुआ है।

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