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मध्य प्रदेश

इमेज सुधारने के लिए अब अख़बार मालिकों को पटाएंगे शिवराज सिंह

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार का प्रचार महकमा यानि जनसम्पर्क विभाग इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि को चमकाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। हालांकि जनसम्पर्क विभाग का मुख्य उद्देश सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचने का है, जिससे आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार का प्रचार महकमा यानि जनसम्पर्क विभाग इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि को चमकाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। हालांकि जनसम्पर्क विभाग का मुख्य उद्देश सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचने का है, जिससे आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

जब से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अस्तित्व में आई है, तब से सरकार के मुखिया शिवराज सिंह का ब्लड प्रेशर भी बढ़ गया है। उसका कारण यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजानिक मंच पर भले ही शिवराज सरकार की बुराई न करें लेकिन सच्चाई यह है कि मोदी को शिवराज फूटी आँख नहीं सुहाते। शिवराज शुद्ध रूप से लाल कृष्ण आडवाणी के गुट के है, कई अवसरों पर वह ये बात साबित भी कर चुके हैं। और जैसा मोदी का स्वभाव है वह जिसे ना पसंद करते है उसे अपने पास भी नहीं भटकने देते। शिवराज के मुख्यमंत्री रहते ऐसा कर पाना शायद मोदी के लिए संभव भी नहीं है।

यही कारण है की मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगने लगी। इसी के साथ अवसरवादी मीडिया ने अपने सुर बदल लिए और व्यापम घोटाले को हथियार बना कर मीडिया ने शिवराज सरकार पर हमले तेज़ कर दिए। इससे शिवराज सरकार की छवि धूमिल होने लगी और शिवराज को भी लगने लगा कि यदि समय रहते इस प्रचार पर अंकुश नहीं लगा तो वह दिन दूर नहीं जब उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतार कर घर बैठा दिया जायेगा।

शिवराज ने समय की नज़ाकत को भांप कर मीडिया को मैनेज करने के लिए सबसे पहले अपने नाकारा सीपीआर यानि जनसम्पर्क आयुक्त को बदला राकेश श्रीवास्व को हटाकर नए आयुक्त के रूप में अपने विश्वास पात्र एसके मिश्रा को जनसम्पर्क की कमान सौंपी। एसके मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना शुरू कर दिया और पहले चरण में प्रदेश के चुनिंदा अख़बारों के संपादकों को एक आलिशान होटल में भोज पर बुलाया, चर्चा है की इस भोज भारी राशि खर्च हुई, संपादकों ने सहयोग करने से हाथ उठा लिए सो अलग। कुछ समझदार संपादकों ने मुख्यमंत्री को सलाह दी की वह उनके मालिकों को बुलाकर बात करें तो बहतर होगा, अगले दिन अख़बार मालिको को भोज पर बुलाया गया कुछ अखबार मालिक दिल्ली से भी बुलाये गए, उनको बाक़ायदा हवाई जहाज़ से बुलाया गया और मंहगे होटलों में ठहराया गया। अब देखना यह है की मुख्यमंत्री की यह कोशिश कितनी कारगर साबित होती है।

 

भोपाल से अरशद अली खान की रिपोर्ट।

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