ये तो गिरफ़्तार हो गया लेकिन हज़ारों आवासीय समितियों पर काबिज बीजेपी के बाकी लंगड़ा त्यागियों का कुछ न बिगड़ेगा!

अमिताभ श्रीवास्तव-

कितना दिलचस्प है कि बुलडोज़र बाबा की उपाधि पा चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्मार्ट और क़ाबिल पुलिस को एक छुटभैये भाजपाई गुंडे ने गिरफ़्तारी से पहले जम कर छकाया । योगी जी की पुलिस को त्यागी को पकड़ने के लिये एड़ी -चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा । लंबी लुकाछिपी और प्रदेश सरकार और प्रशासन की काफी फ़ज़ीहत के बाद आज उसे मेरठ से पकड़ लिया गया। श्रीकांत त्यागी नाम का यह शख़्स नोएडा की ग्रैंड ओमेक्स सोसायटी में एक महिला से गुंडागर्दी के चलते सुर्खियों में आया था। नोएडा पुलिस ने वारदात के 48 घंटों के भीतर इसे पकड़ने का दावा किया था लेकिन श्रीकांत त्यागी न सिर्फ आज सुबह तक फ़रार था बल्कि लगातार अपनी लोकेशन बदलते हुए छुपता फिर रहा था। श्रीकांत त्यागी पर 25 हज़ार का ईनाम भी घोषित किया गया था।

श्रीकांत त्यागी का फ़ेसबुक पेज, उसका बीजेपी से संबंध, बीजेपी के अध्यक्ष समेत कई नेताओं से नज़दीकी की तस्वीरें बहुत कुछ इशारा कर रही हैं । नोएडा के सांसद महेश शर्मा ने समाचार चैनलों के कैमरों पर प्रदेश के गृह सचिव अवनीश अवस्थी से बात करते हुए इस मामले में पुलिस की ढिलाई पर अपनी नाराज़गी जताई थी और यह भी कहा था कि उन्हें शर्म आती है यह कहते हुए कि प्रदेश में हमारी यानी बीजेपी की सरकार है।

अगर समाचार चैनल ईमानदारी से और गहराई से पड़ताल करें और स्थानीय संवाददाताओं और अपराध संवाददाताओं को रिपोर्टिंग पर लगाएँ तो पाएँगे कि सत्ताधारी दल से नज़दीकी रखने वाले छुटभैये नेताओं की गुंडागर्दी का यह इकलौता मामला नहीं है। अच्छी खासी जनहित की एक सीरीज़ बन सकती है।

राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, इंदिरापुरम , मेरठ में बनी हज़ारों आवासीय समितियों पर बीजेपी से नज़दीकी रखने वाले छुटभैये क़िस्म के लोग काबिज़ हैं। बीजेपी के नेताओं के साथ फ़ोटो खिंचवा कर, उन्हें समारोहों में बुलाकर निवासियों पर रोब झाड़ने और उनका नाम लेकर दादागिरी करने के किस्से आम हैं। इनमें से तमाम लोग यूपी अपार्टमेंट एक्ट के प्रावधानों और आदर्श उप विधियों की धज्जियाँ उड़ाते हुए मनमाने ढंग से आरडब्लूए/एओए के पदाधिकारी बने हुए हैं, कई जगह वर्षों से चुनाव ही नहीं हुए हैं। हाईफाई सोसायटी प्रबंधन के नाम पर करोड़ों की लूट और हेराफेरी चल रही है। मेरठ स्थित डिप्टी रजिस्ट्रार का कार्यालय शिकायती फ़ाइलों से पटा पड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में हज़ारों मुक़दमे चल रहे हैं। लेकिन चूँकि राज्य सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता में यह सब नहीं है और मीडिया को भी इस तरह की खबरों में दिलचस्पी नहीं रहती इसलिए दादागिरी और गुंडागर्दी का यह शर्मनाक तमाशा जारी है।

मैं जिस हाउसिंग सोसायटी में रहता हूँ, वहाँ भी श्रीकांत त्यागी जैसे श्रीमान ने तीन साल पहले अवैध तरीक़े से और धाँधली करके आरडब्लूए पर कब्ज़ा कर लिया और अध्यक्ष बने हुए हैं । बीजेपी सांसद महेश शर्मा और विधायक पंकज सिंह से नजदीकियों के दावे, उनके साथ तस्वीरें, लोगों से गालीगलौज, गुंडागर्दी का बोलबाला है। तीन साल से हमारे यहाँ चुनाव ही नहीं हुए जबकि क़ानूनन हर साल आरडब्लूए का चुनाव होना चाहिए। मेरी शिकायत का संज्ञान लेकर डिप्टी रजिस्ट्रार ने चार महीने पहले चुनाव कराने का आदेश दिया और चुनाव अधिकारी नियुक्त किये। अब जाकर प्रक्रिया शुरू हुई है।

छुटभैये नेताओं की दबंगई के किस्से सिर्फ बीजेपी के राज में हो रहे हों ऐसा भी नहीं है। समाजवादी पार्टी के राज में भी यह सब होता था , खूब होता था। कांग्रेस ने भी खूब कुख्याति कमाई अपने समय में। मुद्दे की बात यह है कि नागरिकों को डरना नहीं चाहिए। गलत बात का खुलकर विरोध करना चाहिए। कोई भी मामला हो, किसी का भी मामला हो, किसी का भी राज हो।को



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