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सुख-दुख

लाइन पर लाने के लिए ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’!

तारा शंकर-

Silent Treatment मर्दों का एक पुराना हथियार रहा है महिलाओं को सज़ा देने का! ख़ासकर अपनी वाइफ़ को, बेटी को! ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ का मतलब है कि बात न करके, चुपचाप सामने वाले को अवॉयड करना, सामने होने के बावजूद ऐसे बिहैव करना जैसे कि सामने वाला एक्जिस्ट ही न करता हो! ये अक्सर इमोशनल एब्यूज जैसा ही होता है!

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ऐसा करके सामने वाले को सबक सिखाना, उसको उसकी जगह दिखाना या बात मनवाने पर मजबूर कर दिया जाता है! भारतीय परिवारों में सास द्वारा भी अपनी बहू का “दिमाग़ ठिकाने लगाने” के लिए ये टैक्टिक अपनाया जाता है!

जिसके साथ साइलेंट ट्रीटमेंट किया जाता है वो अक्सर अपराधबोध महसूस करने लगता है, घर में ही अलग-थलग महसूस करने लगता है अथवा कन्फ्यूज्ड हो जाता है कि उसने कौन सी ग़लती कर दी और फ्रस्ट्रेशन बढ़ने लगती है! आख़िर में तंग आकर, हार मानकर सरेंडर कर देता है ताकि रिश्ता ज़्यादा न बिगड़ जाये!

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ये हथियार अक्सर रिश्तों में या परिवार में डोमिनेंट पोजीशन में रहने वाला प्रयोग करता है! ये असल में वर्चस्व स्थापित करने वाला शक्ति प्रदर्शन ही है एक तरह से! साइलेंट ट्रीटमेंट रिश्तों में पुरुषों द्वारा महिलाओं को मानसिक यातना देने का बहुत पुराना हथियार रहा है!

हालांकि ये हथियार एक स्त्री भी कर सकती है जैसा कि ऊपर बताया कि सास बहू पर! लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में इसका प्रयोग प्रायः पुरुष करता है! जब महिला करती है पत्नी के रूप में तो वो अक्सर अपना दुःख महसूस करवाने के लिए, ध्यानाकर्षण हेतु अथवा कुछ सुविधायें bargain करने के लिए! पुरुष अक्सर इसे सज़ा देने के बतौर अथवा कण्ट्रोल करने के लिए करते हैं और महिलायें प्रायः बेहतर सलूक के लिए! महिलायें साइलेंट ट्रीटमेंट का इस्तेमाल अपना दुःख व्यक्त करने के लिए ज़्यादा करती हैं जबकि पुरुष जो रिश्ते में पहले ही डोमिनेंट पोजीशन में बैठा होता है, इसे इमोशनल एब्यूज के रूप में, अपनी असहमति, नाराज़गी दिखाने के लिए ज़्यादा करता है! भारतीय परिवारों में महिलाओं पर साइलेंट ट्रीटमेंट का बुरा और दूरगामी असर पड़ता है!

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ऑफिस में आपका बॉस आपके ख़िलाफ़ साइलेंट ट्रीटमेंट आपको नीचा दिखाने हेतु या ‘लाइन पर लाने’ के लिए करता है! याद रखें साइलेंट ट्रीटमेंट अक्सर डोमिनेंट पोजीशन वाला, सबओर्डीनेट पोजीशन वाले के विरुद्ध करता है!

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