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चिन्मयानंद प्रकरण : एसआईटी की विवेचना से इलाहाबाद हाईकोर्ट संतुष्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानन्द पर विधि छात्रा से दुष्कर्म के आरोपो की जांच कर रही एसआईटी की विवेचना पर संतोष जताया है। कोर्ट ने कहा कि जांच सही दिशा में बढ़ रही है। कोर्ट ने पीड़ित छात्रा की ओर से चिन्मयानंद से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने के मुकदमे में उसकी गिरफ़्तारी पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है। साथ ही 164 सीआरपीसी के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज बयान फिर से कराने या उसमे संसोधन के अनुमति देने से भी मना कर दिया है। राहत न मिलने से ब्लैकमेलिंग में कभी भी गिरफ्तार हो सकती है छात्रा।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर जांच की मॉनिटरिंग कर रही नायमूर्त्ति मनोज मिश्र और नायमूर्त्ति मंजू रानी चौहान के पीठ ने कहा कि याची के अदिवक्ता ऐसा कोई तथ्य नहीं दे सके जिससे कहा जा सके की मजिस्ट्रेट ने बयान रेकर्ड करने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट के समक्ष पीड़ित छात्रा ने दूसरी प्रार्थना यह की थी कि मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया बयान ठीक नहीं था और उसे नया बयान दर्ज कराने की अनुमति दी जाए लेकिन कोर्ट ने उसकी यह प्रार्थना भी स्वीकार नहीं की।

कोर्ट का कहना था कि नए बयान के लिए आवेदन में संबंधित मजिस्ट्रेट के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है और न ही पीड़ित छात्रा का नया बयान दर्ज कराने के लिए कोई प्रावधान दर्शाया गया है। केवल यह आरोप लगाया गया है कि उसके बयान के प्रत्येक पेज पर उसके हस्ताक्षर नहीं लिए गए और केवल अंतिम पेज पर हस्ताक्षर लिए गए। उसका बयान दर्ज किए जाते समय एक महिला मौजूद थी। इस पर अदालत ने कहा कि उस महिला द्वारा किसी तरह का हस्तक्षेप किए जाने संबंधी आरोप न होने से ऐसा लगता है कि चैंबर में महिला की मौजूदगी केवल इसलिए थी, ताकि पीड़ित छात्रा अपना बयान दर्ज कराने के दौरान सहज और सुरक्षित महसूस कर सके।

एसआईटी की और से शासकीय अधिवक्ता और अपर शासकीय अधिवक्ता ए के सड ने कोर्ट को बताया कि आरोपी चिन्मयानन्द को गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़िता और रंगदारी मांगने के आरोपी संजय के बीच 40200 बार मोबाइल पर बात हुई है। चिन्मयानन्द और पीड़िता के बीच भी मोबाइल पर काफी बात हुई है। संजय ने फ़र्ज़ी नंबर से चिन्मयानन्द के व्हाट्स ऍप पर मैसेज भेज कर रंगदारी मांगी थी।

प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट से मांग की कि मामले की सुनवाई चैम्बर में की जाय। स्वामी चिन्मयानन्द के वकील दिलीप कुमार ने इस पर आपत्ति की और कहा कि एसआईटी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जानकारी दे रही है। इस मामले में गोपनीयता की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने चैम्बर में सुनवाई की मांग नहीं मानी।

इससे पूर्व एसआईटी ने अदालत के समक्ष एक सीलबंद लिफाफे में जांच की प्रगति रिपोर्ट और केस डायरी पेश की। इस प्रगति रिपोर्ट का सारांश देखने के बाद अदालत ने पाया कि एसआईटी की जांच सही ढंग से चल रही है और पीड़ित छात्रा ने अपने आवेदन में एसआईटी द्वारा जांच मंआ किसी तरह की अनियमितता का आरोप नहीं लगाया है। इस मामले की सुनवाई के समय पीड़ित छात्रा भी अदालत में मौजूद थी। अदालत ने चिन्मयानंद मामले में एसआईटी की प्रगति रिपोर्ट पर संतोष जताया और आगे की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 22 अक्तूबर की तारीख तय की।

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