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बिहार में बिजली को लेकर सर्वे : 47% लोगों ने कहा- स्मार्ट मीटर लगने से 30% बढ़ गया है बिजली बिल

पटना : बिहार सामाजिक अंकेक्षण के सदस्य बब्लू प्रकाश ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से एक सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट जारी कर कहा कि बिहार की जनता ने बिहार सामाजिक अंकेक्षण की टीम द्वारा कराये गए सर्वेक्षण में स्मार्ट मीटर को एक सिरे से खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में स्मार्ट मीटर एवं बिजली से संबंधित परेशानियों को जानने के लिए 15 जनवरी 2022 से बिहार सामाजिक अंकेक्षण की विशेष टीम एवं आइडिजिनेक्स्ट डिजिटल मार्केटिंग, पटना के सहयोग से जनता से रायशुमारी की गई सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी राय ली गई। इस संबंध मे बिहार सोशल ऑडिट की टीम ने कुछ प्रश्नोत्तर तैयार कर एक नागरिक रिपोर्ट कार्ड बनाने की कोशिश की है।

बिहार सोशल ऑडिट टीम के द्वारा इस सामाजिक अंकेक्षण मे रिपोर्ट बनाने के लिए जिन सवालों को प्राथमिकता दी गयी है उनमे से कुछ मुख्य सवाल इस प्रकार हैं:

1) क्या आप बिहार के बिजली विभाग की हेल्पलाइन नंबर 1912 से संतुष्ट हैं ?

2) क्या स्मार्ट मीटर लगने के बाद से आपका बिजली का बिल ज्यादा आने लगा है ?

3) क्या स्मार्ट मीटर के साथ आपके मीटर का एम॰आर॰टी॰सी॰ (मीटर रीडिंग टेस्ट सर्टिफिकेट) दिया गया है?

4) क्या आपको पता है की अन्य राज्य के मुक़ाबले बिहार की बिजली की दर ज्यादा है ?

बिहार सामाजिक अंकेक्षण टीम के आंकड़े के मुताबिक 64 हजार लोगों ने इसमें हिस्सा लिया है। जिसमे 56% बिजली उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1912 से असंतुष्ट पाये गए हैं, वहीं 33% लोगो का कहना है की 1912 पर कोई जवाब नहीं मिलता है। 11% लोग हेल्पलाइन नम्बर से संतुष्ट हैं।

अंकेक्षण के अगले सवाल की बात करें तो 47% प्रतिशत लोगों ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिल में 30% तक बढ़ गया है, वहीं 28% प्रतिशत लोगों ने 20 से 30% तक की बढ़ोत्तरी बताई है और 19% लोगों ने 10 से 20% तक की बढ़ोत्तरी की बात कही है। मात्र 6% प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने ये कहा है की उनका बिजली का बिल स्मार्ट मीटर लग जाने के बाद भी नहीं बढ़ा है।

सामाजिक अंकेक्षण के अगले सवाल में एक बात प्रमुखता से सामने आई है की 86% लोग ऐसे हैं जिन्हे मीटर रीडिंग टेस्ट (एम.आर.टी) के बारे मे कुछ भी पता नही है और ना ही ऊर्जा विभाग के द्वारा बताया गया है। जबकि 11% उपभोक्ता कहते हैं कि वो इसके बारे मे जानते थे लेकिन जब उन्होंने सम्राट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनी से मीटर की एम.आर.टी द्वारा की गई जांच सर्टिफिकेट मांगा तो उन्हें नही दिया गया। 3% प्रतिशत लोगो ने बताया है की उन्हे एमआरटी सर्टिफिकेट मिला है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 85% बिहार की जनता यह जानती है कि बिहार में बिजली दर बाकी राज्यों से महंगी है। मात्र 15% लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है। बात रेटिंग की करे तो सर्वेक्षण मे शामिल 71% लोगो ने बिहार के बिजली विभाग को बुरा बताया है। 01 पॉइंट की रेटिंग दी है। 15.1% लोगों ने 02 पॉइंट की रेटिंग दी है, 8.4 % लोग ऐसे हैं जिन्होने 03 पॉइंट की रेटिंग दी है, 2 % लोग ऐसे हैं जिन्होने 04 पॉइंट की रेटिंग दी है और 3.4 % उपभोक्ता ऐसे भी है जिन्होने बिहार के बिजली विभाग को बहुत अच्छा बताते हुये उन्हे 05 (सबसे अच्छा) पॉइंट की रेटिंग दी है।

बिहार सोशल ऑडिट टीम के सदस्य बबलू प्रकाश ने बताया कि बिहार की जनता बिजली की व्यवस्था से नाराज हैं ये बात अंकेक्षण रिपोर्ट में साफ साफ देखा जा सकता है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर बिजली कंपनी के लिए वरदान साबित हो गई है वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद अपना बिजली बिल बढ़ा हुआ बता रहे हैं। उपभोक्ता यह भी आरोप लगा रहे हैं कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर एमआरटी द्वारा सर्टिफिकेशन नही किया गया है।

बबलू कहा कि ऊर्जा विभाग को बिहार की जनता को बताना चाहिए कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी ने सॉफ्टवेयर से लेकर एचईएस, एमडीएम सिक्योर्टी मीटर का यूजर एक्सेप्टेंस टेस्ट (UAT) से पूर्णतया पास है ? यदि पास है तो उपभोक्ताओं को उसका सर्टिफिकेट भी दिया जाए। क्योंकि बिहार की जनता सशंकित है। एक समय था जब लोग अपने घरों में सौ वाट का बल्ब जलाते थे। फिर सीएफएल जलाने लगे और अब 9 वाट का एलएडी बल्ब जला रहे हैं लेकिन बिजली का बिल कम होने की जगह बढ़ गया है।

डॉ पंकज गुप्ता ने कहा कि बिहार पहले से ही अन्य विकसित राज्यों से ज्यादा बिजली दर का भार झेल रही है वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर लगाकर सरकार लोगों की परेशानी को बढ़ाने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि देश के अन्य विकसित प्रदेशों (उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, गोवा, तमिलनाडु तथा गुजरात) में बिजली न्यूनतम 1.50 रूपए से अधिकत 6.20 रूपए के दर से मिल रही है वहीं बिहार में बिजली दर 6.05 से 7.70 रूपए तक है।

संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर से कटने वाली राशि और बाकी चीजों को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं। उनके पास शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है। ऐसे में सूबे की सरकार बिहार की जनता को बिजली का करंट लगाने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा विभाग, बिहार में बिजली की दर एक बार फिर नए सिरे से तय करने जा रही है। विनियामक आयोग इस मामले को लेकर सुनवाई कर रहा है और उसके बाद बिजली की नई दरों को लेकर फैसला किया जाएगा। ऐसे में जहां एक तरफ बिजली कंपनी का राजस्व संग्रह आयोग के लिए भी शुभ संकेत है तो वहीं दूसरी तरफ से उपभोक्ताओं की परेशानी पर भी आयोग को ध्यान देना होगा।

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