सुब्रत रॉय ने सहारा मीडिया में सेलरी और अन्य ख़र्चों के संबंध में की बड़ी घोषणा

सुब्रत राय ने सहारा मीडिया के लिए दो बड़ी घोषणाएँ की हैं। मीडिया कर्मियों (प्रिंट और टीवी) की सेलरी का दायित्व तो सहारा समूह वहन करेगा लेकिन मीडिया के अन्य ख़र्चों को खुद सहारा मीडिया को वहन करना होगा।

एक सरकुलर में उन्होंने कहा है कि तनख़्वाह मुख्यालय दे देगा लेकिन न्यूज़ प्रिंट, बिजली/ पानी से लेकर चैनल डिस्ट्रिब्यूशन वग़ैरह तक के सारे खर्चे मीडिया को खुद निकालने होंगे।

मतलब सेलरी तो दिल्ली से सभी अखबारी यूनिट व सारे न्यूज़ चैनलों को भेज दी जाएगी। लेकिन अन्य जरूरतों जैसे न्यूज़ प्रिंट कलर डीटीएच प्रसारण आदि खर्च को सभी यूनिट सभी चैनल अपने स्तर से ही पूरा करेंगे। यानि खुद कमाओ खुद चलाओ।

सहारा ग्रुप के चेयरमैन श्री सुब्रत राय (सहाराश्री) का अपने अख़बार और टीवी के कर्ताधर्ताओं से साफ़ कहना है कि मीडिया के सभी कामगारों की तनख़्वाह के अलावा बाक़ी सभी खर्चे मीडिया के व्यापार से ही निकालने होंगे.

देखें आदेश की कॉपी-

इस पत्र के निहितार्थ यूँ हैं-

  1. अब मीडिया को केवल सेलरी मदर डिवीजन से मिलेगा। अन्य खर्चे यूनिटों को स्वयं उठाना होगा।
  2. जो लोग मीडिया प्रबंधन के उच्च पदों पर बैठे हैं उन्हें 1अक्टूबर तक सुधार करने की चेतावनी दी जा रही है। अन्यथा ऐसे लोगों के स्थान पर नये लोगों को तैनात करके मौका दिया जायेगा।
  3. मीडिया के खर्चे के लिये चेयरमैन आफिस से कोई पत्र व्यवहार न किया जायेगा।
  4. केवल सेलरी एडवांस ही विशेष परिस्थितियों में मदर कंपनी से दिया जायेगा।
  5. सेलरी के अलावा सभी ख़र्च मीडिया प्रिंट व इलेक्ट्रानिक यूनिटें स्वयं वहन करें।



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Comments on “सुब्रत रॉय ने सहारा मीडिया में सेलरी और अन्य ख़र्चों के संबंध में की बड़ी घोषणा

  • Arun Srivastava says:

    नोएडा। दमन-उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ खबर लिखने वाले खबरनबीस बृहस्पतिवार को खुद खबर बनकर रह गए हैं। ऐसा ही कुछ हो रहा है और वर्षों से हो रहा है सहारा मीडिया के कर्तव्ययोगियों (सहारा प्रबंधन किसी को कर्मचारी नही सबको कर्तव्ययोगी कहता है) के साथ। समय पर वेतन न मिलने के विरोध में अपने प्रबंधन के खिलाफ राष्ट्रीय सहारा नोएडा के खबरिया चैनल के कर्तव्ययोगी कामकाज ठप कर धरने पर बैठ गए हैं इनके पीछे प्रिंट मीडिया के साथी भी लामबन्द हो रहे है। 
    गौरतलब है कि समय से काम लेने किंतु समय पर वेतन न देने की परंपरा कोई नयी नहीं। जब से इनके सहारा श्री तिहाड़ी हुए हैं तबसे वेतन अनियमित कर दिया गया बाद में आधा करते करते दो स्लैब तीस और पचास हजार कर दिया गया। यही नहीं प्रबंधन सेवानिवृत्ति होने वालों को भी आश्वासन ही दे रहा है। सैलरी एडवांस, फेस्टिवल एडवांस, अतिरिक्त पेपर की सुविधा, कैंटीन की सुविधा कर्मचारियों के लिए सपना हो गया है।
    प्रसंगवश, हाल फिलहाल राष्ट्रीय सहारा में उप संपादक के लिए साक्षात्कार हुए। 14 लोगों ने शिरकत की। जब उन्हें यह बताया गया कि, हमारे यहाँ समय से वेतन नहीं मिलता तो सबके सब नौ दो ग्यारह हो गए। काश यह घोषणा सुब्रत राय पहले कर देते तो साक्षात्कार के लिए जो 14 लोग आये थे उसमें से तो कुछ तो रुक गए होते।

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  • शक्ति प्रकाश says:

    Sahara Sri ने गलती किया जिसका खामियाजा भुगत रहे हैं

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  • Ramkuber chaurasiya says:

    सहारा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
    सदस्यता संख्या: 610885000100 राम कुबेर चौरसिया
    सदस्यता संख्या: 10883700859 राम कुबेर चौरसिया
    सदस्यता संख्या: 10881601703 राम कुबेर चौरसिया
    सदस्यता संख्या: 108842042066 राम कुबेर चौरसिया

    टोटल 4 पॉलिसी है जिसमे मेरा पैसा बिना ब्याज का 39500 है जैसा भी हो जल्‍द से जल्‍द मेरा ही पैसा दे दो इंट्रेस्‍ट नहीं चाहिए

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  • Arun Srivastava says:

    क्या यह आंदोलन का असर है : सहारा मीडिया के कर्मचारी वेतन न मिलने के विरोध में बृहस्पतिवार को धरने पर बैठे थे। सहारा में सालों से नियमित वेतन नहीं मिलता रहा है। जो मिल रहा है वो भी आधा-आधूरा। सारी सुविधाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। 2017 से कर्मचारियों का PF भी नहीं जमा किया गया है। सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों को बकाया नहीं दिया जा रहा है। रही बात अपना खर्च निकालने की तो न अखबार का सर्कुलेशन है न चैनल की कोई TRP. कुल मिलाकर सहारा मीडिया न 3 मे है न 13 में। कमर्शियल विज्ञापन है नहीं सरकारी से कितना कमा पाएगा मीडिया यह विचारणीय है।

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  • Ram murti rajut says:

    सहारा सुब्रत रॉय से मैं कहना चाहूंगा कि ।मेरे को मेरा पैसा चाहिए अब बहुत नोटंकी हो गयी जनता को पागल बना के रखा है500000 rs h

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