Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

बिहार

बिहार में मखौल बना सूचना आयोग

बिहार में सूचना आयुक्त की बहाली गुड्डे-गुड़िया का खेल बन गया है। सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए न तो कोई विज्ञापन जारी होता है और न ही इसकी सार्वजनिक रूप से कोई सूचना ही सरकार की ओर से जारी होती है। सरकार की मर्जी, जिसे चाहा बहाल कर लिया। सरकर की नजर में सेवानिवृत्त प्रशासनिक पदाधिकारी पहली पसंद है। पत्रकारों को तो सरकार तवज्जो देती ही नहीं है जबकि कई राज्यों में अनुभवी पत्रकारों को प्राथमिकता दी जाती है।

बिहार में सूचना आयुक्त की बहाली गुड्डे-गुड़िया का खेल बन गया है। सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए न तो कोई विज्ञापन जारी होता है और न ही इसकी सार्वजनिक रूप से कोई सूचना ही सरकार की ओर से जारी होती है। सरकार की मर्जी, जिसे चाहा बहाल कर लिया। सरकर की नजर में सेवानिवृत्त प्रशासनिक पदाधिकारी पहली पसंद है। पत्रकारों को तो सरकार तवज्जो देती ही नहीं है जबकि कई राज्यों में अनुभवी पत्रकारों को प्राथमिकता दी जाती है।

बिहार में सूचना आयूक्त या मुख्य सूचना आयुक्त का चयन त्रिसदस्यीय समिति करती है। इसमें मुख्यमंत्री और उनके द्वारा नामित मंत्री के अलावा प्रतिपक्ष के नेता सदस्य होते है। अभी मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, वित मंत्री विजेन्द्र यादव ओर  बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिषोर यादव चयन समिति के सदस्य हैं। सूचना का अधिकार कानून 2005 के तहत राज्यों को 10 सूचना आयुक्त बहाल करना  था। बिहार में 8 जून 2006 को सूचना आयोग का गठन हुआ। इसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त के पद का सृजन किय गया। इसके बाद 30 अगस्त 2007 को दो और सूचना आयुक्त के पद का सृजन किया गया। अर्थात पांच सदस्यीय आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और चार आयुक्त होंगे। लेकिन सरकार ने कभी एक साथ सभी पदों पर बहाली नहीं की। इस साल सरकार ने सूचना आयुक्त के दो पद को एवालिष कर वापस कर लिया।  अब सरकार की मर्जी जितने पद को स्वीकृति प्रदान करे या मंजूरी देकर वापस कर ले। हाल के दिनों में कुछ ऐसा ही हुआ है। दरअसल सरकार एक साथ एक से अधिक सूचना आयुक्तों की बहाली करती ही नहीं है। अब तक जो चुनाव हुए उसमें एक-एक आयुक्तों की ही बहाली हुई। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि यदि एक साथ दो या तीन आयुक्तों की बहाली की गयी तो विपक्ष को एक-दो  पद देना ही पड़ेगा।

बिहार में अभी एक मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त है। 10 नवंबर 2014 को मुख्य सूचना आयुक्त आरजेएम पिल्लइ का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। फिलहाल दो सूचना आयुक्त रिटायर्ड आइएएस अधिकारी विजय कुमार वर्मा और भारतीय सूचना सेवा के रिटायर्ड अरूण कुमार वर्मा कार्यरत है। बिहार से छोटे राज्यों में सूचना आयुक्तों की संख्या बिहार से अधिक है। जानकारी के अनुसार आन्ध्र प्रदेष में 9, अरूणाचल प्रदेष में 5, गुजरात में 5, हरियाणा में 10, कर्नाटक में 5, केरल में 5, मध्यप्रदेष में 6, महाराश्ट्र में 7, पंजाब में 10, तमिलनाडू में 5 और उत्तराखं डमें 6 सूचना आयुक्त के पद पर लोग कार्यरत है। बीते माह 12 दिसम्बर 2014 को मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर बहाली के लिय चयन समिति की बैठक में सरकार की ओर से इस पद के लिए कोई नाम नहीं पेष किया गया क्योंकि इससे पूर्व ही बिहार विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता और समिति के सदस्य श्री नंद किषोर यादव सूचना आयुक्त के पांच पदों को घटा कर तीन पद करने का सवाल उठा दिया। श्री यादव का कहना था कि राज्य में सूचना के अधिकार के तहत लंबित मामलों की संख्या बढ़ कर 35 हजार से अधिक हो गयी है ऐसे में इसका निश्पादन कैसे होगा, सरकर पहले यह बताये।  बिहार में सूचना आयोग के उड़ रहे मखौल पर श्री यदव ने संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर आरोप किया कि सरकार सूचना के अधिकार को निश्प्रभावी बनाना चाहती है। क्येंकि यदि सारी सूचनाओं का उत्तर देना पड़ा तो सुषासन की पोल खुल जायेगी। श्री यादव के अनुसार 31 मार्च 2012 तक सूचना के अधिकार के तहत लंबित मामलों की संख्या मात्र 2494 थी जिसकी संख्य बढ़ कर अब 29,875 हो गयी है।

पटना से एक पत्रकार द्वारा प्रेषित रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन