प्रभात खबर में काम करते हुए एक दशक पूरे होने पर सुमित ने क्या लिखा, पढ़िए

सुमित सिन्हा-

एक नवंबर 2022 को प्रभात खबर पटना में पत्रकारिता का एक दशक पूरा हो गया. तत्कालीन कॉरपोरेट एडिटर राजेंद्र तिवारी सर और स्थानीय संपादक प्रमोद मुकेश सर की मंजूरी के बाद एक नवंबर 2012 को प्रभात खबर के बोरिंग रोड स्थित कार्यालय में योगदान दिया था.

इस एक दशक में अखबार ने कई जिम्मेदारियां दी. सबसे पहले पटना सिटी रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा बनाया. संयोग रहा कि एक साल बाद ही यानि 2013 में तत्कालीन स्थानीय संपादक पंकज मुकाती ने चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी सौंप दी. पांच साल तक लगातार चीफ रिपोर्टर के रूप में अपनी भूमिका अदा करने के बाद 2018 में तत्कालीन स्थानीय संपादक सचिन शर्मा ने मुझे ब्यूरो टीम का हिस्सा बनाया. फिर एक साल बाद ही यानि 2019 में व्यवस्था में बदलाव होने पर तत्कालीन स्थानीय संपादक अजय कुमार ने पुन: मुझे चीफ रिपोर्टर की जिम्मेदारी दे दी.

अगले दो साल तक सिटी टीम से जुड़े रहने के बाद 2021 में पुन: स्टेट ब्यूरो में शामिल हुआ और अभी कार्यरत हूं. इस दशक की सबसे बड़ी खास बात रही कि इन दौरान आधा दर्जन से अधिक संपादकों राजेंद्र तिवारी, प्रमोद मुकेश, पंकज मुकाती, सचिन शर्मा, अजय कुमा, रजनीश उपाध्याय और मिथिलेश सर के साथ काम करने का अनुभव मिला. सिटी और ब्यूरो टीम के दर्जनों साथियों के साथ रिपोर्टिंग की व अनुभव बांटे. पत्रकारिता के कई पक्षों से रूबरू हुआ. लेकिन, यह दशक बिलकुल अनप्लांड था.

दो महीने बाद यानि सात जनवरी 2023 को मेरे पत्रकारिता कैरियर के भी 18 वर्ष पूरे हो जायेंगे. इनमें प्रभात खबर के दस वर्षों के साथ ही हिंदी दैनिक आज के सात साल और राष्ट्रीय सहारा पटना में की गयी एक साल की रिपोर्टिंग भी शामिल है. इन 17-18 वर्षों में पत्रकारिता के मूल स्वरूप में काफी बदलाव आया है. रिपोर्टिंग का तरीका व इसके माध्यम बदले हैं.

2005 में जब पत्रकारिता की शुरुआत की थी तो उस वक्त ग्रेजुएशन भी कंपलीट नहीं हो सका था. उस वक्त की रिपोर्टिंग में प्रिंट पत्रकारिता का जो वजन था, वह नहीं रहा. तब पत्रकार सम्मेलनों में प्रिंट के संवाददाता अग्रिम पंक्तियों में दिखते थे. अधिकतम तीन से चार इलेक्ट्रॉनिक चैनल ही दिखते थे. मगर वर्तमान वेब पत्रकारिता के दौर में सब कुछ बदल चुका है.

ट्राइपोड और मोबाइल रिपोर्टिंग के हंगामे के बीच प्रिंट पत्रकारों की सवाल पूछने की स्थिति ही नहीं रह गयी है. ऐसे में पत्रकारिता कैरियर के इस पड़ाव पर आगामी दस वर्षों यानि भविष्य की रूपरेखा पर सोच रहा हूं. इसके लिए वरिष्ठों व सहयोगियों की सलाह का आकांक्षी हूं.

आपका
सुमित सिन्हा



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