आनंद पांडे को दैनिक भास्कर में कल्पेश याग्निक की जगह मिलेगी, हुआ ट्रांसफर

जानकारी मिली है कि दैनिक भास्कर, दिल्ली के संपादक आनंद पांडेय का तबादला भोपाल कर दिया गया है. सूत्रों का कहना है कि कल्पेश याग्निक के निधन से खाली हुए पद पर आनंद पांडेय को बिठाया जाएगा. दैनिक भास्कर के भोपाल आफिस में नेशनल आइडिएशन न्यूज रूम की कमान आनंद पांडेय को दी जाएगी. कृपया …

…तो ये है आनंद पांडे की नईदुनिया छोड़ने की वजह!

पत्रकारिता जगत में अभी आनंद पांडे का नईदुनिया से इस्तीफा गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसने भी इस खबर को सुना, चौंक गया। आनंद पांडेय के फ़ोन घनघनने लगे। जो उन्हें सीधे कॉल नहीं कर सकते थे, वो करीबियों से पर्दे के पीछे की कहानी समझने की कोशिश करते रहे। अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। लेकिन हकीकत किसी को पता नहीं कि आखिर इस्तीफा हुआ क्यों? इसके लिए थोड़ा बैक ग्राउंड जानना जरूरी है। नवंबर 2014 में पांडे जी ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दिया था। उस वक़्त वो भास्कर ग्रुप में शिखर पर थे। उनकी तेज तर्रार कार्यशैली के भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल इतने प्रभावित हुए कि उनका प्रमोशन पर प्रमोशन होता गया। एडिटोरियल से लेकर ब्रांड और अवार्ड organising कमिटी के वो मेंबर बन गए। हर महत्वपूर्ण इवेंट के लिए उनकी राय ली जाने लगी। पांडेजी के बढ़ते कद से ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक तक को अपनी कुर्सी का खतरा महसूस होने लगा।

नईदुनिया के समूह संपादक आनंद पाण्डे को माधव राव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के लिए चुना गया

शख्सियत ऐसी कि पुरस्कार नगण्य हो गए…. नईदुनिया के समूह संपादक आनंद पाण्डे को माधव राव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के लिए चुना गया। पहले मन हुआ कि मोबाइल लगाऊं और बधाई दूं। फिर थोड़ा रुका और सोचा कि क्या यह पुरस्कार उनके पत्रकारिता के जुनून, ईमानदारी, समर्पण से ज्यादा है? क्या कोई भी पुरस्कार ऐसा है जो उनके समर्पण के बदले दिया जा सके? हाथ नंबर डायल करते-करते रुक गए। मैं राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार के कद की बात नहीं कर रहा हूं। बेशक ऐसा पुरस्कार पाना किसी भी पत्रकार के लिए गर्व की बात है। मैं तो बात कर रहा हूं कि आधुनिक दौर में पत्रकारिता की साख को जिंदा रखने वाले शख्स की, जिससे पुरस्कार खुद गौरान्वित हो जाता है।

नईदुनिया में इन दिनों पौरस के हाथी की भूमिका कौन निभा रहा है?

नईदुनिया, इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने नईदुनिया को अलविदा कहने के बाद अपने त्यागपत्र के साथ उन्होंने जो पत्र अपने साथियों को वाट्सएप के माध्यम से भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है. अरविंद दो साल से वरिष्ठ विशेष संवाददाता थे. एक साल से सिटी हेड की भूमिका निभा रहे थे.

आनंद पांडे ने कहा सेल्फी मेरी जिद तो रिपोर्टर ने कहा- यह पकड़ो मेरा इस्तीफा

नईदुनिया के एमपी स्टेट हेट आनंद पांडे को एक रिपोर्टर ने आईना दिखा दिया। पांडे ने कुछ दिन पहले रिपोर्टरो को फरमान सुनाया कि वे जहां भी रिपोर्टिंग के लिए जाएं वहां से अपना सेल्फी नईदुनिया के संपादकीय टीम के आफिशियल वाट्सएप ग्रुप पर डालें। उनका यह फरमान सुनकर रिपोर्टर भौचक रह गए थे। पहले दो तीन दिन को कुछ रिपोर्टरों ने इसका पालन किया पर जब मीडिया जगत में इसकी खबर फैलने के बाद उनकी हंसी उड़ने लगी और यह कहा जाने लगा कि क्या आप लोगों पर संपादक को भरोसा नहीं है तो रिपोर्टरों ने सामूहिक रूप से फैसला लेकर सेल्फी डालना बंद कर दिया।

पंकज मजपुरिया ‘पीपुल्स समाचार’ से ‘दबंग दुनिया’ सीईओ बनकर आए

‘पीपुल्स समाचार’ के इंदौर संस्करण को लेकर अभी तक कई प्रयोग हो चुके हैं. पिछले दिनों ‘पीपुल्स समाचार’ ने मार्केटिंग के एक प्रयोगधर्मी पंकज मजपुरिया को कमान सौंपी थी. पंकज ने करीब तीन-चार महीने तक उठापटक भी की. ताजा खबर है कि पंकज मजपुरिया ‘पीपुल्स समाचार’ छोड़कर ‘दबंग दुनिया’ में पहुँच गए. उन्हें सीईओ बनाया गया है, जो पहले प्रवीण खारीवाल थे. पंकज मजपुरिया दैनिक भास्कर, नईदुनिया, फ्री प्रेस समेत इंदौर के करीब सभी अख़बारों में अपने प्रयोग कर चुके हैं. देखना है कि ‘दबंग दुनिया’ में वे क्या कमाल कर पाते हैं.

भास्कर ने तीन संपादकों आनंद पांडेय, सुनील शुक्ला और मनोज प्रियदर्शी को ब्लैक लिस्ट किया

दैनिक भास्कर नित नए खेल करने में माहिर है। वरिष्ठ पदों पर कार्यरत तीन पत्रकारों – आनंद पांडे, सुनील शुक्ला, मनोज प्रियदर्शी के इस्तीफों से जबर्दस्त खफा भास्कर प्रबंधन ने एक इनहाउस मेल भेजकर तीनों को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। शायद ऐसा, कम से कम हाल के दिनों में तो पहली बार हुआ है कि किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने से खफा प्रबंधन ने उन्हें ब्लैकलिस्ट किया हो।

आनंद पांडे का ओहदा इसलिए सिकुड़ गया!

जब ‘नईदुनिया’ में आनंद पांडे की आमद हुई, तो समझा गया था (और यही सच भी था) कि वे श्रवण गर्ग की जगह लेंगे, यानी चीफ एडीटर होंगे और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के सभी 6 एडीशन संभालेंगे. लेकिन, बाद में आनंद पांडे को सिर्फ मध्यप्रदेश का ग्रुप एडीटर (वास्तव में स्टेट हेड) बनाया गया. अंदर की ख़बरों के मुताबिक ये फैसला ‘नईदुनिया’ रायपुर के एडीटर रुचिर गर्ग की आपत्ति के कारण किया गया.

आनंद पांडे ने ‘नईदुनिया’ ज्वाइन किया

‘भड़ास’ ने 17 नवंबर को खबर दी थी कि ‘आनंद पांडे संभालेंगे नईदुनिया को’. ये बात सही निकली. 24 नवंबर को आनंद पांडे ने बतौर चीफ एडीटर ‘नईदुनिया’ ज्वाइन कर लिया. आनंद पांडे के फिर ‘नईदुनिया’ में प्रवेश के पीछे विनय छजलानी का हाथ माना जाता है. ये संभावना इसलिए जाहिर की जा रही है क्योंकि ‘नईदुनिया’ में भले ही जागरण ग्रुप की मिल्कियत है, पर अभी भी विनय छजलानी के पास कुछ हिस्सेदारी है.