अमर उजाला ने ‘आतंकी सरकार’ लिख दिया!

रवीश कुमार-

क्या अख़बार उस दिन भी आतंकी सरकार लिखेंगे जब भारत सरकार का प्रतिनिधि तालिबान सरकार से मिलेगा? क्या तब अख़बार लिख पाएँगे कि मोदी सरकार ने आतंकवादियों से क्यों बात की ? भारत सरकार ने अभी तक आतंकी सरकार नहीं कहा है।

किसान आंदोलन पर चुप प्रधानमंत्री से बोला नहीं जा रहा है। ख़र्चीले आयोजन से ग्लोबल लीडर नहीं बना जाता है। आज तक बोल नहीं पाए कि तालिबान आतंकी है या कुछ और। पोलिटिक्स देखिए, सरकार से सवाल नहीं पूछा जा रहा है, किसी और से पूछा जा रहा है।


शम्भूनाथ शुक्ला-

यह अख़बार की लीड है कोई वैचारिक पेज नहीं। क्या किसी चीफ़ सब, न्यूज़ एडिटर या रेज़िडेंट एडिटर को हक़ है कि वह किसी अन्य देश की सरकार को यूँ आतंकी कह दे? क्या भारत सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार को आतंकी कहा है?

इस तरह तो यह लीड न्यूज़ किसी दूसरे देश के अंदरूनी मामले में दख़ल है। अगर आतंकी सरकार है तो विश्व समुदाय उसे आतंकी कहे या भारत सरकार। किसी पत्रकार को सदैव निष्पक्ष एवं धीर-गंभीर रहना चाहिए। यूँ फ़ैसलाकुन हो जाना उचित नहीं।

यह हिंदी बेल्ट का सबसे प्रतिष्ठित दैनिक है। अतः मुझे इस लापरवाही पर खीझ हुई। जो लोग पत्रकारिता को नहीं समझते वे कृपया टिप्पणी न करें। जिन्हें डेस्क की जवाबदेही का ज्ञान नहीं है वे अपने अंदर के इस्लामोफोबिया का फूहड़ प्रदर्शन न करें। समाचार आपकी खुन्नस से नहीं लिखा जाता उसे परोसने के पहले सरकार के पक्ष को भी रखें अन्यथा एडिट पेज में लिखें।

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप परBWG7

आपसे सहयोग की अपेक्षा भी है… भड़ास4मीडिया के संचालन हेतु हर वर्ष हम लोग अपने पाठकों के पास जाते हैं. साल भर के सर्वर आदि के खर्च के लिए हम उनसे यथोचित आर्थिक मदद की अपील करते हैं. इस साल भी ये कर्मकांड करना पड़ेगा. आप अगर भड़ास के पाठक हैं तो आप जरूर कुछ न कुछ सहयोग दें. जैसे अखबार पढ़ने के लिए हर माह पैसे देने होते हैं, टीवी देखने के लिए हर माह रिचार्ज कराना होता है उसी तरह अच्छी न्यूज वेबसाइट को पढ़ने के लिए भी अर्थदान करना चाहिए. याद रखें, भड़ास इसलिए जनपक्षधर है क्योंकि इसका संचालन दलालों, धंधेबाजों, सेठों, नेताओं, अफसरों के काले पैसे से नहीं होता है. ये मोर्चा केवल और केवल जनता के पैसे से चलता है. इसलिए यज्ञ में अपने हिस्से की आहुति देवें. भड़ास का एकाउंट नंबर, गूगल पे, पेटीएम आदि के डिटेल इस लिंक में हैं- https://www.bhadas4media.com/support/

भड़ास का Whatsapp नंबर- 7678515849

Comments on “अमर उजाला ने ‘आतंकी सरकार’ लिख दिया!

  • lav kumar singh says:

    मैं तो बस इतना ही पूछना चाहूंगा शंभु सर कि ये दोहरा मापदंड क्यों? जब टेलीग्राफ रोजाना इसी प्रकार के वैचारिक शीर्षक लगाए तो वाह-वाह, लेकिन दूसरा कोई ऐसा करे तो आह-आह….और रवीश जी सरकार की लीक पर या सरकार के कहे पर कब से चलने लगे कि सरकार कहेगी तभी आतंकी कहेंगे? अफगानिस्तान में इनामी आतंकवादी मंत्री बने हैं, क्या इसे देखने के लिये किसी तीसरी आंख की जरूरत पड़ेगी? सब जानते हैं कि सरकारें यूं ही किसी मसले पर प्रतिक्रिया नहीं दिया करतीं, लेकिन जनता और मीडिया स्वतंत्र है, वह कह सकता है और कह रहा है।

    Reply
  • Ashutosh Dwivedi says:

    भारत सरकार के कहने की प्रतीक्षा का मुद्दा कुटिलता भरा है। परंतु शंभू सर की बात पूरी तरह से पत्रकारिता के मानदंड है। हमें रंग भरे शब्द की आवश्यकता ही नहीं है। हार्डकोर खबर की संरचना में यही किरकिरी सा है। तालिबान का जिसके मस्तिष्क में जो प्रभाव है वो तालिबानी सरकार लिखे जाने के बाद उठा ही लेगा…पत्रकार नाहक उलझ रहा है।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code