‘द सूत्र’ से पहला विकेट गिरा!

चंदा बैंक अकाउंट में और लेट-सैलेरी कैश में! भोपाल से शुरू हुए यूट्यूब चैनल ‘द सूत्र’ को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी हवा थी क्योंकि इसे दैनिक भास्कर भोपाल समूह के पूर्व नैशनल एडिटर मार्केट में बतौर एडिटर-इन-चीफ व निदेशक ला रहे थे। टीजर्स और प्रोमो ने अच्छी झांकी खीच रखी थी, उम्मीदों का ग्राफ हाई था। लेकिन एक हफ्ते में ही गुब्बारे की हवा निकल गई और पहला विकेट गिर गया है।

यहां अमित पाठे ने बतौर एग्ज़ीक्यूटिव कॉन्टेन्ट प्रॉड्यूसर जॉइन किया था। इससे पहले उनकी 3 साल लंबी पारी ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के भोपाल कॉर्पोरेट ऑफिस में बतौर ग्राफिक डिज़ाइनर रही। ‘द सूत्र’ की औपचारिक लॉन्चिंग 1 जुलाई को हुई है। बता दें कि इस यूट्यूब चैनल ने अपनी पंच लाइन ‘हम सिर्फ भगवान से डरते हैं’ रखी है। ‘द सूत्र’ प्रबंधन का दावा है कि वह सरकारी विज्ञापन नहीं लेंगे, हालांकि यहां सरकार यूट्यूब चैनल्स और न्यूज़ पोर्टल्स को विज्ञापन देती ही नहीं है। फिर मोबाइल एप पर सरकारी विज्ञापन मिलना तो दूर की बात है।

खैर, ‘द सूत्र’ प्रबंधन का दावा है कि वह ‘समाज पोषित’ पत्रकारिता करेगा। क्राउड फंडिंग, यानी लोगों से चंदा लेकर यह यूट्यूब चैनल और इसका खर्चा चलाया जाएगा। लेकिन सच्चाई ये है कि आनंद पांडे बिल्डर्स आदि को लेटर लिखकर फ्री में विज्ञापन ऑफर कर रहे हैं लेकिन मार्केट से रिस्पॉन्स भगवान भरोसे है।

भोपाल में एमपी नगर प्रेस कॉम्पलेक्स में दैनिक भास्कर की बगल में इसका ऑफिस है जहां पहले गुटका कारोबारी किशोर वाधवानी के दबंग दुनिया डिजिटल का ऑफिस था। इसका मासिक किराया लाखों में है। गौरतलब है कि इसी बिल्डिंग में द टाइम्स ऑफ इंडिया का एडिटोरियल का इतना ही बड़ा ऑफिस भी है जिसका किराया 1.5 लाख रुपए प्रति महीने के आसपास है।

दिहाड़ी मज़दूर की तरह कैश पेमेंट

‘द सूत्र’ पहले महीने ही अपने कर्मचारियों को समाचार लिखे जाने (9 जुलाई) तक जून की सैलेरी नहीं दे पाया है। जिससे कर्मचारियों का धैर्य कमजोर होता जा रहा है।

अमित पाठे ने बताया कि उनकी जितने सैलेरी पैकेज पर बात हुई थी, लॉन्चिंग के बाद प्रबंधन इससे मुकर गए और सैलेरी देने की कोई संभावित समय सीमा भी नहीं बता पाए।

अमित ने बताया कि वहां कोई एचआर या एडमिन का भी कोई अता-पता नहीं है, ना किसी के कोई ऑफिशियल ईमेल्स हैं। सब व्हाट्सअप ग्रुप्स के भरोसे चल रहा है, चाहे वो खबर हो या मैनेजमेंट।

चौकाने वाली बात यह है कि जब अमित ने प्रबंधक से सैलेरी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और अकाउंट डिटेल्स देने की बात की तो उन्होंने सैलेरी कैश देने की बात कही। मई में भी यहां सैलेरी कैश में ही बांटी गई थी। ना कोई ऑफर लेटर, जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड, विज़िटिंग कार्ड, अपॉइंटमेंट लेटर ना ही सैलेरी स्लिप। सब कुछ दिहाड़ी मज़दूर की तरह कैश पेमेंट। सब भगवान भरोसे है।

बीजेपी-संघ के नेताओं का आना-जाना

‘समाज पोषित’ पत्रकारिता करने और ‘हम सिर्फ भगवान से डरते हैं’ को अपना ‘ध्येय वाक्य’ कहने वाले यूट्यूब चैनल ने लोगों से चंदा लेने के लिए अपनी अतरंगी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड का एक्सिस बैंक का अकाउंट नंबर दिया है। लेकिन कर्मचारियों को सैलेरी कैश में बांटी जा रही है जिसे इन्वेस्टर, स्पॉन्सर और पैसे के स्त्रोत व चंदे को लेकर अटकलें लगाईं जा रहीं हैं। ‘द सूत्र’ के ऑफिस में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से लेकर संघ परिवार के वरिष्ठ करीबियों का आना और लंबी मीटिंग का दौर होता है।

बड़े नामों के बासी व साभार लेख भरे

‘द सूत्र’ दावा करता है कि आलोक मेहता, वेदप्रकाश वैदिक, एनके सिंह(भोपाल), जगदीश उपासने, एनके सिंह (दिल्ली) और ऋचा अनिरूद्ध भी उनसे जुड़े हुए हैं। हालांकि लॉन्चिंग से पहले लेकर अभी तक इन पत्रकारों की ना कोई स्टोरी या वीडियो वेबसाइट पर आया है। इनमें से कोई ग्रैंड लॉन्चिंग में भी नहीं आया। ‘द सूत्र’ की वेबसाइट पर भी इन वरिष्ठ मीडिया आइकन्स का उनसे जुड़ाव का ना कोई जिक्र है और ना ही फोटो है। हालांकि, वेबसाइट के ‘विचार मंथन’ टैब में आलोक मेहता और वेदप्रकाश वैदिक के प्रकाशित हो चुके बासी साभार लेख हैं।

भोपाल से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करेंWhatsapp Group

भड़ास के माध्यम से अपने मीडिया ब्रांड को प्रमोट करने के लिए संपर्क करें- Whatsapp 7678515849



One comment on “‘द सूत्र’ से पहला विकेट गिरा!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *