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टीवी चैनलों की ‘सुरक्षा मंज़ूरी’ को सरकार ने सुगम बनाया

मुंबई: सरकार ने केबल टीवी कंपनियों, टेलिविज़न चैनलों और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों से जुड़ी सुरक्षा मंजूरी की प्रकिया को सुगम कर दिया है। सुरक्षा मंजूरी तीन साल के बजाय अब 10 साल तक के लिए वैध होगी। 

मुंबई: सरकार ने केबल टीवी कंपनियों, टेलिविज़न चैनलों और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों से जुड़ी सुरक्षा मंजूरी की प्रकिया को सुगम कर दिया है। सुरक्षा मंजूरी तीन साल के बजाय अब 10 साल तक के लिए वैध होगी। 

ये व्यवस्था टेलिविज़न चैनलों की अपलिंकिंग व डाउनलिंकिंग, मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ), टेलिपोर्ट खिलाड़ियों और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के लिए मान्य होगी। गृह मंत्रालय के आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर एक चैनल के लिए अनुमति दे दी गई है तो उसी सेक्टर में बाद में किए जानेवाले किसी लॉन्च के लिए अलग से सुरक्षा मंजूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी। लेकिन, सूचना व प्रसारण मंत्रालय कंपनी व उसके निदेशकों से हर साल यह लिखवाकर लेगी कि वे किसी आपराधिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं। 

साथ ही मंत्रालय लगातार उनके कंटेंट का ऑडिट करवा रहेगा ताकि सुनिश्चित हो सके कि वे कोई विध्वंसक या राष्ट्रविरोधी सामग्री प्रसारित नहीं कर रहे हैं। आदेश में आगे कहा गया कि “किसी इकाई को एक प्रस्ताव पर दी गई सुरक्षा मंजूगी उसके अन्य प्रस्तावों (उसी सेक्टर के भीतर) के लिए भी वैध रहेगी।” लेकिन यह मंजूरी उस हालत में वैध नहीं रह जाएगी, जब निदेशक बोर्ड या कंपनी में 10 प्रतिशत व अधिक के अंतिम लाभार्थी स्वामित्व में कोई बदलाव आ जाए या मौजूदा सामुदायिक रेडियो सेवा लाइसेंस का विस्तार सीमावर्ती या नक्सल-प्रभावित इलाकों तक कर दिया जाए। इसके अलावा, एक सेक्टर के लिए हासिल की गई सुरक्षा मंजूरी किसी अन्य सेक्टर के लिए मान्य नहीं होगी। 

इसका मतलब यह हुआ कि किसी कंपनी को अगर चैनलों का बुक़े चलाने के लिए सुरक्षा मंज़ूरी मिली है तो वह उसका इस्तेमाल सामुदायिक रेडियो स्टेशन चलाने में नहीं कर सकती। वैसे, पिछले यूपीए शासन के दौरान ही गृह मंत्रालय ने सुरक्षा मंजूरी की वैधता की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया था। उसने यह फैसला न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के प्रजेंटेशन के बाद किया था जिसमें एनबीए ने मांग की थी कि सुरक्षा मंजूरी की वैधता अवधि को लाइसेंस की अवधि के समरूप या बराबर किया जाना चाहिए। फिर भी, मंत्रालय ने शर्त जोड़ दी थी कि इस मुद्दे पर दोबारा गौर किया जा सकता है। उसने यह भी साफ किया था कि अगर कोई नया चैनल लॉन्च किया जाता है या कंपनी के निदेशक बोर्ड में कोई तब्दीली होती है तो कंपनी को नए सिरे से सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। 

(‘हिंदी टेलिविजन’ से साभार)

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