‘फ़ेम इंडिया’ वाले संथालिया भी नहीं रहे

राणा यशवंत-

आज की सुबह मुझ पर क़हर बनकर टूटी।नींद ही बहुत बुरी खबर से टूटी। बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा हूँ। आपको बचाने की लड़ाई निजी तौर पर लड़ी और हार गया। जबकि मेरे लिए कोई भी लड़ाई आपने नहीं हारी सोन्थलिया जी! मेरी परेशानियों और ज़रूरतों के साथी रहे आप। मगर आपकी ज़रूरत की इस सबसे बड़ी घड़ी में मेरी सारी कोशिशें नाकाफ़ी पड़ गयीं।

ये यक़ीन नहीं कर पा रहा कि मेरी ज़िंदगी से आप हमेशा के लिए हट गए हो। कभी वो आवाज़ नहीं आएगी – राणा साहब! चलिए डिनर पर चलते हैं। दोस्त, तुमने आज दहला रखा है, रुला रखा है। शानदार इंसान थे आप, ईश्वर के घर आपको शानदार जगह मिले उमाशंकर सोन्थलिया जी!

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