Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

अमित शाह की नई टीम के लिए छोटी पड़ गई वरूण की वफादारी

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सांसद वरूण गांधी को जगह नहीं देकर पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष अमित शाह ने सत्ता के गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जो थमने का नाम ही नहीं ले रही है। भले ही मुट्ठी भर लोगों को ही उम्मीद थी कि वरूण गांधी, अमित शाह की टीम में जगह नहीं बना पायेंगे, लेकिन यह बात सच साबित हुई। वरूण को कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिलने की बात सार्वजनिक होते ही उन कारणों की भी तलाश शुरू हो गई है जिसकी वजह से वरूण को अनदेखा किया गया। राजनैतिक पंडित कहते हैं कि भले ही वरूण की गिनती बीजेपी के तेजतर्रार नेताओं में होती है, लेकिन लोकसभा चुनाव और उसके बाद जिस तरह का आचरण वह और उनके समर्थक कर रहे थे, उसके चलते ही उन्हें संगठन में अहमियत नहीं दी गई। खासकर तीन मुख्य ऐसी बातें थी जो वरूण के खिलाफ गई।

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सांसद वरूण गांधी को जगह नहीं देकर पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष अमित शाह ने सत्ता के गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जो थमने का नाम ही नहीं ले रही है। भले ही मुट्ठी भर लोगों को ही उम्मीद थी कि वरूण गांधी, अमित शाह की टीम में जगह नहीं बना पायेंगे, लेकिन यह बात सच साबित हुई। वरूण को कार्यकारिणी में स्थान नहीं मिलने की बात सार्वजनिक होते ही उन कारणों की भी तलाश शुरू हो गई है जिसकी वजह से वरूण को अनदेखा किया गया। राजनैतिक पंडित कहते हैं कि भले ही वरूण की गिनती बीजेपी के तेजतर्रार नेताओं में होती है, लेकिन लोकसभा चुनाव और उसके बाद जिस तरह का आचरण वह और उनके समर्थक कर रहे थे, उसके चलते ही उन्हें संगठन में अहमियत नहीं दी गई। खासकर तीन मुख्य ऐसी बातें थी जो वरूण के खिलाफ गई।

बात लोकसभा चुनाव के दौरान की कि जाये तो जब पूरी भाजपा शिद्दत के साथ भाजपा के प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के साथ एकजुट खड़ी थी और जगह-जगह मोदी की जनसभाएं हो रहीं थीं, तब वरुण गांधी ने अपने यहां मोदी की जनसभा कराने में रूचि नहीं ली। इतना ही नहीं अपने संसदीय क्षेत्र में प्रचार के दौरान भी वरूण गांधी, नरेन्द्र मोदी का नाम लेने से कतराते रहे। वरूण गांधी को इससे कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन मोदी के करीबी नेताओं को यह बात काफी बुरी लगी। इसमें उत्तर प्रदेश के प्रभारी और आज के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी थे, जो यूपी में मोदी को लेकर ही सारी रणनीतियां बना रहे थे।

बात यहीं खत्म नहीं हुई। प्रचार के दौरान वरूण ने यह कहकर आलाकमान की नाराजगी और बढ़ा दी कि चाहें कुछ भी हो जाये वह कांगे्रस अध्यक्षा सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली और अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार करने नहीं जायेंगे। जबकि सोनिया और राहुल लगातार नरेन्द्र मोदी पर अनर्गल आरोप लगा कर लगातार हमलावर थे। पूरे प्रचार के दौरान वरूण गांधी भारतीय जनता पार्टी जिसके वह उम्मीदवार भी थे से अधिक गांधी परिवार(सोनिया-राहुल) के प्रति वफादार दिखे। कहीं भी उन्होंने सोनिया-राहुल या फिर प्रियंका के खिलाफ मुंह नहीं खोला। एक बार प्रियंका के एक विवादास्पद बयान के बाद वरूण ने उनके(प्रियंका) प्रति थोड़ी नाराजगी जरूर दिखाई थी, लेकिन यह भी सिर्फ सांकेतिक थी। भले ही वरूण गांधी ने ऐसा करके खानदान की मर्यादा को बनाये रखा था, परंतु राजनीति में यह सब बाते गौण हो जाती है। राजनीति के मैदान में न तो कोई किसी का दुश्मन होता है और न ही दोस्त।

बात तीसरी और जो सबसे अहम थी, वह वरूण का यूपी का मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना था। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ दिनों बाद ही वरूण और उनके समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से 2017 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिये लॉबिंग करने लगे थे। इस मुहिम को तब और तेजी मिल गई जब ajaykumarmaya1मेनका गांधी ने एक सार्वजनिक मंच पर वरूण को यूपी का संभावित मुख्यमंत्री बता दिया। इस पर भाजपा आलाकमान और उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इसी के बाद से वरूण को लेकर भाजपा आलाकमान फूंक-फूंक कर कदम रखने लगी थी। हाईकमान यह मान कर चलने लगा था कि वरूण पर कोई बड़ा दांव तब तक नहीं लगाया जा सकता है, जब तक की यह स्पष्ट न हो जाये कि उनकी वफादारी गांधी खानदान से अधिक भाजपा के प्रति है। वैसे, कहने वाले यह भी कह रहे हैं मां मेनका गांधी मोदी कैबिनेट में मंत्री है। ऐसे में उनके बेटे वरूण गांधी को संगठन में महत्वपूर्ण पद दिया जाता तो इससे कार्यकर्ताओं/नेताओं और विपक्ष में ज्यादा सही संदेश नहीं जाता।

 

लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं और यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं।

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन