लखनऊ में विधानसभा सत्र की कवरेज के नियम हुए सख्त

लखनऊ । मात्र नेताओं और मंत्रियों को चेहरा दिखाने वाले और लॉबी पास के नाम पर रौब गांठने वाले पत्रकारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रमुख सचिव विधान सभा ने अंकुश लगा दिया है। अब किसी भी पत्रकार का लॉबी पास और बगैर राज्य मुख्यालय की मान्यता के विधान सभा सत्र को कवरेज करने का पास नहीं जारी होगा। 29 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र की कवरेज के लिए विधान सभा ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप दुबे ने सत्र कवरेज के लिए एक दिशा-निर्देश जारी किया है। इस दिशा-निर्देश में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों के तीन प्रतिनिधि और एक संवाददाता तथा प्रदेश स्तर के अखबार के दो प्रतिनिधि और एक छायाकार का प्रवेश पत्र निर्गत किया जाएगा। इलेक्ट्रिानिक चैनल के दो प्रतिनिधियों और दो कैमरा मैन के पास निर्गत किए जाएंगे। जबकि राष्ट्रीय चैनलों के क्षेत्रीय चैनलों को पास नहीं जारी किए जाएंगे। उन्हीं स्वतंत्र पत्रकारों के प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे, जिनकी राज्य मुख्यालय की मान्यता तीन वर्ष से अधिक है। जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पास नहीं जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही विधान सभा की सुरक्षा को चौक-चौबंद करने के लिए विधायकों के नाम वाली कार पास जारी किए जा रहे हैं। विधायकों और मंत्रियों के गुर्गों की कारों के पास अब नहीं बन जाएंगे।

विधान सभा सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ सालों से थोक के भाव में हुई राज्य मुख्यालय की मान्यता के कारण पत्रकारों की बढ़ती निरकुंशता पर अंकुश लगाने के लिए यह सर्कुलर जारी किया गया है। जिनको पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है, उनको राज्य मुख्यालय की मान्यता मिल गई है। विधान सभा में सत्र की कवरेज के बहाने मात्र पत्रकारों में विधायकों और मंत्रियों को चेहरा दिखाने की होड़ रहती है। इनमें से अधिकतर विधान सभा के नियम और परम्परा से अनभिज्ञ हैं। इसी होड़ के कारण पिछले साल कुछ पत्रकारों ने विधान सभा की कार्यवाही को मोबाइल से कवरेज करने का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री द्वारा इंगित किए जाने के बाद से विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने पत्रकारों को विधान सभा मण्डप में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल ने कहा कि अगर सुरक्षा के मद्देनजर यह व्यवस्था लागू की गई है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। यदि पत्रकारों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है तो चिंता का विषय है। एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पत्रकारों की आपसी फूट का नतीजा है। अब दो-दो मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पत्रकारों के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। इसके बावजूद समस्याएं हल होने के बजाए बढ़ रही हैं। (साभार- निष्पक्ष दिव्य संदेश)



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